Sunday, 09 August, 2020

9 Panchatantra Stories in Hindi Written / 9 पंचतंत्र की कहानियां हिंदी में


Panchatantra Stories in Hindi

Panchatantra Stories in Hindi मित्रों इस पोस्ट में पंचतंत्र की बहुत शिक्षाप्रद हिंदी कहानियां दी गयी हैं।  आप इसे जरूर पढ़ें।

 

 

 

Panchatantra Stories in Hindi With Moral ( बकरी की चालाकी ) 

 

 

 

 

 

1- एक किसान के पास एक बकरी थी, उसके तीन बच्चे थे। सभी का जीवन मजे में बीत रहा था। किसान बकरी को हरा चारा देता था। बकरी अपने बच्चों के साथ आराम से पेट भर लेती थी। एक बार किसान अपने लड़के से कह रहा था, ” जंगल में  ढेर सारा हरा चारा मिलता है।” यह बात बकरी का एक बच्चा सुन रहा था। वह बहुत ही चंचल और नटखट था।

 

 

 

 

 

उसने सोचा, ”  चलकर जंगल में हरा चारा देख आता हूँ, फिर रोज ही आकर हरा चारा खा लिया करूँगा। ”  बच्चा छोटा था, उसे जंगल के बारे में कुछ नहीं पता था।

 

 

 

 

बकरी की चालाकी हिंदी पंचतंत्र कहानी 

 

 

 

 

वह जंगल की तरफ चला गया। उसे रास्ते में चार भेड़ियों ने घेर लिया। बकरी का बच्चा डर के मारे कांप रहा था और अपनी माँ को आवाज लगा रहा था।

 

 

 

 

 

उधर बकरी ने देखा उसका बच्चा कम है, तो वह सोचने लगी बच्चा कहां गया होगा ? उसे जंगल से अपने बच्चे की आवाज सुनाई दे रही थी। वह जंगल की तरफ भागी, जंगल में उसका बच्चा चार भेड़ियों से घिरा हुआ था। बकरी को सामने देखकर चारो भेड़िये खुश हो गए और कहने लगे, “आज हम लोगों को बहुत बढ़ियां शिकार मिला है।”

 

 

 

 

बकरी चारो भेड़ियों को देखकर बिलकुल भी नहीं घबराई और डटकर बोली, “अरे भेड़ियों क्या तुम्हे शेर से डर नहीं लगता ? शेर ने हमें यहां रुकने के लिए कहा है। इसलिए मैं अपने बच्चे के साथ यहां रुकी हूँ। वह आने के बाद हमारा शिकार करेगा। अगर तुम लोग हमें मार दोगे तो शेर तुम लोगों का शिकार कर लेगा। अगर तुम लोगों को हमारी बात पर विश्वास नहीं है तो देखो उसने हमारी निगरानी के लिए हाथी को लगा रखा है। वह सब बात शेर को बता देगा। इसके बाद क्या होगा तुम खुद जानते हो।”

 

 

 

 

 

चारो भेड़ियों ने देखा तो हाथी थोड़ी दूर पर खड़ा था। उन्हें बकरी की बात सही लगी और शेर के डर से चारो भेड़िये भाग निकले। अभी बकरी थोड़ी ही दूर चली थी कि सामने से उछलता हुआ शेर आ धमका, लेकिन बकरी बिलकुल नहीं घबराई।

 

 

 

 

उसने शेर से कहा, “महाराज मैं अपने बच्चे के साथ यहां आपकी शेरनी के कहने पर ही रुकी हूँ। शेरनी आपके लिए हम दोनों का शिकार करने वाली है उसने हम दोनों की निगरानी के लिए कौवे को रख छोड़ा है।”

 

 

 

 

शेर ने देखा एक कौवा छोटे से टीले पर बैठा था। शेर ने उसे भागना चाहा तो वह उड़कर थोड़ी दूर पर बैठ गया। अब शेर को बकरी की बातों पर विश्वास हो गया और वह चला गया।

 

 

 

बकरी अपने बच्चे के साथ फिर अपने घर के तरफ भागी तो सामने शेरनी आती हुई दिखी। शेरनी ने कहा, “आज मैं तुम लोगों का शिकार अवश्य ही करूंगी।”

 

 

 

 

 

इसपर बकरी ने कहा, “पहले हमारी बात तो सुन लो, मै यहाँ शेर के कहने पर ही रुकी हूँ। शेर ने कहा है, मैं अभी आकर तुम दोनों का शिकार करके अपनी शेरनी के लिए ले जाऊंगा। उसने हमारी निगरानी के लिए खरगोश को लगा दिया है।” शेरनी ने देखा खरगोश दूर खड़ा देख रहा था। उसे बकरी की बातों पर विश्वास हो गया, वह चली गई। बकरी अपने बच्चे के साथ दौड़ती हुई किसान के घर पहुंच गई और चालाकी से अपने बच्चे को बचा लिया।

 

 

 

 

Moral Of This Story – हमेशा सतर्क और चालाकी से रहना चाहिए।  सही समय पर लिया गया सटीक निर्णय आपको खतरे से बचा सकता है। 

 

 

 

 

 

खरगोश और कछुआ की दौड़ Panchatantra Stories in Hindi 

 

 

 

 

 

2- एक जंगल में एक खरगोश रहता था। उसे अपने दौड़ पर बहुत ही घमंड था, क्योंकि वह बहुत ही तेज दौड़ता था। उसने अपने मित्र कछुए से प्रस्ताव रखा। खरगोश कछुआ से बोला, “ मित्र सामने पहाड़ी पर जो सबसे पहले पहुँच जायेगा वह विजेता बनेगा।”

 

 

 

 

 

कछुआ को अपने ऊपर भरोसा था।  उसने खरगोश की बात मान ली। कछुआ और खरगोश की दौड़ देखने के लिए जंगल के सारे जीव-जंतु आये हुए थे। दौड़ प्रारंभ हुई, खरगोश तेजी से दौड़ा काफी दूर आने पर उसने पीछे मुड़कर देखा तो कछुआ कहीं दिखाई नहीं दिया।

 

 

 

 

 

खरगोश थका हुआ था। एक पेड़ के नीचे आराम करने लगा। ठंडी हवा और थकान के कारण उसे नींद आ गयी थी। कछुआ धीरे-धीरे चलता हुआ खरगोश को पीछे छोड़ दिया और पहाड़ी के निश्चित स्थान पर पहुँच गया।

 

 

 

 

खरगोश की नींद टूटी तो वह तेजी से दौड़ा, लेकिन लेकिन उसे कोई फायदा नहीं हुआ। कछुआ उससे पहले  ही पहुँच चुका था। खरगोश ने अपनी हार स्वीकार कर ली।

 

 

 

 

Moral Of This Story – निरंतर चलते रहना अर्थात निरंतर काम करना ही सफलता की निशानी है।  

 

 

 

बन्दर और शेर की कहानी 

 

 

 

 

3 – एक जंगल में बहुत बड़ी गुफा थी। उस गुफा में पांच बन्दर साथ-साथ रहते थे। एक दिन एक शेर आया। उसके साथ एक सियार भी था, दोनों में दोस्ती थी।

 

 

 

शेर को देखकर बंदर भाग खड़े हुए और दूर से बहस करने लगे। बंदरों ने शेर से कहा, “यह हमारी गुफा है। हम यहां पहले से ही रहते है। तुम लोग चले जाओ यहां से।”

 

 

 

 

 

शेर कुछ कहता उससे पहले ही सियार ने कहा, “हम लोग गुफा में ही रहते है। तुम लोग पेड़ पर रहते हो, इसलिए तुम लोग गुफा से भाग जाओ।” शेर ने सियार की बात का ही समर्थन किया। दोनों गुफा में रहने लगे और बंदरों ने पेड़ पर अपना ठिकाना बना लिया। लेकिन वह लोग शेर और सियार को सबक सिखाने का मौका ढूंढ रहे थे।

 

 

 

 

शेर ने सियार को आदेश दिया, ” मैं शिकार करने जा रहा हूँ, तुम हमारे लिए पानी का इंतजाम करके रखो।” सियार एक बड़े से हौद में पानी भर लाया।

 

 

 

 

बंदरों ने हौद में भरा हुआ पानी देखा तो उन्होंने एक पाइप के सहारे पूरा पानी हौद से पहाड़ी के नीचे गिरा दिया। शेर आया उसे प्यास लगी हुई थी लेकिन पानी नहीं मिला। वह सियार को डांटने लगा। यही क्रम तीन-चार दिन तक चलता रहा।

 

 

 

 

एक दिन सियार पानी भर कर लाया और शेर के साथ गुफा में छुप गया। बंदरों ने अपना कार्यक्रम चालू कर दिया, लेकिन शेर को देखते ही पाइप लेकर भाग खड़े हुए।

 

 

 

 

अब शेर ने देर तक शिकार करना छोड़ दिया था क्योंकि बन्दर जो पानी गिराते थे। उसके कारण नीचे घाटी में हरी घास उग आयी थी। जिसे खाने के लिए बहुत से जानवर आते थे। शेर चुपके से जाता और कुछ ही पल में शिकार लेकर आ जाता था।

 

 

 

 

 

बंदरों को बड़ी हैरानी हुई। उन लोगों ने शेर से पूछा, “इतनी जल्दी से शिकार कहां से मिल जाता है ?” शेर ने बंदरों को पूरी बात बताई। अब बंदरों ने शेर और सियार से दोस्ती कर ली थी। सभी लोग आराम से रहने लगे।

 

 

 

 

Moral Of This Story – कभी-कभी परेशानी में भी फायदा हो जाता है।

 

 

 

 

 

4- नदी के किनारे एक किसान का बहुत बड़ा खेत था। उसने खेत में आम और नीम के साथ पपीते का पेड़ लगाया। समय के साथ ही सभी पेड़ बड़े हो गए, उनमे फल आ गए थे। आम को अपने ऊपर बहुत ही घमंड था क्योंकि आम की देख-भाल किसान कुछ ज्यादा ही करता था।

 

 

 

 

वह नीम से अपनी बड़ाई करते हुए बोला, “देखो हमारे फल कितने मीठे और रसदार होते है। हमारे फलों को लोग बहुत ही चाव से खाते है। बेचने पर अच्छा फायदा भी कमाते है। लेकिन तुम्हारी तरफ कोई देखता भी नहीं है।”

 

 

 

 

 

इसपर नीम बोली, “ज्यादा डींग मत हांको, तुम्हे शायद हमारे बारे में नहीं पता है। हमारी टहनियों की दातुन से सभी मनुष्यों के दांत स्वस्थ और सुरक्षित रहते है। हमारी पत्तियों और निम्बोली से हर प्रकार की दवाइयां बनायी जाती है। जो हर प्रकार के रोगों से छुटकारा दिलाती है। अगर तुम्हे विश्वास नहीं है तो पपीते से पूछ लो।”

 

 

 

 

पपीता उन दोनों के बीच रोज होने वाली किच-किच से परेशान था। उसने कहा, “बंद करो यह सब बात, अगर मैं सही बात कह दूंगा तो आम को बुरा लगेगा। इसलिए मिलकर रहो, समय आने पर सब पता चल जायेगा।”

 

 

 

 

आम के जड़ में कीड़े लग गए थे। वह रोगी हो गया था। उस पर फल भी नहीं आ रहे थे। किसान ने देखा तब उसने नीम के पत्ते और निम्बोली को पीसकर घोल बनाया और उसे आम की जड़ में डाल दिया।

 

 

 

 

आम स्वस्थ हो गया। उसमे पहले के जैसा ही आम आने लगे। अब उसे अपनी गलती का पता चल गया था। उसने नीम से माफ़ी मांग लिया। पपीता बोला, “कोई छोटा या बड़ा नहीं होता सबकी अपनी-अपनी उपयोगिता है।

 

 

 

 

 

Panchatantra Stories in Hindi

 

 

 

 

 

 

5- एक धोबी सारे गांव के कपड़े लेकर अपने घोड़े पर लादता फिर उन कपड़ों की धुलाई करके सबके घर पहुंचा देता था। इस तरह उसका गुजरा होता था। धीरे-धीरे उसका घोड़ा बूढ़ा हो गया लेकिन धोबी पहले की तरह ही उसके ऊपर कपड़े का गट्ठर लादता था।

 

 

 

 

 

एक दिन बोझ अधिक होने के कारण घोड़ा एक बड़े गड्ढे में गिर गया और साथ में कपड़े का गट्ठर भी गिर गया। धोबी ने सोचा कि घोड़े ने उसका जानबूझ कर नुकसान कर दिया है। फिर भी वह घोड़े को गड्ढे से बाहर निकालने का प्रयास करने लगा। घोड़ा बूढ़ा था इसलिए वह नहीं निकल पा रहा था।

 

 

 

 

 

धोबी सोचा इस घोड़े को मैं यहीं दफन कर दूंगा और कल जाकर एक मोटा तगड़ा घोड़ा ले आऊंगा, क्योंकि अब यह घोड़ा हमारे काम का नहीं है। फिर धोबी फावड़े से घोड़े की पीठ पर मिट्टी डालने लगा। घोड़ा धोबी की चालाकी समझ गया था।

 

 

 

 

 

अब वह हमें दफन करना चाहता है। मैंने इतने दिन इसकी सेवा की इसका भी ख्याल नहीं किया। धोबी घोड़े की पीठ पर मिट्टी डालता तो घोड़ा पीठ हिलाकर मिट्टी गिरा देता था।

 

 

 

 

इस तरह गड्ढे में थोड़ी-थोड़ी मिट्टी ऊपर आ गयी और घोड़े ने पूरी ताकत लगाई और बाहर आ गया। लेकिन वह अब धोबी का साथ छोड़कर चला गया।

 

 

 

 

Moral Of This Story – कभी भी हार नहीं माननी चाहिए।  अंत तक लड़ना चाहिए, विजय निश्चित मिलेगी। 

 

 

 

 

भेड़िया आया ( Panchatantra Stories in Hindi ) 

 

 

 

 

6- रामू नाम का एक चरवाहा था। वह अपनी भेड़ों को जंगल में चराने के लिए ले गया। वहां उसे मस्ती सूझी और उसने शोर मचाना शुरू किया, “भेड़िया आया और भेड़ ले गया।”

 

 

 

 

उसकी आवाज सुनकर अन्य लोग उसकी सहायता के लिए दौड़े। लेकिन रामू अन्य लोगों को देखकर हंसने लगा और बोला, “कोई भेड़िया नहीं आया है, मैं तो मजाक कर रहा था।”

 

 

 

 

 

दूसरी बार फिर वही किया। उसके अन्य साथी दौड़कर आये। लेकिन उसे देखकर चले गए। रामू हंस रहा था कि मैंने इन लोगों को खूब बेवकूफ बनाया।

 

 

 

 

एक दिन भेड़िया सचमुच आ गया। अब तो रामू की हालत ख़राब हो गयी। उसने सभी को आवाज लगायी, लेकिन उसकी सहायता के लिए कोई नहीं आया। उसकी मस्ती उसे ही भरी पड़ गयी। भेड़िया उसकी भेड़ों को बहुत नुक्सान पहुंचाया।

 

 

 

 

Moral Of This Story – बार – बार झूठ बोलने वालों की बात पर कोई विश्वास नहीं करता है। 

 

 

 

 

 

7- एक भेड़िया रास्ते से जा रहा था। उसे भेंड़ की खाल मिल गयी। उसने उस खाल को अपने ऊपर ओढ़ लिया और चरवाहे की भेंड़ की झुण्ड में जा मिला। भेड़िया प्रतिदिन एक शिकार कर लेता था। जिससे चरवाहे  के भेड़ों की संख्या प्रतिदिन कम हो रही थी।

 

 

 

 

 

एक दिन चरवाहे  ने उस भेड़िया को पहचान लिया, क्योंकि उसके मुंह में खून लगा हुआ था। चरवाहे के यहां मेहमान आये हुए थे। उन्होंने भेंड़ का शिकार खाने की इच्छा जताई। चरवाहे ने भेंड़ की खाल में जो भेड़िया छुपा था, उसे उठाया और चला गया।

 

 

 

 

 

भेड़िया कोई हरकत नहीं कर सकता था क्योंकि उसके पहचाने जाने का खतरा था, इसलिए वह चुप था। चरवाहे ने उस भेड़िये को ही मरकर मेहमानों की सेवा में परोस दिया। जिससे भेड़िया भी ख़त्म हो गया और चरवाहे की भेंड़ भी बच गई।

 

 

 

Moral Of This Story – जन्मजात गुण कभी ख़त्म नहीं होता।  

 

 

 

 

मूर्खता Panchatantra Stories in Hindi 

 

 

 

 

8- एक आलसी बंदर था। वह कोई काम नहीं करता था। किसी को कहते हुए देखता तो उसका खाना छीनकर खा जाता था। सभी जीव – जंतु उससे परेशान थे।

 

 

 

 

 

एक दिन एक खरगोश गाजर खा रहा था। बंदर वहां पहुंचा और उसका गाजर छीनकर खा गया। खरगोश बोला, “बंदर भाई यह अच्छा काम नहीं है। खुद मेहनत करके खाओ।” लेकिन बंदर को कुछ फर्क नहीं पड़ता था।

 

 

 

 

 

एक दिन एक हाथी केला खा रहा था। बंदर हाथी के पास गया और इधर-उधर की बातों में हाथी से केला लेकर खा गया। हाथी ने कहा, “बंदर तूने यह ठीक नहीं किया। मैं चाहूँ तो तुम्हे दंड दे सकता हूँ। लेकिन तुम भी इस जंगल में रहते हो इसलिए छोड़ देता हूँ। आगे से ऐसी गलती नहीं करना।”

 

 

 

 

 

लेकिन बंदर भला कहां मानने वाला था। एक दिन वह शेर के पास गया और उसे परेशान करने लगा, लेकिन शेर की एक ही हुंकार से वह भाग गया।

 

 

 

 

बंदर ने एक आम का पेड़ देखा तो उसे आम तोड़ने की सूझी। लेकिन वह कहीं से कुल्हाड़ी लेकर आया और आम की डाल को ही काटने लगा।

 

 

 

 

सभी जानवरों ने उसे समझाने का प्रयास किया। लेकिन वह मूर्खता पूर्ण कार्य करता रहा और डाल के साथ खुद जमीन पर जा गिरा और वही मर गया।

 

 

 

 

Moral Of This Story – मित्रों मूर्खता स्वयं के लिए ही घातक साबित होती है।

 

 

 

 

 

9- एक भालू और एक बंदर में बहुत ही गहरी दोस्ती थी। दोनों कोई भी खाने का सामान मिल बाँट कर खाते थे। एक दिन भालू और बंदर घूमने निकले। दोनों थक गए थे। एक घने पेड़ की छाया देखकर दोनों ही आराम करने लगे।

 

 

 

 

अचानक दोनों के बीच एक बड़ा सा गन्ना गिरा। बंदर सोया हुआ था लेकिन भालू जाग गया। उसके मन में लालच आ गया। उसने सोचा कि बंदर सो रहा है। इसलिए मैं पूरा गन्ना खुद खा जाता हूँ। उसने पूरे गन्ने को मुंह में डाल लिया और खाने लगा। तभी बंदर भी जाग गया।

 

 

 

 

 

बन्दर को यह देखकर बहुत दुःख हुआ।  तभी उसने देखा कि गन्ना भालू के मुंह में अटक गया है। लेकिन बंदर ने भालू के मुंह में फंसा गन्ना निकालने की कोशिस नहीं किया और भालू कुछ ही देर में मर गया।

 

 

 

 

Moral Of This Story – मित्रता में चालबाजी कभी नहीं करनी चाहिए।

 

 

 

 

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