Best 3 + Tiger Story in Hindi Language / बाघ और शेर की जबरदस्त  कहानी।

Best 3 + Tiger Story in Hindi Language / बाघ और शेर की जबरदस्त कहानी।

मित्रों इस पोस्ट में बाघ की कहानी (Tiger Story in Hindi ) दी गयी है। यह Tiger Story in Hindi Written बहुत ही बढियाँ हिंदी कहानी है।

 

 

 

 

Tiger Story in Hindi ( बाघ और शेर की कहानी हिंदी में ) 

 

 

 

 

 

1- एक जंगल में शेरू नामक एक शेर अपने मंत्री बबलू नामक बाघ के साथ रहता था। शेरू नामक शेर हमेशा ही उल जलूल हरकत करता रहता था।

 

 

 

 

लेकिन मंत्री बबलू बहुत चालाकी से उसे संभाल लेता था। एक दिन शेरू अपने मंत्री बबलू के साथ घूमते हुए नदी की तरफ गया और मंत्री बबलू से पूछा, “बबलू यह नदी कहां जाती है ?”

 

 

 

 

मंत्री बबलू बोला, “महाराज, यह नदी हमारे पड़ोस वाले जंगल की तरफ जाती है।”

 

 

 

 

शेरू बोला, “तब इस नदी का पानी दूसरे जंगल के जीव भी पीते होंगे।”

 

 

 

बबलू मंत्री बोला, “हां।”

 

 

 

शेरू बोला, “हमारे पड़ोस के जंगल वाले अपने जंगल में हम लोगो को नहीं जाने देते है। तुम ऐसा करो इस नदी में दीवार बनवा दो। ताकि नदी का पानी उधर नहीं जा पाए। तब पड़ोस वाले जंगल में रहने वालो को पता चलेगा।”

 

 

 

 

बबलू मंत्री सोचने लगा अगर मैं शेरू की बात नहीं मानूंगा तो वह मुझे मार देगा।

 

 

 

 

बबलू मंत्री ने हाथियों से कहकर नदी में दीवार बनवा दिया। अब नदी का पानी रुक गया था। वह रुका हुआ पानी जंगल में सभी जानवरो के घरो में भरने लगा।

 

 

 

 

सभी जानवर परेशान होकर मंत्री बबलू के पास आए। मंत्री बबलू ने एक आइडिया लगाया। उसने हाथी से कहा, “तुम जाकर सुबह होने का घंटा बजा दो।”

 

 

 

 

हाथी ने जाकर सुबह होने का घंटा बजा दिया। सभी जानवरो के साथ ही शेरू भी निकल जाग गया। गुफा से बाहर पैर रखते ही उसका पांव पानी में भीग गया।

 

 

 

 

वह बबलू मंत्री को बुलाया और बोला, “अभी तक अंधेरा है। तुमने सुबह होने का घंटा क्यों बजवा दिया ?”

 

 

 

 

बबलू मंत्री बोला, “महाराज, सुबह तो हो चुकी है लेकिन पड़ोस के जंगल वालो ने सूरज को इधर आने से रोक दिया है। वह लोग कह रहे थे। तुम लोग हमे पानी नहीं दोगे तो हम भी तुम्हारी तरफ अपने सूरज को नहीं जाने देंगे।”

 

 

 

 

शेरू बोला, “मंत्री बबलू तुम इसी समय नदी की दीवार गिरवा दो ,हमे अंधेरा बिलकुल भी पसंद नहीं है।”

 

 

 

सभी हाथियों ने नदी की दीवार को गिरा दिया, उसी समय सुबह हो गई। जंगल के सभी जानवर बबलू मंत्री की चतुराई से खुश हो गए।

 

 

 

बारहसिंगा और गोरिल्ला की कहानी ( Reindeer And Gorilla Story in Hindi ) 

 

 

 

Tiger Story in Hindi

 

 

2- एक जंगल में सभी जानवर बहुत ही खुश और सुखी थे। उसमे एक बड़ा सा गोरिल्ला भी था। सभी जानवर उसकी बात मानते थे क्योंकि वह गोरिल्ले की सहायता से कई बार मुसीबत से बच गए थे।

 

 

 

 

एक दिन एक बारहसिंगा दूसरे जंगल में जा रहा था। गोरिल्ले ने पूछा, “बारहसिंगे भाई तुम कहां जा रहे हो ?”

 

 

 

 

बारहसिंगे ने कहा, “मैं पड़ोस वाले जंगल में जा रहा हूँ। वहां बहुत ही सुंदर-सुंदर घास है। वहां हमारा पेट आराम से भर जाएगा।”

 

 

 

 

गोरिल्ला बोला, “वहां एक बाघ रहता है। वह सभी जानवरो को मारकर खा जाता है। यहां पर तुम और सभी लोग सुरक्षित हो।”

 

 

 

 

बारहसिंगा बोला, “मैं बाघ से नहीं डरता हूँ। मैं उसे अपने नुकीले सींगो से उलझाकर मार डालूंगा।”

 

 

 

 

इतना कहकर बारहसिंगा पड़ोस के जंगल में चला गया। वहां हरी-हरी घास देखकर खाने लगा। पास की गुफा से बाघ देख रहा था।

 

 

 

 

वह सोचने लगा यह तो अपने जंगल का जानवर नहीं है है। मैं इसका शिकार अवश्य करूँगा। बाघ ने बारहसिंगे पर वार कर दिया।

 

 

 

 

बेचारा बारहसिंगा प्रतिरोध भी नहीं कर सका बेमौत मारा गया। अब बाघ ने पड़ोस के जंगल का रुख किया। वहां जाकर देखा तो सभी जानवर एक साथ रहते है।

 

 

 

 

वह चुपके-चुपके एक-एक जानवर को खाने लगा। जानवरो की घटती संख्या देखकर गोरिल्ला बोला, “हमारे जानवरो की संख्या कम हो रही है।”

 

 

 

 

तभी बंदर बोला, “मैंने एक बाघ को अपने जंगल में घूमते हुए देखा है। वही एक-एक जानवरो को खा जाता है।”

 

 

 

 

गोरिल्ले ने कहा, “मैंने बारहसिंगे को पड़ोस के जंगल में जाने से मन किया था। लेकिन वह नहीं माना और चला गया लेकिन वापस नहीं लौटा। बाघ उसे खा गया। वही बाघ अब यहां भी आ गया है। मैं एक तरकीब निकालता हूँ। तुम लोगो को सहायता करना होगा।”

 

 

 

 

 

सभी जानवर एक साथ बोले, “मैं तुम्हारी सहायता करने के लिए तैयार हूँ।”

 

 

 

 

गोरिल्ले ने एक पिंजड़ा बनाया। उसमे दोनों तरफ से दरवाजे थे। गोरिल्ले ने हिरण से कहा, “तुम बाघ के सामने जाओगे। वह तुम्हे देखते ही तुम्हारे ऊपर हमला करेगा। तुम्हे भागते हुए इस पिंजड़े में घुसकर दूसरे दरवाजे से बाहर निकलते ही दरवाजा बंद करना देना होगा। इधर मैं पीछे से दूसरा दरवाजा बंद कर दूंगा।”

 

 

 

 

 

हिरण बाघ के सामने जाकर उछलने लगा। बाघ सोचा आज तो हमारा भोजन खुद ही सामने आ गया है। बाघ ने हिरण के ऊपर हमला कर दिया। हिरण तो पहले से ही तैयार था।

 

 

 

 

 

वह जोर से भाग कर पिंजड़े में घुस गया। बाघ जैसे ही हिरण को पकड़ने के लिए पिंजड़े में घुसा हिरण तेजी से बाहर निकलते हुए दरवाजा बंद कर दिया।

 

 

 

 

 

पीछे से गोरिल्ले ने दूसरा दरवाजा भी बंद कर दिया। अब बाघ पिंजड़े में कैद हो गया था। वह बाहर निकलने के लिए हाथ पांव मारने लगा। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

 

 

 

 

तभी गोरिल्ला सामने आकर बोला, “तुमने हमारे साथियो को मारा है। अब मैं तुम्हे पिंजड़े के साथ ही पहाड़ी के नीचे फेक दूंगा।”

 

 

 

 

बाघ डर गया और कहने लगा, “तुम हमे छोड़ दो अब मैं यहां कभी नहीं आऊंगा।”

 

 

 

 

गोरिल्ला ने पिंजड़े से बाघ को बाहर निकाल दिया और बोला, “तुम्हे हमारी ताकत का अंदाजा नहीं है। भाग जाओ यहां से नहीं तो मैं तुम्हे पटक कर मार डालूंगा।”

 

 

 

 

बाघ डर कर भाग गया। जंगल के सभी जानवर गोरिल्ले के कारण सुरक्षित हो गए।

 

 

 

बड़ा मेढक और चीता की कहानी 

 

 

 

Tiger Story in Hindi
Tiger Story in Hindi

 

 

 

3-एक जंगल में एक तालाब था। उस तालाब में एक बड़ा सा मेढक रहता था। वह बड़ा मेढक किसी भी जंगली जानवरो से नहीं डरता था।

 

 

 

 

एक बार एक चीता अपने परिवार के साथ भोजन की टोकरी लेकर जा रहा था। रास्ते में भोजन की टोकरी गिर गई और उसमे रखा सारा भोजन बिखर गया।

 

 

 

 

तभी चीते का सरदार अन्य चीतो से जल्दी से भोजन उठाने के लिए कहा। चीते का सरदार कहने लगा, “तुम लोग इस बिखरे हुए भोजन को जल्दी से उठाओ नहीं तो पीछे राजा अपनी सेना के साथ आकर हम लोगो को मार डालेगा।”

 

 

 

 

सभी चीते भोजन उठा रहे थे। तभी एक बड़ा मेढक वहां आ गया और कहने लगा, “देखो तुम्हारा राजा तो खुद खड़ा है और तुम लोगो से भोजन उठाने के लिए कह रहा है। अगर तुम लोग हमारे साथ चलो तब मैं तुम लोगो को अच्छा भोजन खिलाऊंगा और कुछ काम भी नहीं करना पड़ेगा।”

 

 

 

 

 

एक चीता जो सबसे छोटा था वह मेंढक के बहकावे में आ गया था। छोटा चीता कहने लगा, “जब देखो हम लोगो से काम करने के लिए ही कहता रहता है।”

 

 

 

 

वह चुपके से बड़े मेढक के साथ चल दिया। मेढक ने छोटे चीते को लेजाकर एक पिंजड़े में कैद कर दिया और कहने लगा, “अब मैं तुम्हे बड़े आराम से खाऊंगा।”

 

 

 

 

चीते के सरदार ने देखा तो पाया कि एक छोटा चीता कम है। उसने सभी को साथ लिया और छोटे चीते को ढूंढने चल दिया। तभी एक चीता बोला, “महाराज, मैंने छोटे चीते को एक बड़े मेढक के साथ बात करते हुए देखा था। लगता है वह मेढक के साथ ही गया होगा।”

 

 

 

 

 

अब सभी चीते अपने राजा के साथ उस बड़े मेढक के पास गए, बड़ा मेढक सोया हुआ था। तब सभी चीते ने उसे जगाया। चीतों का राजा बोला, “तुम हमारे छोटे चीते को यहां क्यों लाए हो ?”

 

 

 

 

मेढक का जवाब था, “मैं इसे खाऊंगा।”

 

 

 

एक चीते ने राजा से कहा, “आप इसे बातो में उलझाकर रखिए मैं तब तक छोटे चीते को पिंजड़े से बाहर निकालकर अपने साथ लाता हूँ।”

 

 

 

 

चीतों के राजा ने मेढक को अपनी बातो में उलझा लिया और एक चीता उसे छोटे चीते को पिंजड़े से बाहर निकालकर अपने साथ ले आया।

 

 

 

 

चितो के राजा ने बड़े मेढक को फिर कभी ऐसी गलती नहीं करने की हिदायत देकर छोड़ दिया और छोटे चीते को समझाते हुए कहा, “मैं जो भी कार्य तुम लोगो को करने के लिए कहा करता हूँ। उसमे तुम लोग की भलाई ही छुपी रहती है।”

 

 

 

 

सभी चीते अपने राजा की बात से सहमत थे।

 

 

 

 

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