Sunday, 09 August, 2020

21 Tenali Raman Stories in Hindi / 21 तेनाली रमन की प्रसिद्ध कहानियां


Tenali Raman Stories in Hindi

Tenali Raman Stories in Hindi इस पोस्ट में हम आपको 10 Famous Tenali Raman Stories in Hindi दे रहे हैं।  सभी 21 Tenali Raman Stories in Hindi कहानिया बहुत ही बढियाँ हैं।  इन्हे पढ़कर आपको बहुत मजा आएगा।

 

 

 

 

 

Tenali Raman Stories in Hindi Short ( तेनाली रमन की कहानियां )

 

 

 

 

 

1- विजय नगर में एक चित्रकार आया हुआ था। उसकी बहुत प्रशंसा हो रही थी। यह बात राजा कृष्णदेव राय तक पहुंची। उन्होंने उस चित्रकार से रात के समय भोजन करते हुए अपना चित्र बनाने को कहा। कुछ ही समय बीता था कि राजा ने वह चित्र देखना चाहा, लेकिन चित्र अभी अधूरा था, क्योकि चित्र बनाने में समय लगता है।

 

 

 

 

 

 

राजा क्रोधित होकर चित्रकार को भगा दिया। चित्रकार बाजार में खड़ा होकर राजा को बुरा भला कहने लगा, क्योकि राजा ने उस चित्र का अपमान किया था। तेनाली राम वहां से गुजर रहे थे।  भीड़ वे देखकर रुक गए। तेनाली राम ने विस्तारपूर्वक पूरी का पता लगा लिया।

 

 

 

 

 

तेनाली रामा की कहानी 

 

 

 

 

 

उन्होंने चित्रकार से कहा, “राजा से बदला लेना है तो तुम हमारे घर चलो और मेरा चित्र बनाओ।” चित्रकार तेनाली के घर गया और उसने तेनाली रामा  का चित्र बनाया चित्र बहुत ही सुंदर बना था। तेनाली राम ( Tenali Raman )  ने अपने चित्र को लेकर दरबार में सबसे पहले जाकर एक जगह खड़ा कर दिया।

 

 

 

 

 

 

जहां से सबकी नजर उस चित्र के ऊपर अवश्य ही पड़े। जैसे ही सभी दरबारी की निगाह उस चित्र के ऊपर पड़ी सब के सब चौंक गए, उन्हें लगा तेनाली राम ( Tenali Rama )  आज सबसे पहले दरबार में आ गए है।

 

 

 

 

 

 

राजा  कृष्णदेव राय ( Krishna Dev Ray ) ने भी उस चित्र को देखा एक बार नहीं तीन बार .  उन्हें लगा तेनाली राम कुछ नहीं बोल रहा है और ना ही उनका अभिवादन कर रहा है। लेकिन जब उन्होंने गौर किया तब ज्ञात हो सका कि यह मात्र एक चित्र है।

 

 

 

 

उन्होंने तेनाली ( Tenali ) से पूछा, “यह चित्र किसने बनाया है क्योकि यह चित्र बहुत ही सुंदर है ?” इसपर तेनालीराम ने कहा, “यह चित्र उसी चित्रकार ने बनाया है जिसे आपने भगा दिया था।” राजा को अपनी गलती का आभास हो गया था। उन्होंने उस चित्रकार को बुलाकर ढेर सारा इनाम दिया।

 

 

 

 

 

Tenali Raman Stories in Hindi Pdf  ( तेनाली राम की हिंदी कहानी ) 

 

 

 

 

 

2-  एक खूबसूरत औरत राजा के दरबार में आई। उसके हाथ में छोटा सा बक्सा था। उसमे बहुत ही सुंदर कपड़ा रखा हुआ था। उसने बक्से में से कपड़ा निकालकर राजा को दिखाया और बोली, “हम अपने कारीगरों के साथ ऐसे ही सुंदर कपड़े बनाते है। अगर आप हमारी आर्थिक मदद करेंगे तो मैं इससे भी सुन्दर कपड़ा आपको बनाकर दे सकती हूँ।”

 

 

 

 

 

 

राजा ने उसे स्वर्ण मोहरों से भरी हुयी एक थैली दिया और 15 दिन में कपड़ा तैयार करके दिखाने का आदेश दिया। 12 दिन बीत चुके थे। राजा ने अपने मंत्री को आदेश दिया, “जाकर पता लगाओ वह औरत अपने कारीगरों के साथ कपड़ा तैयार कर रही है या नहीं।”

 

 

 

 

 

 

 

उधर उस महिला के कारीगर खा पीकर आराम कर रहे थे। मंत्री को आते हुए देखा तो कपड़े बुनने का नाटक करने लगे। मंत्री ने पूछा, “कपड़ा तैयार है या नहीं ?” वह औरत बोली कपड़ा तैयार है। मंत्री ने कहा, “लेकिन वह सुंदर कपड़ा तो हमें नहीं दिख रहा है।”

 

 

 

 

 

 

इसपर औरत ने कहा, “सुंदर कपड़ा देखने के लिए मन का स्वच्छ होना आवश्यक है। मैं कल आकर महाराज को वह कपड़ा दिखा दूंगी।” मंत्री ने जाकर राजा कृष्णदेव राय को सारी बाते बता दी।

 

 

 

 

 

 

दूसरे दिन दरबार में आकर उस औरत ने राजा कृष्णदेव राय ( Krishna Dev Ray ) के सामने दोनों हाथ फैला दिए और बोली, “देखिये महाराज मेरे हाथ में सुंदर कपड़ा है।” राजा को कुछ भी नहीं दिखा क्योंकि उस औरत के हाथ में कुछ था ही नहीं।

 

 

 

 

 

औरत बोली, “यह सुन्दर कपड़ा देखने के लिए मन का स्वच्छ होना जरूरी है।” इन बातों से राजा को अपनी बेइज्जती महसूस हुई। राजा कुछ बोलते उसके पहले ही तेनाली राम बोल उठा, “यह सुंदर कपड़ा आप पहनकर दिखाओ ताकी यह सबको दिख सके।” अब तो उस औरत की सूरत देखने लायक थी। उसकी चोरी पकड़ी गयी। उसने राजा से क्षमा मांगी।  राजा ने हिदायत देकर उसे छोड़ दिया।

 

 

 

 

तेनाली की चालाकी 

 

 

 

 

 

3 ) एक चतुर किसान था। वह अपनी चतुराई से ही अपना भरण- पोषण करता था। विजय नगर के राजा कृष्णदेव राय के दरबार में पहुंचा। उसके हाथ में एक पिंजरा था और उस पिंजरे में एक मोर था। उसका रंग लाल था। राजा को वह मोर बहुत पसंद आया।  उस मोर को राजा ने 30 मोहरें देकर खरीद लिया।

 

 

 

 

 

 

राजा कृष्णदेव राय ( Krishndev Ray ) ने उस चतुर किसान से कहा, “क्या तुम इस मोर के जैसा ही दूसरा मोर ला सकते हो ?” इसपर किसान ने कहा, “यह लाल मोर यहां से दूर जंगल में मिलता है और वहां जाने के लिए अधिक धन की आवश्यकता होगी।”

 

 

 

 

 

 

लेकिन तेनाली राम उस चतुर किसान की चाल समझ गए थे कि यह राजा को मुर्ख बना रहा है। उसने राजा से कहा, “मैं आपको ऐसा दस मोर लाकर दे सकता हूँ। हमें सिर्फ दस दिन का समय चाहिए और थोड़ा सा पैसा।”

 

 

 

 

 

तेनाली राम ( Tenali Rama )  ने कुछ आराम किया, फिर दरबार में उपस्थित हुए।  उनके साथ एक पेंटर भी था।  राजा ने कहा, ” मोर कहाँ है ? ”

 

 

 

 

इसपर तेनाली ने कहा, ” महाराज मैं तो मोर बनाने वाले को ही लाया हूँ।  ”

 

 

 

 

” कैसी बाते कर रहे हो तेनाली ? ” राजा ने आश्चर्य से कहा कहा।

 

 

 

 

” महाराज, वह किसान झूठ बोल रहा था। उसने इसी  चित्रकार से मोर को रंगवाया था।  आप चित्रकार से पूछ लो।  ” तेनाली ( Tenali ) ने कहा।

 

 

 

 

उसके बाद पूरी बात चित्रकार बता दी।  राजा ने तुरंत ही किसान को बुलवाया।  चित्रकार को देखते ही किसान डर गया और अपना झूठ कबूल कर लिया। 

 

 

 

 

राजा ने उसे और चित्रकार को हिदायत देते हुए कहा, ” कभी पशु-पक्षियों पर जुल्म मत करो। ” दोनों ने माफ़ी मांगी और राजा ने तेनाली को ढेर सारा उपहार दिया।

 

 

 

 

Tenali Raman Stories in Hindi Written ( तेनाली की प्रसिद्ध कहानी ) 

 

 

 

 

 

4 – अपने सबसे पुराने और वफादार सेवक से नाराज होकर राजा कृष्णदेव राय ने उसे जेल भेजने की आज्ञा सुना दी। इससे तेनाली राम बहुत दुखी हुए।

 

 

 

 

 

उन्हें पुराने और वफादार नौकर को एक गलती के कारण जेल भेजना उचित नहीं लगा। वह अवसर की प्रतीक्षा करने लगे कि नौकर को न्याय दिला सके।

 

 

 

 

 

 

एक दिन राजा और तेनाली राम ( Tenali Ram )  जंगल से घूमकर लौट रहे थे। समने ही एक बाल उद्यान था। तेनाली राम ने कहा, “महाराज इस उद्यान में चलिये  । राजा तेनाली  के साथ उद्यान में गए। वहां एक बच्चों की टोली नाटक खेल रही थी।

 

 

 

 

 

 

दो सिपाही एक कैदी राजा के सामने लाये। कैदी का सिर्फ इतना सा कसूर था कि उसने किसान के खेत से मूली और गांजर चुराए थे।

 

 

 

 

राजा ने कैदी को देखते हुए कहा, “हम इतना छोटा सा जुर्म के लिए उसे जेल की सजा नहीं दे सकते। लेकिन उस किसान की भरपाई अवश्य कर देंगे, जिसका नुकसान हुआ है।”

 

 

 

 

 

तेनाली ( Tenali ) इस नाटक से बहुत खुश हुए। इस नाटक से राजा बहुत ही प्रभावित हुए और अपने पुराने वफादार सेवक को कैद से आजाद किया। तेनाली रामा  की चतुराई से वह सेवक जेल से बाहर आ गया था।

 

 

 

 

तेनाली की कहानी 

 

 

 

 

 

5 – एक बार विजय नगर में चोरों का आतंक फैला हुआ था। जिसके कारण प्रजा परेशान हो गयी थी। वे लोग राजा कृष्णदेव के दरबार में आये और चोरी की समस्या बताई। राजा ने आदेश दिया राजय में सिपाहियों को लगाया जाय।

 

 

 

 

 

 

लेकिन चोरी कम नहीं हुई। जिसके कारण राजा चिंतित रहने लगे। उन्होंने तेनाली राम को बुलाकर इस समस्या का हल निकालने को कहा।

 

 

 

 

तेनाली राम ( Tenali Rama )  ने कहा, “महाराज, यह तो मेरे लिए बहुत आसान काम है। मैं जल्द ही उन चोरों को आपके सामने लाकर खड़ा करूँगा।” उनकी यह बात सुनकर सभी दरबारी हंसने लगे।

 

 

 

 

 

तेनाली रामा  ने कुछ घरों में जाकर कहा, “हमारे यहां व्यापारी रात के समय अपनी तिजोरी खोलकर चैन से सोते है।” यह बात उन लोगों से सारे राज्य में बोलने को कह दिया। धीरे-धीरे  यह बात चोरों तक पहुंची।

 

 

 

 

 

एक दिन सभी चोर सेठ रामचंद्र के घर चोरी करने गए। उन्होंने देखा तिजोरी खुला था । उन लोगों ने तिजोरी से पूरा पैसा निकल लिया और वहां से एक दरबारी के यहां गए। तेनाली राम ( Tenali Raman ) ने उनका पीछा किया और पकड़ लिया।

 

 

 

 

 

दूसरे दिन तेनाली  राम दो चोर और एक दरबारी के साथ दरबार में आया। राजा ने पूछा, ” यह काम इतनी जल्दी कैसे किया ?” इसपर तेनाली राम ने कहा, “महाराज, मैंने सभी धनी व्यपारियों के घर में तिजोरी के आस- पास काला रंग फैलाने को कहा था। जिससे यह चोर पकड़े गए।”

 

 

 

 

 

 

राजा ने तीनों को बंदी बनाया और तेनाली राम को सोने की मोहरे इनाम में दीं।

 

 

 

 

 

Tenali Raman Stories in Hindi ( तेनाली की कहानी हिंदी में ) 

 

 

 

 

 

6 – एक दिन राजा कृष्णदेव राय कुछ दिनों से बहुत उदास थे। एक दिन वह अपने दरबार में बैठे थे। सभी दरबारियों ने राजा से इस उदासी का कारण पूछा। लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा।

 

 

 

 

 

दूसरे दिन कुछ दरबारियों ने कहा, “महाराज क्युं ना हमारे राज्य में उत्सव मनाया जाय। फिर कुछ लोगो ने कहा महाराज क्यूं ना आप कही घूमने के लिए जाय।” लेकिन राजा किसी की बातों से सहमत नहीं हुए।

 

 

 

 

 

अंत मे राजा ने तेनाली राम से कहा, “तुम मुझे कोई सुझाव नहीं दोगे ?” इसपर तेनाली राम ( Tenali Rama )  ने कहा, “महाराज, मैं आपको एक ऐसे जगह दिखाना चाहता  हूँ, जिससे आपकी उदासी ख़त्म हो जाएगी।”

 

 

 

 

 

राजा ने तेनाली रमन के साथ जाने को कहा, “दूसरे दिन तेनाली राम ने राजा को एक उद्यान में ले गया। जहां कुछ छोटे-छोटे बच्चे खेल रहे थे। जिसे देखकर राजा बहुत ही खुश हुए और उन्होंने तेनाली राम की खूब प्रशंसा की।

 

 

 

 

 

 

7-   राजा कृष्णदेव राय नर्मदा के तट पर टहल रहे थे। राजा ने देखा साधू अपने तप के बल पर हवा में ऊपर उठ गया था और उसकी तपस्या जारी थी। राजा ने सोचा इस साधू से अपने राज्य और प्रजा की भलाई के लिए आशीर्वाद मांग लूं तो अच्छा रहेगा।

 

 

 

 

राजा उस साधू के पास गए और प्रणाम किया, फिर बोले, “महात्मा जी  मैं आपसे बहुत ही प्रभावित हूँ और अपनी प्रजा की भलाई के लिए आशीर्वाद चाहता हूँ।” साधू ने राजा को एक कटोरा देकर कहा, “इसमें पानी भर लाओ।” राजा ने वैसा ही किया, कटोरा में पानी भर लाया।

 

 

 

 

 

साधू ने उसे अभिमंत्रित  करके राजा को देते हुए कहा, ‘ इस पानी को अपने खजाने में छिड़क देना। आपका खजाना चार गुना बढ़ जायेगा। आपको प्रजा की सेवा करने में सुविधा होगी। लेकिन ध्यान रहे पानी की एक बूंद भी बाहर नहीं गिरनी चाहिए,अन्यथा दुष्प्रभाव होगा।”

 

 

 

 

 

राजा ने यह कार्य तेनाली राम को सौप दिया और सभी सिपाहियों के साथ राज्य की तरफ चले। एक सिपाही तेनाली रमन  से जलता था।

 

 

 

 

 

जिस  रथ पर तेनाली राम ( Tenali Raman )  बैठे हुए थे। उसी रथ को वह सैनिक कंकड़ भरी सड़को पर चला रहा था। जिससे पानी छलक कर गिर पड़े, लेकिन तेनाली रमन चौकन्ना था।

 

 

 

 

 

सिपाही रथ लेकर राज्य में पहुंचा। राजा ने पूछा पानी कहां है ? गिरा तो नहीं ? तेनाली राम ने पानी राजा को सुरक्षित दे दिया क्योकि वह पानी के कटोरे को एक थैली में भरकर रखा हुआ था। राजा खुश हो गए।

 

 

 

 

 

Tenali Raman Stories in Hindi Writing 

 

 

 

 

 

8- तेनाली राम एक महीने से दरबार नहीं गया था। राजा कृष्णदेव राय बहुत उदास बैठे हुए थे। उधर तेनाली राम ( Tenali Raman )  के न रहने से पडोसी राजा ने विजय नगर में अपने काली पोशाक वाले लुटेरों से राज्य की प्रजा को परेशान करने लगा। अब तो राजा को तेनाली की और आवश्यकता महसूस होने लगी।

 

 

 

 

 

तेनाली रमन  पडोसी राज्य में घूमने के उद्देश्य से गया हुआ था। वहां उसे कोई भी नहीं पहचानता था। एक दिन काली पोशाक वाले लुटेरे तेनाली रामा  को अपना सरदार बनाकर विजय नगर में लूट-पाट करने लगे।

 

 

 

 

 

 

लेकिन तेनाली राम ( Tenali Rama )  ने अपनी गलत हरकत से सभी को पकड़वा दिया और खुद भी बंदी बन गया। सभी को दरबार में लाया गया। राजा ने सभी लुटेरों के चेहरे को देखना चाहा। सबसे पीछे तेनाली राम का चेहरा नजर आया।

 

 

 

 

 

 

राजा तेनाली राम को देखकर चौक गए और कारण पूछा। तेनाली राम ने कहा, “मेै पडोसी राज्य में रहकर सब जानकारी इकट्ठा करता था। इन लोगों ने हमें अपना सरदार बना दिया क्योकि हमें कोई पहचानता नहीं था और हमने इन्हे पकड़वा दिया। राजा ने खुश होकर तेनाली राम को ढेर सारा इनाम दिया। “

 

 

 

 

कृष्णदेव राय और तेनाली रामा की कहानी 

 

 

 

 

 

9-  एक बार राजा कृष्णदेव राय किसी महत्वूर्ण विषय पर चर्चा कर रहे थे। लेकिन तेनाली राम बैठा सो रहा था। राजा क्रोधित हो गए एक दरबारी ने तेनाली राम ( Tenali Rama ) के खिलाफ राजा के कान भर दिए। जिससे राजा ने उसे राज्य से निकल जाने के लिए कह दिया।

 

 

 

 

 

तेनाली चला गया और नर्मदा नदी के किनारे जाकर एक कुटिया में रहने लगा। कुछ दिन बीतने के पश्चात् राजा को तेनाली राम ( Tenali Ram )  की याद आने लगी। वह बेचैन हो गए।

 

 

 

 

 

 

एक दिन एक नौजवान दरबार में आकर कहने लगा, “महाराज तेनाली राम एक साधु के आश्रम में रहते थे। कुछ दिन के बाद वह भगवान के पास चले गए।”

 

 

 

 

 

यह बात सुनकर राजा बहुत ब्यथित हुए और उस युवक के साथ कुटिया में गए। जहां तेनाली राम ने अपना अंतिम समय बिताया था।

 

 

 

 

 

वहां जाकर राजा ने तेनाली राम की प्रशंसा की और कहने लगे, “हमारा प्रिय मित्र हमें छोड़कर चला गया क्योंकि हमने ही उसे क्रोध में आकर राज्य से बाहर जाने के लिए कह दिया था। इसमें हमारी ही गलती थी।”

 

 

 

 

 

इसपर साधू ने कहा, “अगर अपने अपनी गलती स्वीकार कर ली तो ठीक है। आप कहे तो मैं तेनाली राम को भगवान के पास से बुला सकता हूँ।” फिर राजा को साधू ने कहा, “आप आखें बंद करिये।” राजा ने अपनी आँखें बंद किया।

 

 

 

 

 

 

कुछ क्षण के बाद राजा ने आखें खोली तो सामने तेनाली राम खड़ा था। राजा उसे राज्य में लेकर लौट आये।

 

 

 

 

Tenali Raman Stories in Hindi Reading ( चोर को पकड़ा तेनाली ने ) 

 

 

 

 

 

10- एक बार तेनाली राम ने चोरों को सबक सीखाने की ठानी क्योंकि राज्य में चोरी की घटना बहुत बढ़ गयी थी। तीन चोर तेनाली रामा  के घर में चोरी करने का प्लान बना रहे थे। तेनाली राम ने उन्हें देख लिया और उसने अपनी पत्नी को आवाज लगाई।

 

 

 

 

 

उसने पत्नी  से पूछा, “तुमने अपने सभी चांदी और सोने के जेवर सुरक्षित रखे है।”  “क्यों नहीं जेवर घर में सुरक्षित रखे हुए है।” पत्नी  ने कहा।

 

 

 

 

 

 

तेनाली रमन  ने कहा, “चलो हम लोग सभी जेवर को लोहे की संदूक में भरकर कुंए में डाल  देते है क्योकि आज रात  में चोरी हो सकती है। सुबह होने पर हम उसे निकाल लेंगे।”

 

 

 

 

 

चोर तेनाली राम ( Tenali Raman )  और उसकी पत्नी की बातें सुन रहे थे। कुछ समय के बाद तेनाली  और तेनाली ने एक लोहे की संदूक में पत्थर डालकर कुंए में फेंक दिया और जाकर सो गए। अब चोरों की बारी थी।

 

 

 

 

 

कुंए में पानी भरा था। सभी ने मिलकर सारी रात कुंए का पानी निकाला अब कुंआ सूख चुका था। तीनों चोरों ने मिलाकर संदूक को निकाला।  सुबह होने वाली थी। उन लोगों ने संदूक का ताला  तोड़ डाला। लेकिन उनके हाथ कुछ भी नहीं लगा क्योंकि पत्थर भरे पड़े थे, लेकिन रात भर कुंए से पानी निकालने के कारण सूखे पौधों की सिंचाई अवश्य हो गयी थी।

 

 

 

 

 

 

11-  विजय नगर में राजा कृष्णदेव राज्य करते थे। उनके राज्य में चारो तरफ खुशी का माहौल था और प्रजा भी बहुत ईमानदारी से अपना काम करती थी। एक धोबिन भी राजा के राज्य में रहती थी।

 

 

 

 

 

उसने अपने मालिक का कपडा धोया तो उसमे से चार स्वर्ण मोहरे मिली। उसने उन मोहरों को अपने मालिक के पास लौटा दिया। उसकी ईमानदारी को चारो युवक जानते थे।

 

 

 

 

 

उन्होंने धोबिन को एक पोटली देते हुए कहा। दादी यह पोटली अपने पास रखो। जब हम चारो आपके पास एक साथ आयेंगे तभी यह पोटली देना। वह चारो युवक अपनी पोटली देकर शहर चले गए कमाने के लिए।

 

 

 

 

 

तीनों युवको ने अच्छा धन कमाया परन्तु उनमे से एक कामचोर निठल्ला था। वह पहले ही आकर धोबिन से बोला, “दादी हमारे साथी मुसीबत में है। उन्होंने अपनी पोटली लाने के लिए मुझे आपके पास भेजा है।”

 

 

 

 

 

धोबिन सीधी थी। उसने वह पोटली उस युवक को दे दी। वह युवक पोटली लेकर भाग गया। अपने साथियों के पास गया ही नहीं। कुछ समय के बाद तीनों युवक आकर धोबिन से अपनी पोटली मांगने लगे।

 

 

 

 

 

धोबिन ने कहा, “आपका एक दोस्त आकर हमसे पोटली मांग ले गया।” तीनों उस धोबिन को डांटने लगे। उधर से तेनाली रामा जा रहे थे।

 

 

 

 

 

उन्होंने पूरी बात सुनी तो उन युवकों से बोले, “आप लोग एक साथ ही आने के लिए कहे थे। आपका चौथा दोस्त कहां है ?  उसे बुलाकर लाओ नहीं तो झूठ बोलने के कारण आप लोगों को सजा दी जाएगी।”

 

 

 

 

 

 

उस चोर के आने पर सारा पोल खुल गया।  इस तरह से तेनाली राम ने बुद्धि बल से धोबिन को बचा लिया था।

 

 

 

 

Tenali Raman Stories in Hindi 

 

 

 

 

 

12- राजा कृष्णदेव राय अपने दरबार में बैठे थे। उनके दरबार में मंगल नाम का एक दरबारी रहता था। वह तेनाली राम से बहुत ईर्ष्या करता था। वह तेनाली रामा  को दरबार से निकलवाना चाहता था।

 

 

 

 

 

मंगल को किसी तरह ज्ञात हुआ कि राजगुरु भी तेनाली  से ईर्ष्या करते है। एक दिन वह राजगुरु के घर आया। वह राजगरु से कहा, “तेनाली राम बहुत ढोंगी है लेकिन वह जो भी राजा से कहता है राजा उसे मान लेते है।”

 

 

 

 

 

जिसे सुनकर राजगुरु भी खुश हुए। राजगुरु ने मंगल से कहा, “यह बात राजा तक कैसे पहुंचेगी ? राजगुरु होने के कारण मैं किसी की बुराई नहीं कर सकता।”

 

 

 

 

 

 

इसपर मंगल ने कहा, “यह कार्य मैं स्वयं करूंगा,  लेकिन आप बीच में हस्तक्षेप नहीं करेंगे।” दूसरे दिन दरबार में मंगल ने राजा से तेनाली राम ( Tenali Rama )  की शिकायत करने लगा।

 

 

 

 

 

 

जिससे राजा क्रोधित हो गए। उन्होंने तेनालीराम को राज्य से बाहर निकाल दिया। एक दिन रात के समय तेनाली राम ( Tenali Ram )  राजा को अपने साथ लेकर राजगुरु के पास गया।

 

 

 

 

 

राजा ने राजगुरु के घर मंगल को देखा। वहाँ मंगल ने राजगुरु से कहा, ” राजा ने आज मेरे कहने पर तेनाली राम को राज्य से बाहर निकाल दिया। लेकिन राजगुरु शांत रहे। ” राजा ने तेनाली राम से कहा, “तुमको राजगुरु को मंगल से अलग करने के लिए कुछ करना होगा।”

 

 

 

 

 

इसपर तेनाली राम ने कहा, “महाराज इसका उपाय है मेरे पास।” एक दिन तेनाली राम ने भोज का आयोजन किया। जिसमे राजगुरु और मंगल भी आये। तेनाली राम ने राजगुरु के सामने ही मंगल से उसके कान में कुछ कहने का इशारा किया, लेकिन कहा कुछ नहीं।

 

 

 

 

 

तेनाली राम के जाने के बाद राजगुरु मंगल के पास गए और उससे पूछने लगे, ” तेनाली राम ने क्या कहा ? ” अब तेनाली ने कुछ कहा ही नहीं था तो मंगल बताता क्या ? यह बात  राजगुरु बहुत बुरी लगी और  राजगुरु ने उससे हमेशा के लिए मिलना छोड़ दिया।

 

 

 

 

 

 

13- राम और श्याम नाम के दो व्यापारी थे। दोनों की गहरी मित्रता थी। दोनों अपनी मेहनत से जीवन यापन कर रहे थे। एक दिन श्याम ने तीर्थ यात्रा पर जाने की सोची। श्याम के पास 1000 सोने की मोहरें थी। उसने सोचा क्यूँ ना हम इसे राम के घर रखें।

 

 

 

 

 

उसने एक घड़ा लिया। पहले उसने उसमे सोने की मोहरे रखी और उसके ऊपर से चावल रख दिया। उसके उस बाद उस घड़े को अपने मित्र राम के यहां लेकर गया।

 

 

 

 

 

 

श्याम ने राम से कहा, “मित्र यह घड़ा अपने पास रख लो। मैं तीर्थ यात्रा पर जा रहा हूँ। एक वर्ष के बाद लौटूंगा तब यह घड़ा ले जाऊंगा।” इसपर राम ने कहा, “मित्र तुम निश्चिंत होकर जाओ यह घड़ा हमारे यहां सुरक्षित रहेगा।”

 

 

 

 

 

 

एक वर्ष गुजर गया लेकिन श्याम नहीं आया। राम के मन में उस घड़े को देखने की जिज्ञासा उत्पन्न हुई। उसने घड़े को खोला तो उसमे चावल के साथ सोने की मोहरे मिली। मोहरों को देखकर राम के मन में लालच हो गया।

 

 

 

 

 

 

उसने सोने की मोहरे अपने घर में रखकर उस घड़े में सिर्फ चावल रख दिया। दो वर्ष के बाद जब श्याम वापस लौटा तो उसने अपना घड़ा ले आया। जब उसे उन मोहरों की जरूरत हुई तो उसने घड़े को देखा तो उसमे सिर्फ चावल ही था।

 

 

 

 

 

 

वह तुरंत राम के पास जाकर पूछा, “इसमें से सोने की मोहरें कहां गई ?” राम ने कहा मुझे नहीं मालूम। श्याम ने कुछ नहीं बोला।

 

 

 

 

 

दूसरे दिन वह तेनाली राम के पास जाकर पूरी बात बताई। तेनाली रामा  ने कहा, “कल राम को हमारे यहां लेकर आओ।” दूसरे दिन राम और श्याम दोनों तेनाली के पास गए। तेनाली राम ने राम से पूछा, “इस घड़े से सोने की मोहरे कहां गई ?” राम ने कहा, ” इसमें से 1000 सोने की मोहरें मैंने नहीं लिया।”

 

 

 

 

 

तेनाली राम ( Tenali )  ने कहा, “तुमको कैसे मालूम इस घड़े में 1000 सोने की मोहरे थी?”  राम की चोरी पकड़ी गई। उसे श्याम की 1000 मोहरे वापस करनी पड़ी।

 

 

 

 

 

 

14- एक बार राजा कृष्णदेव राय के राज्य में बहुत सारे चूहे आ गए थे। राजा कृष्णदेव राय का दरबार लगा हुआ था। सभी प्रजा राजा के दरबार में उपस्थित हुए। राजा से अपनी परेशानी बताई।

 

 

 

 

 

राजा ने आदेश दिया, “सभी के घर में एक बिल्ली अनिवार्य रूप से रखी जाय और उसे दूध पीने  के लिए एक गाय भी उपलब्ध की जाय।” दूसरे सभी के घर में बिल्ली और गाय मिल गई।

 

 

 

 

 

यह बात तेनाली राम को अच्छी नहीं लगी। उन्हें एक युक्ति सूझी एक दिन उन्होंने बिल्ली को गर्म दूध दिया। बिल्ली ने जैसे ही उसे पीना चाहा उसका मुंह जल गया। दूध नहीं पीने के कारण वह बिल्ली बहुत कमजोर हो गई थी।

 

 

 

 

 

कुछ दिन बाद राजा ने सभी के मंत्री ने सभी के घरों का निरीक्षण  किया। अंत में वह तेनाली रामा  के घर पहुंचे वहां उन लोगों ने बिल्ली को बहुत कमजोर देखा। उन लोगों ने यह बात राजा को बताई।

 

 

 

 

 

राजा तेनाली रामा  के यहां पहुंचे और इसका कारण पूछा। तेनाली  ने कहा, “महाराज, मैं इसे दूध देता हूँ लेकिन यह उसे देखकर भाग जाती है। आप स्वयं ही देख लीजिए। ”

 

 

 

 

 

उन्होंने फिर एक बर्तन में दूध लाया। बिल्ली आयी लेकिन दूध देखकर भाग गई। राजा तुरंत भांप लिए तेनाली राम ने जरूर इसमें कुछ मिलाया है। उन्होंने तेनाली ( Tenali )  को बंदी बनाने का आदेश दिया।

 

 

 

 

 

 

तेनाली राम ( Tenali Ram )  ने उदास मन से राजा से कहा, “महाराज, आप मुझे सजा दो। मगर जरा सोचिए आपके राज्य में प्रजा लोगों को ही दूध नसीब नहीं है और बिल्लियों को दूध पिलाया जा रहा है। यह कैसा नियम है।”

 

 

 

 

 

राजा को बात समझ में आ गयी। उन्होंने तेनाली राम की सजा माफ़ कर दी।राजा ने आदेश दिया, “यह गाय हमेशा के लिए अपने घरों में रखी जाय। जिससे हमारी प्रजा सुखी रहे। बिल्लियों को दूध देने की आवश्यकता नहीं है। वह तो चूहे खाकर भी जीवित रह जाएगी।”

 

 

 

 

 

 

15-  एक बार कृष्णदेव राय का दरबार लगा हुआ था। उनके दरबार में रामू नाम का एक व्यापारी आया। उसने महाराज से कहा, “महाराज मेरा नाम रामू है। मैं एक व्यापारी हूँ। महाराज मैं 3 महीने के लिए तीर्थ यात्रा पर जा रहा हूँ। यह मेरे पिताजी का बक्सा है। इसमें उनकी कीमती सामान रखा है। जो मैं आपके यहां रखना चाहता हूँ।”

 

 

 

 

 

राजा ने कहा, “ठीक है। आपकी यात्रा मंगलमय हो। इस बक्से को कोषाध्यक्ष के यहां दे दो।” कोषाध्यक्ष ने राजा से कहा, “महाराज, नियम के अनुसार सिर्फ महल का सामान ही रखा जा सकता है। आप इसे तेनाली राम को रखने के लिए कहें। वह इसे अपने घर में सुरक्षित रखेगा।”

 

 

 

 

 

 

राजा ने बक्से को तेनाली राम ( Tenali Raman ) को रखने के लिए कहा। तेनाली ( Tenali )  ने उस बक्से को अपने घर में सुरक्षित जगह पर रख दिया। 3 महीने बाद जब व्यापारी दरबार में आया तो राजा ने तेनालीराम से उस बक्से को व्यापारी को लौटाने को कहा।

 

 

 

 

 

 

तेनाली राम ( Tenali Rama )  अपने घर गए और जैसे ही उस बक्से को उन्होंने उठाया। वह बक्सा उन्हें हल्का महसूस हुआ। उन्हे तुरंत समझ गए दाल में कुछ काला है। वह तुरंत दरबार पहुंचे और राजा से बोले, “महाराज इनके पिताजी हमारे घर आये है और वह बक्सा हमें नहीं लाने से मना कर रहे है।”

 

 

 

 

 

व्यापारी  ने कहा, “मेरे पिताजी आपके घर आये है। यह कैसे हो सकता है? तुम झूठ बोल रहे हो।” तभी दूसरे मंत्री ने भी बोला, “महाराज तेनाली राम झूठ बोल रहा है।”

 

 

 

 

 

 

 

तेनाली राम ने कहा, “अगर आप लोगो को विश्वास नहीं है तो हमारे घर चलकर स्वयं देख लो।” राजा ने कहा, “ठीक है। अगर ऐसी बात है। तो हम अवश्य ही तुम्हारे घर चलेंगे।”

 

 

 

 

 

राजा दो मंत्री और व्यापारी को लेकर तेनाली राम के घर पहुंचे। तेनाली राम ने बक्सा खोला तो उसमे सिर्फ मिट्टी थी। राजा ने उस व्यापारी को बंदी बनाने का आदेश दिया।

 

 

 

 

 

व्यापारी ने कहा, “महाराज यह कार्य करने के लिए मुझे आपके दो मंत्रियों ने कहा था। ” राजा ने उनको भी बंदी बनाने का आदेश दिया।

 

 

 

 

 

 

16-  राजा कृष्णदेव राय ने अपने राज्य विजय नगर के कुछ दूरी वीरान जगह पर जमीन खोदने का अपने नौकरों आदेश दिया। जमीन की खुदाई के दौरान नौकरों को एक प्राचीन मंदिर दिखा। यह सुचना राजा कृष्णदेव राय के दरबार में पहुंचायी गई।

 

 

 

 

 

 

राजा अपने मंत्री और तेनाली राम के साथ वहां पहुंचे वहां उन्हें उस मंदिर  में भगवान विष्णु की मूर्ति दिखाई दिया। राजा ने तेनाली रामा  से कहा, “यहां जरूर विष्णु का प्राचीन मंदिर रहा होगा। जो समय के गुजरने के साथ ही जमीन के अंदर चला गया।” इसपर तेनाली राम ने कहा, “महाराज, विष्णु ( God Vishnu ) तो समृद्धि के देवता है। इसका अर्थ है कि हमारा राज्य अभी और विकसित होगा।”

 

 

 

 

 

राजा ने मंत्री से कहा, “यहां एक भव्य भगवान विष्णु का मंदिर बनवाइये और चारो तरफ बगीचे भी लगवाइये। जिससे यहां की शोभा और बढ़ जाय।” मंत्री ने कहा, “जो आज्ञा महाराज।”

 

 

 

 

 

मंत्री ने वहां एक भव्य मंदिर का निर्माण करवा दिया और चारो तरफ अनेकों प्रकार के फलों और फूलों के पेड़ भी लगवा दिया। जिससे मंदिर और भी सुशोभित हो रहा था।

 

 

 

 

 

राजा कुछ महीनों के बाद अपने मंत्री और तेनाली रमन  के साथ वहां आये। वहां का मंदिर और बगीचा देखकर राजा खुश हो गए। राजा जब मंदिर के पास पहुंचे तो उन्हें कुछ कमी महसूस हुई। उन्होंने मंत्री से कहा यहां एक पौधे की कमी है। लेकिन मंत्री कुछ समझ नहीं पाया।

 

 

 

 

 

राजा की बात तेनाली राम ( Tenali Rama ) समझ चुके थे। वह राजा को मंदिर के पीछे लेकर गए और उन्हें तुलसी का पौधा दिखाया। राजा जिसे देखकर बहुत प्रसन्न हुए और मंत्री से कहा विष्णु की मंदिर के यहां तुलसी का पौधा रहना अनिवार्य है। राजा ने तेनाली राम की खूब प्रशंसा की

 

 

 

 

 

 

17-  राजा कृष्णदेव राय का दरबार लगा हुआ था। एक मंत्री ने राजा से कहा, “महाराज, हिमालय से एक महात्मा हमारे राज्य से कुछ ही दूरी पर रुके हुए है। वह बहुत ही ज्ञानी महात्मा है। मैं चाहता हूँ कि आप उनसे एक बार मिले।”

 

 

 

 

 

 

राजा ने कहा, “ठीक है। मैं कल सुबह ही उनके दर्शनों के लिए प्रस्थान करूँगा हमारे जाने का प्रबंध किया जाय।” दूसरे दिन राजा कृष्ण्देव राय उनके कुटी के पास पहुंचे। महात्मा शिव जी की आराधना मे लीन थे। जब उन्होंने आंखे खोली और राजा को देखा।

 

 

 

 

 

 

कुछ समय बाद महात्मा बोले, “राजन, तुम्हे कुछ लोग मारने की कोशिश कर रहे है। लेकिन मैं तुम्हे मारने वाले का चेहरा दिखा सकता हूँ। मेरे पास एक जादुई बक्सा है। उसे तुम जैसे ही खोलोगे उसमे तुम्हे मारने वाले का चेहरा दिख जायेगा। जिससे तुम उसे आसानी से मार सकोगे।”

 

 

 

 

 

 

राजा ने बक्सा लिया और उसे जैसे ही खोलने गए उसी समय तेनाली राम ने उनका हाथ पकड़ लिया और बोले, “महाराज यह ढोंगी महात्मा है। जो आपके राज्य को अपने राज्य में मिलाने की कोशिश कर रहा है। महाराज मेरे पास एक बक्सा है जिससे आपको तुरंत ही पता चल जायेगा। ”

 

 

 

 

 

 

राजा ने कहा, “ठीक है। तेनाली रामा ने वह बक्सा महात्मा को दिया। महात्मा ने उस बक्से को जैसे ही खोला उनके नीचे से जमीन खिसक गई। उन्होने राजा से माफ़ी मांगी और कहने लगा महाराज मै बगल के राज्य का जासूस हूँ।

 

 

 

 

 

 

राजा ने उसे तुरंत बंदी बनाने का आदेश दिया। उन्होंने तेनाली राम से पूछा, “तुम्हे कैसे मालूम यह महात्मा नहीं जासूस है।” तेनाली राम ने कहा, “महाराज, मेरा एक गुप्तचर मुझे इसके बारे में बताया।”

 

 

 

 

 

 

18-  विजय नगर के राजा कृष्णदेव राय उदास बैठे थे। वहां राजगुरु आये और राजा के उदासी का कारण पूछा। राजा ने कहा, “मैं अपनी माँ की अंतिम इच्छा भी पूरी नहीं कर सका। अंतिम समय में उनकी इच्छा आम खाने की थी। लेकिन लाख प्रयास से भी उन्हें आम नहीं मिल सका।

 

 

 

 

 

 

” अंतिम इच्छा पूरी नहीं होने के कारण आप की माँ की आत्मा को शांति नहीं मिलेगी। इसलिए आत्म शांति के लिए आप ब्राम्हणों को स्वर्ण का आम दान करें। ” राजगुरु ने कहा।

 

 

 

 

 

नियत समय पर राजगुरु अन्य चार ब्राम्हणों के साथ उपस्थित थे। भोजन के उपरांत राजा ने उन लोगों को स्वर्ण आम का दान दिया था। यह सब राजा का विश्वास पात्र मंत्री बाहर से देख रहा था।

 

 

 

 

 

उसने  सभी ब्रम्हणों से कहा, “आप लोग को अभी हमारे साथ चलना पड़ेगा। हमारी माता का देहांत हो गया और मैं उनकी अंतिम इच्छा पूर्ण नहीं कर सका। आप लोग दान लेकर हमारी माता की आत्मा को शांति प्रदान करेंगे।”

 

 

 

 

 

 

सभी ब्राम्हणों को घर के पीछे ले गया वहां दो आदमी लोहे की राड को गर्म कर रहे थे और तेनाली भी वहाँ  मौजूद थे। “यह क्या है ?” उन ब्राम्हणों ने तेनाली राम से पूछा। इसपर तेनाली राम ने कहा, ” इनकी माता जी को फोड़ा हुआ था और उनकी इच्छा थी कि उन्हें जलती हुई राड को उनके पैरों में लगा दिया जाय, जिससे फोड़ा ठीक हो जाए, परन्तु ऐसा हो ना सका और वह स्वर्ग सिधार गयी। ”

 

 

 

 

 

ऐसा सुनकर सभी ब्राम्हण डर गए और अपना आम तेनाली रमन  को देकर चले गए। तेनाली राम ने वह स्वर्ण आम राजा को वापस दे दिये। राजा बहुत खुश हुए क्योंकि तेनाली राम ने उन्हें नुकसान से बचा लिया था।

 

 

 

 

 

 

19- राजा कृष्णदेव राय  एक राज्य पर चढ़ाई कर दिए और विजयी हुए। इस ख़ुशी में उन्होंने अपने राज्य के चौराहे पर विजय स्तम्भ का निर्माण करवाना चाहा।

 

 

 

 

 

कारीगर बुलाकर उसे काम सौंप दिया। एक सप्ताह के पश्चात कारीगर की मेहनत से वह विजय स्तम्भ तैयार हो गया। राजा के हाथों उसका आवरण हुआ।

 

 

 

 

 

राजा ने सभी लोगों से आग्रह किया यह स्तम्भ विजय नगर की शान का प्रतीक है और इसकी रक्षा करना आपकी जिम्मेदारी है। आप लोगों का कर्तव्य भी है।

 

 

 

 

 

राजा ने उस कारीगर से कहा, “तुम्हे अपने पारिश्रमिक के रूप में जो मांगोगे मैं वह अवश्य ही दे दूंगा। इसपर कारीगर ने कहा, “महाराज, जो सबसे कीमती वस्तु आपके पास हो वह हमें दे दीजिए।” राजा को कुछ समझ नहीं आया।

 

 

 

 

 

उन्होंने कारीगर को दूसरे दिन राजदरबार में उपस्थित होने के लिए कहा। दूसरे तेनाली राम को राजा ने सारी बात बता दी थी। कारीगर दरबार में आया। उसने एक बड़ा थैला तेनाली रामा  के सामने रख दिया और सबसे कीमती वस्तु की इच्छा जाहिर की।

 

 

 

 

 

तेनाली राम ने उस बड़े थैले का मुंह बांध दिया और उस कारीगर को दे दिया। कारीगर संतुष्ट होकर चला गया। राजा तेनाली राम से पूछ बैठे, “उसे खली थैला बांधकर क्यूं दिया। उसमे तो कुछ भी नहीं था ?”

 

 

 

 

 

इसपर तेनाली राम ने कहा, “महाराज, उसमे आपकी कीर्ति की हवा और यश की हवा भरकर उसे दे दिया गया।” तेनाली राम के उत्तर राजा प्रसन्न हुए।

 

 

 

 

Long Tenali Raman Stories in Hindi 

 

 

 

 

 

20-  दीपावली से दो दिन पहले राजा कृष्णदेव राय ने विजय नगर में घोषणा करवा दिया था। राज्य में जिसका घर सबसे ज्यादा सजाया हुआ मिलेगा उसे 100 सोने का सिक्का इनाम में मिलेगा।

 

 

 

 

 

दीपावली की रात में राजा तेनाली राम और अन्य मंत्री के साथ नगर भ्रमण कर रहे थे। एक जगह असंख्य दीप माला देखकर रुक गए। मंत्रियों के पूछने पर पता चला कि यह जौहरी का घर है।

 

 

 

 

 

तेनाली रामा  ने कहा, “महाराज, मैं आपको एक ऐसा घर दिखा सकता हूँ। जहां एक ही दीप जल रहा है लेकिन हजारों दीप मिलकर भी उसका मुकाबला नहीं कर सकते ?”

 

 

 

 

 

 

तेनाली राम ( Tenali Rama )  राजा को लेकर उस घर में गए। जहां एक शिक्षक एक दीप के प्रकाश में दस शिष्यों को पढ़ा रहे थे। राजा सारी बात समझ गए कि ज्ञान का दीपक हजारों दीपक से भारी है। उन्होंने 100 सोने के सिक्के उस शिक्षक को दान में दे दिया।

 

 

 

 

 

21- गर्मी के मौसम में तेनाली राम ने गांव जाने की इच्छा प्रकट की लेकिन महाराज ने इस शर्त पर आज्ञा दी कि तेनाली रामा  को 15 दिन में वापस आना होगा, क्योकि तेनाली रमन  के बिना कई कार्य अधूरा रह जाता था।

 

 

 

 

 

तेनाली राम ( Tenali Rama )  छुट्टी लेकर घर आ गया। 15 दिन बीत गए लेकिन तेनाली ( Tenali ) वापस नहीं आया। राजा उसके लिए चिंतित रहने लगे। एक महीने के बाद तेनाली राम दरबार में आया तो राजा ने देर से आने का कारण पूछा।

 

 

 

 

 

 

तेनाली राम ( Tenali Ram )  ने कहा, “महाराज, मैं गांव में एक जादूगर से जादू सीख रहा था, इसलिए आने में 15 दिन की देरी हुई। उस जादू से मैं किसी के भी मन की बात जान सकता हूँ।

 

 

 

 

 

 

तेनाली ( Tenali )  ने एक मंत्री की तरफ इशारा करके कहा, “इन महोदय ने गांव में कुंआ खुदवाने का जिम्मा लिया था। सिर्फ इनके पहचान वाले के पास छोड़कर गांव में कहीं कुंआ नहीं है। जनता परेशान है। आप पता लगवा सकते है। ”

 

 

 

 

 

 

राजा ने पता लगवाया बात सत्य थी। राजा ने उस मंत्री से पूरा धन वसूल लिया। तेनाली राम ने राज्य को नुकसान से बचा लिया।

 

 

 

 

 

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