Panchatantra Short Stories in Hindi With Moral / पंचतंत्र की कहानी

Panchatantra Short Stories in Hindi With Moral / पंचतंत्र की कहानी

Panchatantra Short Stories in Hindi With Moral मित्रों इस पोस्ट में पंचतंत्र की कहानी दी गयी है। सभी कहानियां बहुत ही बढियाँ हैं।

 

 

 

Panchatantra Short Stories in Hindi With Moral Values And Pictures 

 

 

 

 

 

एक बहेलिया शिकार की तलाश में एक जंगल में गया था और उसने पक्षियों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया और उसके ऊपर दाना डालकर पक्षियों का इंतजार करने लगा। कबूतरों का समूह उड़ते हुए जा रहा था। अचानक उनकी निगाह उन दानों पर पड़ी जो बिखरे हुए थे।

 

 

 

 

 

दाने को देखकर सभी कबूतर लालच में आ गये। अपने साथियों की इच्छा को भांपकर कबूतरों के सरदार ने कहा, “जो तुम लोग यह दाना देख रहे हो उसे चुगने ( खाने ) की कोशिस नहीं करना क्योंकि यह किसी के द्वारा हम लोगों को फ़साने की सोची समझी साजिस हो सकती है।

 

 

 

 

 

 

लेकिन कबूतरों ने उतावलेपन में अपने सरदार की कही हुई बातों पर ध्यान नहीं दिया और सभी एक साथ दाना चुगने उतर पड़े और जिस बात का कबूतरों के सरदार को डर था वही हुआ ( लालच बुरी बला )।

 

 

 

 

दाने के नीचे जाल बिछा हुआ था। सभी कबूतर दाना के लालच में जाल रूपी बला में फस चुके थे और सभी को अपने सरदार का सुझाव नहीं मानने पर पश्चाताप हो रहा था। सरदार ने सभी कबूतरों से कहा, “धैर्य रखो, मैं कोई युक्ति तलाशता हूँ।”

 

 

 

 

 

तभी उसे अपने दोस्त नंदन चूहे का ख्याल आया जो उसी जंगल में कुछ ही दूरी पर रहता था। बहेलिया दोपहर में आया तो देखा जाल मे ढेर सारे कबूतर फस चुके थे। धूप तेज थी और दोपहर का समय था। बहेलिए ने एक पेड़ की छांव में आराम करना उचित समझा और वह पेड़ की घनी छांव में लेट गया और उसे नींद आ गई।

 

 

 

 

कबूतरों का सरदार मौके को देखकर अपने साथियों के पास आकर कहने लगा, “मित्रों अब तो बात उलझ गई है लेकिन धैर्य पूर्वक मेरी बात सुनो और उस पर अमल करना। तभी तुम लोगों के प्राणों की रक्षा हो सकेगी अन्यथा सभी मारे जाओगे।”

 

 

 

 

कबूतरों के सरदार ने अपने साथियों से कहना शरू किया, “शाम के समय जब बहेलिया आकर अपना जाल खोलना शरू करेगा तो उस समय तुम सभी लोग खोलने से पहले ही मरने का ढोंग करना और जाल का आखिरी किनारा बहेलिया ज्यों ही खोलेगा उस समय तुम लोग अपनी सम्मिलित प्रयास से जाल के सहित ही उड़ान भरना मैं तुम लोगों के साथ ही रहूँगा। तुम लोग को हमारे बताये हुए स्थान पर चलना”

 

 

 

 

 

संध्या हो चुकी थी धूप कम हो गई थी। बहेलिए की नींद टूटी तो देखा सभी कबूतर जाल में मरे हुए थे। बहेलिया बहुत ही आनंदित था। इतना शिकार उसे जीवन में एक साथ आज पहली बार मिला था। कबूतरों को मारा हुआ देखकर बहेलिया आराम के साथ जाल को खोलने लगा।

 

 

 

 

 

 

जाल में फसे हुए सभी कबूतर मरने का ढोंग करते हुए चौकन्ने थे। बहेलिए ने जैसे ही जाल का आखिरी फंदा खोला तो चौक उठा। तीर कमान से निकल चुका था क्योंकि सभी कबूतरों ने पूरी ताकत लगाकर उड़ान भरी और जाल के साथ ही उड़ गए।

 

 

 

 

 

 

बहेलिया की आराम करने की इच्छा से हाथ आया हुआ शिकार निकल चुका था। इसलिए काल करे सो आज कर, आज करे सो अब। पल में परलै होयगी, बहुरि करैगो कब।।   

 

 

 

 

कबूतरों का सरदार अपने साथियों के साथ ही उड़ रहा था। उसने एक स्थान पर सभी कबूतरों को उतरने का आदेश दिया। सभी कबूतर जाल के साथ ही उस सुरक्षित स्थान पर उतर पड़े। कबूतरों के सरदार ने अपने साथी नंदन चूहे को आवाज लगाई, नंदन उछलता हुआ बाहर आया।

 

 

 

 

 

 

सरदार ने उससे अपने सभी साथियों को जाल से मुक्त करने का आग्रह किया। नंदन ने ख़ुशी से जाल काटकर सभी कबूतरों को मुक्त कर दिया। सभी ने नंदन का धन्यवाद किया और सुख पूर्वक चले गए। लापरवाही से नुकसान होता है। संयुक्त प्रयास से सफलता ध्रुव होती है।

 

 

 

 

गधा और शेर की कहानी ( Donkey And Lion Story in Hindi ) 

 

 

 

 

2- एक जंगल में एक गधा अपने भोजन की तलाश में जा रहा था। उसे एक बड़ी सी गुफा के सामने शेर बैठा हुआ मिला। गधा बहुत डर गया था।

 

 

 

वह धीरे-धीरे चलते हुए शेर के पास जाकर बोला, “हमे माफ़ कर दो महाराज मैं तुम्हारी प्रजा हूँ।”

 

 

 

 

इतना कहते हुए गधा ने शेर की तरफ ध्यान से देखा तो उसे वह शेर हिलता-डुलता नजर नहीं आ रहा था। वह शेर के और करीब गया तो उसे पता लग गया कि यह तो शेर की खाल है।

 

 

 

 

अब उसके दिमाग में एक विचार कौंध उठा क्यों न इस खाल को पहनकर जंगल के सभी जानवरो को डराया जाय। इस काम में बड़ा मजा आएगा।

 

 

 

 

यह सोचते ही गधे ने उस शेर की खाल को पहन लिया और सभी जानवर जहां इकट्ठे घास खा रहे थे, वहां झाड़ियों के पीछे से शेर की नकल करते हुए छलांग लगा दिया।

 

 

 

 

सभी जानवर अचानक से इस मुसीबत को अपने सामने पाकर भाग खड़े हुए। यह देखकर गधा बहुत खुश हो गया, वह सोचने लगा अब तो सभी जानवर हमसे डरते है।

 

 

 

अपनी इस ख़ुशी को गधा छुपा नहीं सका वह जोर-जोर से हंसने लगा। उसे गधे की आवाज में हंसते हुए सभी जानवर समझ गए कि यह शेर की खाल में गधा है जो हम लोगो को डराने लगा है।

 

 

 

 

सभी जानवर उसे मारने के लिए ‘मारो-मारो’ कहते हुए दौड़ पड़े। अब तो गधे के जान पर ही बन आई उसका दांव उल्टा पड़ गया था। वह शेर की खाल को उतार फेका और अपनी जान बचाने के लिए भाग गया।

 

 

 

सांप और चूहे की कहानी ( Snake And Mouse Story in HIndi ) 

 

 

 

Panchatantra Short Stories in Hindi With Moral

 

 

 

3- एक मदारी जंगल में घूम रहा था। उसे एक सांप मिला उसने उस सांप को पकड़कर एक टोकरी में बंद कर दिया। थोड़ी दूर पर ही मदारी को एक चूहा उछलता हुआ मिला तो उसने चूहे को भी उस टोकरी में पकड़कर डाल दिया।

 

 

 

 

यह सोचकर कि सांप के लिए चूहा भोजन के काम आएगा। टोकरी के अंदर सांप और चूहा दोनों बंद थे। सांप को बहुत जोर की भूख लगी थी और सामने ही उसका भोजन भी था।

 

 

 

 

 

सांप ने चूहे को खाने के लिए बढ़ा ही था तो चूहे ने हाथ जोड़कर कहा, “सांप भाई मैं तो बहुत ही छोटा जीव हूँ। हमे खाने से तुम्हारे उदर की पूर्ति नहीं हो सकेगी। अगर तुम हमारी बात मानकर हमारी मदद करोगे तो मैं यहां से निकलने में तुम्हारी मदद कर सकता हूँ। उसके बाद तुम बाहर आकर बड़े-बड़े चूहे और मेढक को अपना भोजन बना सकते हो।”

 

 

 

 

 

चूहे की बात सुनकर सांप बोला, “तुम हमे बेवकूफ समझते हो। पास आए भोजन को छोड़ना कहां की अक्लमंदी है।”

 

 

 

 

चूहा बोला, “तुम हमे खा गए तो पूरी जिंदगी मदारी के इशारों पर ही नाचने के लिए मजबूर हो जाओगे फिर तुम कभी आजाद नहीं हो पाओगे। अब सोच लो सांप राजा तुम्हे गुलामी पसंद है या आजादी।”

 

 

 

 

 

चूहा तो पासा फेक चुका था। थोड़ी देर बाद सांप बोला, “चूहे भाई बताओ हमे क्या करना होगा ?”

 

 

 

चूहा बोला, “मैं तुम्हारे सर के ऊपर चढ़कर मंत्र पढूंगा फिर इसके बाद हम दोनों आजाद हो जाएंगे। लेकिन इतना याद रखना सांप राजा चालाकी दिखाने की कोशिश मत करना नहीं हमारे साथ तुम भी बर्बाद हो जाओगे।”

 

 

 

 

“अब तुम अपनी आँख बंद करके लेट जाओ।”चूहे ने सांप से कहा।

 

 

 

 

सांप आँख बंद करके लेट गया। चूहा सांप के सर पर सवार होकर जल्दी-जल्दी टोकरी को काटकर बड़ा सा छेद बनाया और कूदकर भाग गया।

 

 

 

 

सांप ने अपनी गर्दन उठाकर देखा तो चूहा रफू चक्कर हो गया था। सांप को टोकरी में एक बड़ा सा छेद नजर आया। उसने भी उस छेद से निकलना उचित समझा।

 

 

 

 

नहीं तो मदारी नामक खतरा उपस्थित हो जाने का डर था और जीवन भर कैद में ही बिताना पड़ता। सांप भी उस छेद से निकलकर टोकरी से बाहर चला गया।

 

 

 

 

अब वह चूहे को सबक सिखाने के लिए ढूंढ रहा था क्योंकि चूहे ने उसका भोजन बनने से साफ मना कर दिया था। लेकिन सांप यह भूल गया कि चूहे की सहायता से ही वह भी आजाद हो पाया है।

 

 

 

 

एक बिल में चूहा सांप को दिख गया तो सांप ने कहा, “हम और तुम बहुत पुराने मित्र है। तुम बाहर आओ।”

 

 

 

 

चूहे ने बिल के अंदर से कहा, “सांप राजा मित्रता बराबर वालो से होती है। तुम बहुत बड़े जीव हो मैं एक अदना सा चूहा। भला हमारी और तुम्हारी मित्रता कैसे हो सकेगी ?”

 

 

 

 

चूहे ने सांप की चालाकी समझकर उसे आइना दिखा दिया। सांप अपना सा मुंह लेकर चला गया।

 

 

 

कौवा और मैना की कहानी Best Panchatantra Short Stories in Hindi With Moral

 

 

 

Panchatantra Short Stories in Hindi With Moral

 

 

 

4- एक बरगद का बहुत बड़ा और घना पेड़ था। उस पर केवल कौवो का आधिपत्य था। कोई भी पक्षी उस पेड़ पर अपना बसेरा बनाने के लिए सोच भी नहीं सकता था।

 

 

 

 

इसका कारण यह था कि सब कौवे मिलकर किसी भी पक्षी को उस बरगद के पेड़ पर रुकने ही नहीं देते थे। एक दिन एक मैना कही से भटकती हुई उस बरगद के पेड़ पर आकर बैठ गई।

 

 

 

 

तो सभी कौवे एक तरफ से चिल्लाने लगे और मैना को वहां से जाने के लिए कहने लगे। लेकिन मैना शांत होकर बोली, “यह बरगद तो ईश्वर का बनाया हुआ है। इस पर जितना तुम्हारा हक है, उतना मेरा भी हक है। मैं तुम लोगो से छोटी भी हूँ। हमे अपनी छोटी बहन समझकर ही आज रात के लिए ठौर दे दो। मैं सुबह होते ही यहां से चली जाऊंगी।”

 

 

 

 

लेकिन कौवो ने मैना की एक नहीं सुनी और उसे इतना परेशान किया कि मैना बेचारी वहां से चली गई। मैना को एक आम का पेड़ दिखा उसने ईश्वर का स्मरण किया और आम के पेड़ पर बैठ गई।

 

 

 

 

रात में ही मौसम खराब हो गया था। तूफान के साथ ही जोरदार बरसात होने लगी तभी आम की एक मोटी डाल टूटकर जमीन पर गिर गई और मैना उसके नीचे आकर और सुरक्षित हो गई।

 

 

 

 

 

उधर तूफान और बारिश में उन कौवो की हालत खराब हो गई थी। बरगद की कई डालिया टूटकर बिखर गई। उसके नीचे कई कौवे मर गए।

 

 

 

 

कई घायल हो गए थे। कई तूफान के साथ ही उड़ गए थे। सुबह हुई मौसम साफ हो गया था। मैना ईश्वर की कृपा से सुरक्षित थी। वह कौवो का हाल जानने के लिए उस बरगद के पेड़ के पास गई।

 

 

 

 

 

मैना को देखकर घायल कौवो ने कहा, “हमने तुम्हे अपने पास से भगा दिया इसलिए प्रकृति ने हमे दंड दिया है। आगे से हम कभी ऐसी गलती नहीं करेंगे।”

 

 

 

किशन और सांप की कहानी ( Snake Story in HIndi ) 

 

 

Panchatantra Short Stories in Hindi With Moral

 

 

 

5- एक गांव में किशन नामक सपेरा रहता था। वह बहुत ही दयालू था। जब भी वह सांपो को पकड़ता तब उन्हें कोई हानि पहुंचाए बगैर जंगल में छोड़ देता था।

 

 

 

 

एक दिन उसने एक बड़े सांप को पकड़ा था और जंगल की तरफ छोड़ने जा रहा था। तभी किशन के पास एक दूसरा सपेरा आकर कहने लगा, “तुम इस सांप को हमे दे दो मैं तुम्हे इसकी बहुत कीमत दूंगा।”

 

 

 

 

किशन की औरत भी कहने लगी, “इस सांप को दूसरे सपेरे को दे दो, वह अच्छी कीमत देने के लिए कह रहा है।”

 

 

 

 

किशन बोला, “इसे किसी को भी नहीं दूंगा। चाहे कितनी कीमत क्यों नहीं मिले ?”

 

 

 

 

किशन उस सांप को जंगल में सुरक्षित छोड़ आया। रास्ते में उसे कुछ लोग चिल्लाते हुए मिले, उनके हाथ में डंडा भी था। किशन नजदीक जाकर देखा तब उसे मालूम हुआ कि सभी लोग दो सांपो को मारने के लिए जमा हुए है।

 

 

 

 

किशन ने सबको वहां से हटा दिया और सुरक्षित दोनों सांपो को पकड़कर जंगल में छोड़ दिया। घर आकर देखता क्या है कि वही दोनों सांप उसके सामने है।

 

 

 

 

तभी उसमे से सापिन बोली, “किशन तुम एक बहुत अच्छे इंसान हो। तुमने हमारी जान बचाकर बहुत ही अच्छा कार्य किया है। इसके बदले में हम तुम्हे सोने की अगूंठी देते है। तुम इससे जो भी मांगोगे तुम्हे मिल जाएगा और कोई भी मुसीबत पड़ने पर हमे याद करोगे तब हम तुम्हारी सहायता के लिए अवश्य ही आएंगे। हम दोनों इच्छाधारी सांप है।”

 

 

 

 

 

इतना कहते हुए दोनों सांप गायब हो गए।

 

 

 

 

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