Saat Pariyon ki Kahani in Hindi / सात परियों की कहानी हिंदी में।

Saat Pariyon ki Kahani in Hindi / सात परियों की कहानी हिंदी में।

Saat Pariyon ki Kahani in Hindi मित्रों इस पोस्ट में परियों की कहानी दी गयी है।  यह सात परियों की हिंदी कहानी है।

 

 

 

Saat Pariyon ki Kahani Hindi Mein ( सात परियों की कहानी )

 

 

 

 

 

मेरी नाम की एक लड़की थी। उसके पिता पीटर एक बहुत धनी आदमी थे। मेरी पीटर की एकलौती लड़की थी। इसलिए पीटर उसकी सुख सुविधा का सदैव ध्यान रखते थे।

 

 

 

 

पिता के प्यार ने मेरी को घमंडी बना दिया था। वह गरीब लोगो से नफरत करती थी। एक दिन कमला नाम की औरत ने एक सुंदर ड्रेस बनाया और वह मेरी को दिखाने के लिए लेकर आई, इस आशा से कि कुछ पैसे मिल जाएंगे तो वह अपनी बीमार माँ का इलाज करा सकेगी।

 

 

 

 

लेकिन मेरी ने उस गरीब औरत के हाथ का बनाया हुआ ड्रेस नापसंद कर दिया। कमला वह ड्रेस लेकर वापस चली गई। एक दिन मेरी अपने घर के बगीचे में घूम रही थी।

 

 

 

 

उसके बगीचे में बहुत ही खूबसूरत फूल खिले हुए थे। तभी उसकी नजर गेट पर गई वहां उसकी उम्र की एक लड़की खड़ी थी। उसका नाम रोमा था।

 

 

 

 

उसने मेरी को आवाज लगाई। मेरी गेट के पास गई और रोमा से बोली, “मैं तुमको नहीं पहचानती हूँ। तुमने हमे आवाज क्यूं दिया ?”

 

 

 

रोमा बोली, “मैं तुम्हारे बगीचे में थोड़ी देर घूमना चाहती हूँ। यहां के सुंदर फूलो को देखना चाहती हूँ।”

 

 

 

मेरी ने रोमा को गुस्से से बोला, “तुम यहां से चली जाओ, यह फूल तुम्हारे लिए नहीं है।”

 

 

 

 

रोमा मेरी की बात सुनकर उदास होकर चली गई। थोड़ी देर बाद ही मेरी के बगीचे से चार छोटी-छोटी परियां निकल आई और आपस में बातें करने लगी कि अब हम यहां नहीं रहेंगे क्योंकि यह लड़की बहुत ही घमंडी है। इसे किसी से प्यार नहीं है यह सिर्फ पैसो से प्यार करती है। इतना कह दो परियां वहां से चली गई।

 

 

Saat Pariyon ki Kahani in Hindi

 

 

 

 

बची हुई दो परियो ने मेरी को सुधारने का निश्चय किया। इसलिए वह मेरी से कहने लगी, “क्या तुम सिर्फ पैसो से ही प्यार करती हो ?”

 

 

 

 

मेरी ने कहा, “हां मुझे गरीब लोग बिल्कुल भी पसंद नहीं है। लेकिन तुम लोग तो बहुत ही अच्छी हो।”

 

 

 

तभी बची हुई दोनों परियो ने कहा, “क्या तुम हमारे साथ घूमना चाहती हो ?”

 

 

 

मेरी ने कहा, “काश मैं भी तुम्हारी तरह छोटी परी बनकर घूम सकती ?”

 

 

 

तभी दोनों परियो ने मेरी को एकदम छोटा बना दिया। मेरी बोली, “हमारे पास तुम्हारे जैसे पंख नहीं है।”

 

 

 

परियो ने कहा, “तो क्या हुआ ? हम तुम्हे अपने साथ घुमा सकते है।”

 

 

 

मेरी ने कहा, “ठीक है हमे 15 मिनट तक घुमाओ।”

 

 

परियो ने कहा, “ठीक है।”

 

 

 

वह मेरी को अपने साथ लेकर एक घर में गई। मेरी ने देखा उस घर में वही औरत थी, जो उसके लिए ड्रेस लेकर आई थी। वह गरीब औरत अपनी बीमार माँ की सेवा कर रही थी।

 

 

 

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लेकिन उसके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह अपनी बीमार माँ की दवा अच्छी तरह करा सके। यह देखकर मेरी को बहुत दुःख हुआ।

 

 

 

वह मन ही मन उसकी सहायता करने का निश्चय कर चुकी थी। अब दोनों परी मेरी को अपने साथ लेकर एक दूसरे घर में गई। वहां मेरी ने उसी रोमा नाम की लड़की को देखा जहां उसकी सौतेली माँ उससे बहुत ज्यादा ही काम करा रही थी।

 

 

 

 

यह देख मेरी को बहुत तकलीफ हुई। वह रोमा की सहायता करना चाहती थी। मेरी ने उन परियो से कहा, “इस मासूम लड़की से यह औरत इतना काम करा रही है। हमे इस लड़की की मदद करनी चाहिए।”

 

 

 

 

परियो ने देखा मेरी की भावना बदल रही है। वह दोनों खुश होते हुए बोली, “मेरी अब चलो यहां से। तुम हमारे साथ केवल 15 मिनट के लिए ही आई थी। वह समय अब समाप्त हो गया है।”

 

 

 

 

परियो ने मेरी को लेकर घर के बाहर आई ही थी कि तब तक समय खत्म हो गया। अब मेरी उस घर के बाहर खड़ी थी जिसमे रोमा अपने सौतेली माँ के साथ रहती थी।

 

 

 

रोमा बाहर आई तब मेरी को देखकर हैरान रह गई। मेरी ने सारी बात बताई और अपने घर चली गई। वह अपने पिता से कहने लगी, “रोमा की सौतेली माँ उसे बहुत परेशान करती है क्या हम उसे अपने घर में रख सकते है ?”

 

 

 

 

पीटर अपनी पुत्री के व्यवहार में परिवर्तन देखकर खुश था। उसने कहा, “बेटी तुम आज ही जाकर रोमा को अपने साथ ले आओ। इससे तुम्हारे साथ खेलने के लिए एक सहेली मिल जाएगी और हमारे इतने बड़े घर में चहल पहल बढ़ जाएगी।”

 

 

 

 

पीटर की इतनी बात सुनकर मेरी खुद जाकर रोमा को अपने घर लेकर आई। रोमा मेरी के घर आकर बहुत खुश थी। वह फूलो के बगीचे में टहलने लगी और फूलो के साथ खेलने लगी और सदा मेरी के साथ ही रहती थी।

 

 

 

 

कमला ने कहा, “माँ एक बार और कोशिश करके देखती हूँ। शायद यह ड्रेस बिक जाए तो तुम्हारी दवा का प्रबंध हो जाएगा।”

 

 

 

वह ड्रेस लेकर पीटर के घर गई। मेरी देखते ही कमला को पहचान गई। उसने पीटर से कहा, “पिताजी यह ड्रेस आप जरूर ले लो और हां इसे इस ड्रेस की कीमत से ज्यादा पैसे दे दो क्योंकि इस औरत की बूढ़ी माँ बहुत ही बीमार है, उन्हें दवा की अति आवश्यकता है।”

 

 

 

 

पीटर अपनी बेटी के इस व्यवहार से बहुत ही खुश था। उसने कमला को ज्यादा पैसे देकर वह ड्रेस खरीद लिया और बोला, “तुम्हे और पैसे की जरूरत पड़े तो अवश्य ही आ जाना। लेकिन अपनी बीमार माँ की ठीक तरह से दवा करा देना।”

 

 

 

 

एक दिन मेरी रोमा के साथ बगीचे में घूम रही थी तभी देखा जो दोनो परियां उसके बाग़ को छोड़कर चली गई थी, वह भी वापस आ गई थी।

 

 

 

 

अब चारो परियो ने मेरी में आए परिवर्तन को देखकर बोली, “कोई भी अपने स्वभाव से ही अच्छा बनता है। जैसे यह फूल है और सभी से हंसते हुए मिलते है।”

 

 

 

मेरी और रोमा दोनों परियो की बात सुनकर खुश हो गए।

 

 

 

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