Story Of Snow White in Hindi Language / स्नो व्हाइट की कहानी इन हिंदी

Story Of Snow White in Hindi Language / स्नो व्हाइट की कहानी इन हिंदी

Story Of Snow White in Hindi मित्रों इस पोस्ट में Snow White in Hindi की कहानी दी गयी है। यह Snow White And Seven Dwarfs Story in Hindi बहुत ही बढियाँ हिंदी कहानी है।

 

 

 

Story Of Snow White in Hindi ( स्नो व्हाईट की कहानी ) 

 

 

 

 

 

एक राजा था उसका नाम जैकी था और उसकी रानी का नाम गोल्डी था। गोल्डी को अपनी सुंदरता पर बहुत घमंड था। गोल्डी के पास एक जादुई शीशा था।

 

 

 

 

वह उस जादू के शीशे से पता लगा लेती थी अगर कोई उससे सुंदर औरत या लड़की रहती तो वह उसे अपने सेवको से कहकर मरवा देती थी।

 

 

 

एक दिन वह अपने जादुई शीशे से पूछने लगी, “जादुई शीशे बताओ इस समय हमसे सुंदर कौन है ?”

 

 

 

जादुई शीशा बोला, “रानी तुम तो सबसे सुंदर हो। लेकिन तुमसे भी सुंदर एक लड़की है जो तुम्हारे ही राज्य में रहती है और उसका नाम स्नोव्हाइट है।”

 

 

 

 

Story Of Snow White in Hindi

 

 

अब तो गोल्डी रानी का पारा गरम हो गया। वह एक सिपाही को बुलाई और कहा, “जाओ स्नोव्हाइट नाम की लड़की को मार डालो और उसका कलेजा लाकर हमे दिखाओ।”

 

 

 

 

सिपाही स्नोव्हाइट को पकड़कर जंगल में ले गया और बोला, “रानी का आदेश है मैं तुम्हे मार डालूँगा।”

 

 

 

स्नोव्हाइट रोने लगी तब उस सिपाही को दया आ गई। उसने कहा, “अब तुम राज्य में वापस नहीं आना नहीं तो रानी हमे ही मरवा देगी।”

 

 

 

 

सिपाही ने एक हिरण को मारा और उसका कलेजा निकालकर रानी को दिखा दिया। रानी खुश हो गई। एक दिन फिर रानी ने अपने जादू के शीशे से पूछा, “ओ जादू के शीशे बताओ हमसे सुंदर कौन है ?”

 

 

 

 

जादू का शीशा बोला, “रानी तुम सबसे सुंदर हो लेकिन स्नोव्हाइट सबसे सुंदर है।”

 

 

 

अब तो रानी गोल्डी आग बबूला हो गई। उधर स्नोव्हाइट जंगल में चलती जा रही थी। एक जगह उसे बहुत सुंदर मकान दिखाई पड़ा।

 

 

 

वह जाकर दरवाजा खटखटाने लगी लेकिन कोई आवाज नहीं आई। स्नोव्हाइट ने दरवाजे को धक्का दिया तब दरवाजा आराम से खुल गया।

 

 

 

स्नोव्हाइट को बहुत जोर की भूख लगी थी। वह हाल में गई तो देखा सात बर्तन में खाने का सामान रखा हुआ था। सात कुर्सियां भी लगी हुई थी।

 

 

 

स्नोव्हाइट ने भर पेट भोजन किया अब उसे नींद सताने लगी थी। वह एक कमरे की तरफ गई और उसका दरवाजा खोला तो उसमे सात पलंग पर बिस्तर लगे हुए थे। वह एक बिस्तर पर सो गई।

 

 

 

 

कुछ देर के बाद सात बौने आए जो उस मकान में रहते थे। उन सभी को देखकर स्नोव्हाइट डर गई, तभी बौनों का सरदार बोला, “तुम डरो मत हम तुम्हे कोई हानि नहीं पहुंचाएंगे। तुम जब तक चाहो यहां रह सकती हो।”

 

 

 

 

एक दिन गोल्डी रानी स्नोव्हाइट को ढूंढते हुए उस जंगल में आई जहां बौनों का घर था। गोल्डी ने बुढ़िया का भेष बनाया हुआ था। बुढ़िया ने दरवाजा खटखटाया तो स्नोव्हाइट ने दरवाजा खोला।

 

 

 

 

बुढ़िया बोली, “मुझे नौकर रख लो मैं तुम्हारे सब काम किया करुँगी।”

 

 

 

स्नोव्हाइट ने उस बुढ़िया को नौकर रख लिया। एक दिन वह बुढ़िया स्नोव्हाइट का बाल बांध रही थी और धीरे से उसने स्नोव्हाइट को बेहोस करने वाली दवा सुंघा दिया।

 

 

 

 

स्नोव्हाइट के बेहोस होने पर बुढ़िया भाग गई। सातो बौने घर आए तब देखा स्नोव्हाइट बेहोस पड़ी है। उन्होंने उसके चेहरे पर पानी का छीटा मारा तो स्नोव्हाइट उठकर बैठ गई।

 

 

 

 

तभी एक बौना बोला, “हमने तुम्हे दरवाजा खोलने से मना किया था। आगे से ध्यान रखना किसी के कहने पर भी दरवाजा नहीं खोलना।”

 

 

 

 

एक दिन गोल्डी रानी फिर अपने जादू के शीशे से पूछने लगी, “जादू के शीशे यह बताओ हमसे सुंदर कौन है ?”

 

 

 

 

जादू का शीशा बोला, “तुम तो बहुत सुंदर हो लेकिन सबसे सुंदर तो स्नोव्हाइट ही है।”

 

 

 

 

अब गोल्डी रानी ने स्नोव्हाइट को मारने का उपाय सोचने लगी। वह एक सेव बेचने वाली बनकर फिर जंगल में स्नोव्हाइट के पास गई।

 

 

 

 

लेकिन स्नोव्हाइट ने दरवाजा नहीं खोला। लेकिन खिड़की खोलकर देखने लगी तो सेव बेचने वाली बोली, “बहुत मीठे सेव है ले लो।”

 

 

 

 

स्नोव्हाइट ने सेव ले लिया। बुढ़िया वहां से चली गई। जैसे ही स्नोव्हाइट ने एक सेव खाया तो उसका शरीर नीला पड़ गया क्योंकि गोल्डी रानी ने उस सेव में जहर लगा दिया था।

 

 

 

 

स्नोव्हाइट अब मर गई थी। तभी वह सातो बौने आए स्नोव्हाइट को मरा देखकर उदास हो गए। फिर स्नोव्हाइट को एक ताबूत में बंद करके दफन करने जा रहे थे।

 

 

 

 

उसी समय एक राजकुमार वहां से जा रहा था। उसने ताबूत में बंद एक खूबसूरत लड़की को देखा तब रुक गया और ताबूत से निकालकर स्नोव्हाइट के माथे को चूम लिया।

 

 

 

 

एक चमत्कार हो गया, स्नोव्हाइट जिन्दा हो गई। उसके शरीर से जहर का प्रभाव गायब हो गया था। सभी बौने खुश होकर उछलने लगे।

 

 

 

 

राजकुमार स्नोव्हाइट को लेकर चला गया। एक बार फिर गोल्डी रानी अपने जादुई शीशे के पास जाकर पूछने लगी, “जादुई शीशे बताओ हमसे सुंदर कौन है ?”

 

 

 

 

जादुई शीशा बोला, “रानी तुम सबसे सुंदर हो लेकिन तुमसे भी सुंदर तो स्नोव्हाइट ही है।”

 

 

 

 

इतना सुनते ही गोल्डी ने एक बड़ा सा पत्थर उस जादुई शीशे पर दे मारा। बेचारा शीशा क्या करता छन की आवाज करके टूट गया और शीशे के टूटते ही गोल्डी रानी भी पागल हो गई।

 

 

 

बच्चो की बढ़िया कहानी ( Best Fairy Kids Story in Hindi ) 

 

 

Story Of Snow White in Hindi

 

 

 

2- मेरी नाम की एक लड़की थी। वह बहुत अच्छी गायिका थी। लेकिन वह अपने हर प्रोग्राम में देर से पहुँचती थी। आयोजक मेरी से बहुत परेशान थे।

 

 

 

 

लेकिन उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था। एक दिन एक बुढ़िया जिसका नाम बीनस था। वह भी मेरी का प्रोग्राम देखने के लिए आई थी।

 

 

 

 

उसने भी सुन रखा था कि मेरी बहुत बढ़िया गाना गाती है। बीनस ने मेरी को सबक सिखाने के लिए सोचा क्योंकि उसके लिए आयोजकों को पब्लिक का गुस्सा झेलना पड़ता था।

 

 

 

 

बीनस एक दिन मेरी के घर गई और मेरी के साथ गार्डन में बैठकर चाय पीने लगी। तीन बज गए थे। चार बजे मेरी को एक प्रोग्राम में जाना था।

 

 

 

लेकिन उसे कोई फर्क नहीं था क्योंकि उसे तो देर से जाने की आदत लग चुकी थी। तभी मेरी का पिता बोरिस आया और मेरी से बोला, “क्या तुम्हें अपने प्रोग्राम में नहीं जाना है ?”

 

 

 

 

मेरी ने कहा, “जाना है पिताजी लेकिन अभी तो हमारे पास समय है। तब तक मैं इन बूढ़ी माँ से बातें कर लेती हूँ।”

 

 

 

तभी बीनस नाम की वह बूढ़ी औरत उठते हुए बोली, “तुम अपने प्रोग्राम में जाओ। मैं तुम्हे एक जादुई घड़ी देती हूँ। तुम इसे अपने गले में पहन लो। तुम समय से पहले ही पहुंच जाओगी। लेकिन इतना याद रखना कि तुम्हे समय से घर भी आना होगा।”

 

 

 

 

मेरी ने बीनस की दी हुई घड़ी पहन लिया और प्रोग्राम में सबसे पहले ही पहुंच गई। जैसे ही प्रोग्राम खत्म हुआ मेरी के गले में पड़ी हुई घड़ी बजने लगी।

 

 

 

 

मेरी वहां से तुरंत ही अपने घर के लिए चल पड़ी। अब मेरी अपने हर प्रोग्राम में समय से पहले ही पहुंच जाती थी और घड़ी बजते ही अपने घर के लिए रवाना हो जाती थी।

 

 

 

 

लेकिन मेरी इस घड़ी की वजह से तंग हो गई थी क्योंकि उसे हर काम समय से ही करना पड़ता था। एक दिन वह प्रोग्राम से लौटते हुए उस जादुई घड़ी को मेरी ने अपने गले से निकालकर एक नाले में फेंक दिया।

 

 

 

 

उसके बाद तो बहुत बड़ा तूफान आ गया। मेरी को घर पहुंचना मुश्किल हो गया। घर पहुंचते ही मेरी का पिता बोरिस ने पूछा, “मेरी तुम्हारी वह घड़ी कहां है, जो बीनस ने तुम्हे दिया था ?”

 

 

 

 

मेरी बोली, “मैंने तो उसे नाले में फेक दिया।”

 

 

 

 

बोरिस ने मेरी से कहा, “जाकर जल्दी से उस घड़ी को ढूंढो तभी यह तूफान रुकेगा क्योंकि यह सब उस घड़ी का ही कमाल है ?”

 

 

 

 

 

मेरी वापस जाकर नाले से घड़ी को ढूंढ निकाला और उसे फिर से अपने गले में पहन लिया। उसके बाद ही तूफान शांत हो गया। घर पहुंचते ही बीनस ने आकर मेरी से अपनी घड़ी की मांग की तो मेरी कहने लगी, “मैं तो आज इस घड़ी की वजह से ही सुरक्षित घर तक आ गई हूँ। अब मैं हमेशा ही यह घड़ी अपने गले में रखूंगी।”

 

 

 

 

 

मेरी ने अपनी गलती के लिए बीनस से क्षमा मांग लिया था। बीनस ने मेरी को आशीर्वाद दिया फिर गायब हो गई।

 

 

 

 

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