Monday, 13 July, 2020

Very Short Stories of Tenali in Hindi with Moral / तेनाली राम की कहानी


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Very Short Stories of Tenali in Hindi with Moral राजा कृष्णदेव राय की माता बहुत ही बूढी हो गयी थीं।  एक बार वे बहुत अधिक बीमार हुई और लगा कि वे जल्द ही मर जाएंगी।

 

 

 

 

Very Short Stories of Tenali in Hindi 

 

 

 

 

राजा की माँ को आम बहुत पसंद था , इसलिए वे अपनी जीवन के आखिरी दिनों  में सबको आम बाटना चाहती थी। इसलिए, उन्होंने राजा से कहा,”  मैं ब्राम्हणो को आम बांटना चाहती हूँ। यह काम करने से शायद मुझे स्वर्ग की प्राप्ति हो जाय। ”  लेकिन जब तक उनकी यह इच्छा पूरी होती उनकी मृत्यु हो गयी।

 

 

 

 

तेनाली रमन की छोटी कहानियां 

 

 

 

 

राजा ने अपनी माँ की मृत्यु  के बाद सभी ब्राम्हणो को बुलाया  और उन लोगो को अपनी माँ  की अधूरी  अंतिम इच्छा के बारे में बताया। यह बात सुनकर वे लोग कुछ देर तक चुप रहे और उसके के बाद बोले, ” यह तो बहुत ही बुरा हुआ महाराज, उनकी आखिरी इच्छा पूरा न होने के कारण  उनको मुक्ति नहीं मिलेगी और वे भूत बनकर भटकती रहेगी।   उनकी आत्मा की शान्ति के लिए कुछ करना चाहिए। ”

 

 

 

 

इसपर राजा ने पूछा, ” तो फिर इसके लिए क्या करना चाहिए ? ” इसपर ब्राह्मणों ने कहा, ” अपनी माँ की आत्मा की शान्ति के लिए आप उनकी पुण्यतिथि के दिन ब्राह्मणो को सोने के आम दान दें। ”

 

 

 

 

जब तेनाली राम को इस बात का पता चला, तो वह समझ  गए कि  ब्राम्हण  राजा के भोलेपन का फायदा उठा रहे हैं, इसलिए उन्होंने ब्राह्मणों को सबक सीखने के लिए एक उपाय सोचा।

 

 

 

 

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दूसरे दिन तेनाली राम ( Tenali Ram ) ने उन ब्राम्हणो को पत्र लिखा। जिसमे लिखा था, ” तेनाली राम अपनी माँ की पुण्यतिथि पर ब्राम्हणो को कुछ दान करना चाहता है। क्योंकि वह भी अपनी इच्छा पूरा किये बिना ही मर गयी थी। ”

 

 

 

 

सभी ब्राह्मण निश्चित दिन समय पर पहुँच गए।  तेनालीराम ने ब्राह्मणो को स्वादिष्ट भोजन कराया।  भोजन करने के बाद सब लोग दान मिलने की प्रतिच्छा करने लगे।

 

 

 

 

तभी उन लोगो देखा की तेनाली राम ( Tenali Rama )  लोहे का सलिया आग में गर्म कर रहा है। इसपर उन लोगो ने घबराकर तेनाली राम से पूछा, ” तेनाली ( Tenali ) यह क्या कर रहे हो ? ”

 

 

 

 

इसपर तेनाली ने कहा, ” मेरी माँ को फोड़ा हुआ था और वह उसके दर्द से बहुत परेशान थी। मरते समय उन्हें बहुत दर्द हो रहा था।  मैं उनका इस लोहे से इलाज करना चाहता था, लेकिन उसके पहले उनकी मृत्यु हो गयी। अब उनकी आत्मा की शांति के लिए मुझे आपके साथ ऐसा करना पड रहा है, जिससे उनकी अंतिम इच्छा पूरी हो जाएगी।”

 

 

 

 

 

यह सुनकर ब्राम्हण गुस्सा हो गए और वहाँ से भागना चाहे।  इसपर तेनाली ने कहा, ” आप कहाँ जा रहे हैं ? अभी तो अंतिम इच्छा की प्रक्रिया पूरी करनी है। ”

 

 

 

 

इसपर ब्राह्मण बोले, ” यह क्या बेतुका हरकत है।  भला ऐसा कभी होता है क्या ? ” इसपर तेनाली राम ने कहा, ” अगर सोने के आम के दान से राजा के माँ की अंतिम इच्छा पूरी हो सकती है तो मेरी माँ की अंतिम इच्छा क्यों पूरी नहीं हो सकती ? ”

 

 

 

 

यह सुनकर सभी ब्राम्हण समझ गए कि माजरा क्या है ? उन्होंने कहा, “तेनाली राम, हमें माफ़ कर दो। हम लोग वह सोने आम तुमको दे देंगे,  हमें जाने दो। ”

 

 

 

तेनाली राम ने उनसे सोने का आम लिया और उसके बाद उन लोगो को छोड़ दिया, लेकिन उनमे से एक लालची ब्राम्हण यह बात राजा को बता दिया।

 

 

 

 

यह सुनते ही राजा गुस्सा हो गए और उन्होंने तेनाली राम को बुलाया। राजा ने तेनाली से कहा, “अगर तुम्हे सोने के आम चाहिए थे तो मुझसे मांग लेते। तुम इन लोगो से यह सोने के क्यों लिए ?

 

 

 

 

इसपर तेनाली राम ने कहा, ”  महाराज, मै लालची नहीं हूँ।  मै तो इन लोगो को लालच से रोक रहा था।  अगर ये लोग आपकी माँ की आत्मा की शांति के लिए सोने आम ले सकते है तो मेरी माँ की आत्मा की शांति के लिए गरमा सलाखे क्यों नहीं ले सकते ?” राजा तेनाली राम की बातो को समझ गए। उन्होंने ब्राम्हणो को बुलाया और लालच छोड़ने को कहा।

 

 

 

 

Short Tenali Raman Story in Hindi 

 

 

 

 

2- तेनाली राम दस दिन से दरबार में नहीं जा रहे थे । उसके दरबार में न आने से राजा बहुत चिंतित थे और कोई कार्य भी नहीं हो रहा था। राजा के एक मंत्री ने कहा, ”  तेनाली रामा  के नहीं रहने से सभी कार्य हो जायेगा।  आप चिंता ना करो। ” लेकिन राजा को अच्छा नहीं लगा।

 

 

 

 

 

एक दिन वह नदी के किनारे घूमने के लिये गए तो देखा एक साधु वहां बैठे हुए थे । राजा ने नर्मदा नदी के स्वच्छ पानी का अवलोकन किया फिर राज्य में आ गये, लेकिन उनकी परेशानी कम नहीं हुई थी।

 

 

 

 

 

 

दूसरे दिन फिर नदी के तट पर घूमने गए। पुनः वही साधू वहां बैठा था। उसने राजा से कहा, “आप बहुत परेशान लग रहे है ?” इसपर राजा ने कहा, “कल नदी का पानी अधिक था।  आज पानी कम लग रहा है।  हमारा विश्वास पात्र तेनाली राम राजदरबार में नहीं आ रहा है। न जाने कहां चला गया। इसलिए मैं चिंतित हूँ।”

 

 

 

 

 

साधू ने कहा, “नर्मदा ( Narmada ) का पानी जो कल था बह चुका है। यह दूसरा पानी है। उसी तरह तेनाली राम के नहीं रहने पर आप अन्य लोगों के साथ अपने राज्य पर ध्यान दीजिये।  आना जाना तो लगा ही रहता है। अगर आप कहे तो मैं अभी आपको तेनाली राम ( Tenali Raman ) से मिलवा सकता हूँ।”

 

 

 

 

 

राजा ने ध्यान से देखा साधू ने अपनी दाढ़ी को हटाया और सामने तेनाली राम खड़ा था। राजा तेनाली राम के साथ राज्य में लौट आये।

 

 

 

 

 

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