The Sun And The Wind Story in Hindi  / सूरज और हवा की कहानी

The Sun And The Wind Story in Hindi / सूरज और हवा की कहानी

मित्रों इस पोस्ट में सूरज और हवा की हिंदी कहानी ( The Sun And The Wind Story in Hindi ) दी गयी है। यह The Sun And The Wind Story in Hindi Language बहुत ही बढियाँ हिंदी कहानी है।

 

 

 

 The Sun And The Wind Story in Hindi To Read ( सूरज और हवा की कहानी ) 

 

 

 

 

एक बार जोर की हवा चल रही थी। हवा कह रही थी, “इस समय हमसे बलवान कोई नहीं है क्योंकि मैं बड़े-बड़े पेड़ और पर्वतो को उखाड़ सकती हूँ और सभी को अपनी ताकत से उठाकर पानी में डुबो सकती हूँ।”

 

 

 

 

हवा की डींग भरी बातें सुनकर सूरज से रहा नहीं गया। वह बोला, “इतनी डींग मत हांको चलो फैसला कर लेते है कौन अधिक बलवान है ?”

 

 

 

 

हवा बोली, “ठीक है, अभी फैसला हो जाएगा। उधर देखो एक पथिक जा रहा है उसके गले में मफलर पड़ा हुआ है जो उसके गले से मफलर निकाल देगा वह अधिक बलवान माना जाएगा।”

 

 

 

 

 

सूरज बोला, “ठीक है, मुझे तुम्हारी शर्त मंजूर है।”

 

 

 

 

हवा को अपनी ताकत पर पूर्ण भरोसा था। इसलिए हवा ने कहा, “पहले मैं कोशिश करती हूँ।”

 

 

 

 

अब हवा जोर से चलने लगी। तब वह पथिक सोचने लगा कि मफलर कही उड़ न जाए इसलिए उसे और कसकर अपने गले में लपेट लिया।

 

 

 

 

हवा जितनी जोर से चलती पथिक अपने गर्दन में मफलर को उतना ही लपेटता जाता था। हवा अपने बहुत प्रयास करने पर भी उस पथिक का मफलर उसके गले से नहीं निकाल सकी तो प्रयास करना छोड़ दिया।

 

 

 

 

अब सूरज ने कहा, “कि मेरी बारी है अब मैं भी प्रयास करता हूँ शायद ही मफलर पथिक के गले से निकल जाए।”

 

 

 

 

सूरज धीरे-धीरे अपनी गर्मी बढ़ाने लगा। अब पथिक गर्मी से परेशान होकर एक-एक करके अपने सभी कपड़े निकालने लगा, उसमे मफलर का भी समावेश था।

 

 

 

 

अंत में वह पथिक भी एक घने पेड़ की छाया में आश्रय लेने के लिए मजबूर हो गया था। अब सूरज ने हवा की तरफ देखा हवा की नजरे नीचे झुकी हुई थी। शायद उसे अपने प्रश्न का जवाब मिल गया था।

 

 

 

बुढ़िया और बकरी की कहानी ( Best Goat Story in Hindi ) 

 

 

The Sun And The Wind Story in Hindi

 

 

 

2- सिंध देश का एक व्यापारी चंदन की लकड़ी का व्यापार करने के लिए सुरावन नगर में आया था। वह नगर में प्रवेश करने वाला था तभी एक बुढ़िया बकरी चराते हुए मिली।

 

 

 

 

उसने व्यापारी से पूछा, “तुम सुरावन नगर में क्यों आए हो ?”

 

 

 

 

तब वह चंदन की लकड़ी का व्यापारी बोला, “दादी मैं यहां चंदन की लकड़ी का व्यापार करने के लिए आया हूँ।”

 

 

 

 

वह बुढ़िया कहने लगी, “यहां बहुत सारे ठगने वाले बैठे हुए है। वह तुम्हे जरूर ही ठग लेंगे, तुम होशियार रहना।”

 

 

 

 

व्यापारी को रात हो गई थी। वह सुरावन नगर के बाहर रात बिताने के लिए रुक गया था। तभी दो आदमी उसके पास आकर बोले, “तुम यहां चंदन की लकड़ी का व्यापार करने आए हो। यहां तो इतनी चंदन की लकड़ी है कि तुम्हारी लकड़ी कोई भी नहीं ख़रीदेगा।”

 

 

 

 

 

यह सुनकर व्यापारी उदास हो गया था। तभी ठग बोला, “तुम खुद ही देखो हम लोग तो चंदन की लकड़ी से खाना बना रहे है। तुम हमे एक रुपये किलो के हिसाब से सब लकड़ी दे दो।”

 

 

 

 

व्यापारी कुछ नहीं बोला। वह उन दोनों ठगो को अपनी सारी लकड़ी दे दिया। अब व्यापारी सुबह होने पर आगे की तरफ जाने लगा।

 

 

 

 

तभी एक आंख वाले आदमी ने व्यापारी को टक्कर मारते हुए कहा, “तुमने हमारी एक आंख फोड़ दिया है, या तुम हमे हमारी आंख लौटाओ नहीं तो 2000 रुपये दो।”

 

 

 

 

 

ठग और व्यापारी में बहस होने लगी। तभी अन्य लोग भी आकर उस एक आंख वाले का पक्ष लेकर उसे 2000 रुपये दिलवा दिए। चलते हुए व्यापारी के एक पैर का जूता फट गया था।

 

 

 

 

उसने एक मोची को जूता सिलने के लिए दिया और मोची से जूता सिलने की कीमत पूछा तो मोची बोला, “एक पैर लूंगा।”

 

 

 

 

व्यापारी ने ध्यान नहीं दिया उसका एक पैर कटा हुआ था। इसलिए वह एक पैर मांग रहा था। व्यापारी को लगा एक पैर के जूते की कीमत मांग रहा है। वह आगे बढ़ गया क्योंकि जूता सिलने में देर लग रही थी।

 

 

 

 

वहां कुछ लोग ताश खेल रहे थे। वह भी समय बिताने के लिए वहां ताश खेलने के लिए बैठ गया था। व्यापारी ताश के खेल में हार गया था।

 

 

 

 

तभी ताश खेलने वाले कहने लगे, “तुम समुद्र का सारा पानी पी लो या फिर तुम्हारे पास जीतना धन है सब हमे दे दो।”

 

 

 

 

उन ताश खेलने वालो ने व्यापारी से सब पैसा ले लिया। व्यापारी निराश होकर जा रहा था, तब वही बकरी चराने वाली बुढ़िया मिली। व्यापारी ने उसे सब बातें कह सुनाई।

 

 

 

 

वह बुढ़िया बोली, “मैं तुम्हे एक उपाय बताती हूँ सुनो, यहां से उत्तर की तरफ जाओ वहां एक बड़ा सा महल है। उसमे इन सारे ठगो का गुरु रहता है। वहां सारे ठग जमा होकर अपनी बात उस गुरु को बताते है और वह ठगो का गुरु उन्हें नई-नई तरकीब बताते रहता है।”

 

 

 

 

 

वह चंदन की लकड़ी का व्यापारी उस महल के पास जाकर छुप गया। रात हो गई थी। तभी एक ठग आया जो चंदन की सारी लकड़ी ठग चुका था।

 

 

 

 

वह आकर अपने गुरु से बोला, “गुरु मैंने आज एक चंदन के व्यापारी को अच्छा चूना लगाया। मैंने उससे कहा यहां चंदन की लकड़ी का कोई मूल्य नहीं है, देखो हम लोग चंदन की लकड़ी से खाना पका रहे है और उससे एक रुपये किलो के भाव से सब चंदन की लकड़ियां खरीद लिया।”

 

 

 

 

 

तभी ठगो का गुरु बोला, “तुम लोगो को मालूम है वह एक बहुत बड़ा व्यापारी है। अगर उसे मालूम हो गया कि चंदन की लकड़ी का भाव 10 स्वर्ण मुद्रा किलो है तब वह तुमसे और पैसो की मांग करेगा। तुम लोग उसे इतना पैसा कहां से दोगे। तुम्हारी भलाई इसी में है कि उसका या तो माल दे दो या उचित पैसे।”

 

 

 

 

 

वह ठग मुंह लटकाकर चला गया था। तभी एक आंख वाला ठग आया और बोला, “गुरु मैंने तो उस व्यापारी को उल्लू बनाया।”

 

 

 

 

ठगो का गुरु बोला, “क्या हुआ ?”

 

 

 

एक आंख वाला बोला, “मैंने उस व्यापारी से अपनी एक आंख मांगी नहीं देने पर उससे 2000 रुपये ले लिए।”

 

 

 

 

“तुम खुद ही उल्लू बन गए हो क्योंकि व्यापारी 2000 रुपये के बदले में तुम्हारी दूसरी आंख भी मांग लेगा, तब कही के नहीं रहोगे।” ठगो के गुरु ने कहा।

 

 

 

 

तभी मोची आया और कहने लगा, “कि मैंने तो व्यापारी से एक पैर ही मांग लिया।”

 

 

 

 

ठगो का गुरु बोला, “अब तुम अपना दूसरा पैर भी उस व्यापारी को देने के लिए तैयार रहना।”

 

 

 

 

वह ठग एक पैर से चलते हुए वहां से निकल गया। तभी ताश खेलने वाला ठग आकर कहने लगा, “मैंने समुद्र का पूरा पानी उस व्यापारी को पीने के लिए लेकिन उसने हमे पूरा धन सौप दिया क्योंकि वह समुद्र का पूरा पानी कैसे पी सकता है ?”

 

 

 

 

तब ठग के गुरु ने उसे समझाया कि वह व्यापारी तुमसे एक ग्लास में समुद्र का पूरा पानी लाने के लिए कहेगा तब तुम क्या करोगे क्योंकि वह चंदन का व्यापारी बहुत ही चालाक व्यक्ति है।

 

 

 

 

सभी ठग अपना मुंह लटकाकर चले गए थे। सुबह होते ही सभी ठगो ने व्यापारी का सारा पैसा लौटा दिया। व्यापारी अपना पैसा लेकर जा रहा था।

 

 

 

तभी रास्ते में बकरी चराने वाली बुढ़िया मिल गई। चंदन के व्यापारी को उसकी लकड़ी की उचित कीमत ठग ने देकर अपनी जान बचाई अन्यथा व्यापारी उसे सजा अवश्य ही दिलवाता।

 

 

 

 

अब व्यापारी ने कुछ सोने की मोहरे बुढ़िया को दिया क्योंकि उसकी मदद के बिना उसका लूटा गया धन मिलना संभव ही नहीं था।

 

 

 

 

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