5+ Goat Story in Hindi Language / चालाक बकरी और शेर की कहानी

5+ Goat Story in Hindi Language / चालाक बकरी और शेर की कहानी

Goat Story in Hindi मित्रों इस पोस्ट में बकरी की कहानी ( Clever Goat Story in Hindi ) दी गयी  है। यह Two Goats Story in Hindi आपको जरूर पसंद आएगी।

 

 

 

Little Goat Story in Hindi ( लोमड़ी और बकरी की कहानी )

 

 

 

 

 

1- जंगल में एक लोमड़ी गर्मी से परेशान हो पानी की तलाश में भटक रही थी। तभी थोड़ी दूर उसे एक कुंआ  दिखा। वह कुंए के पास जाकर देखने लगी।

 

 

 

 

उसमे पानी तो था लेकिन वह कुंआ बहुत ही गहरा था। लोमड़ी प्यास से परेशान थी। उसने सोचा पहले इस कुंए में कूदकर पानी पीकर अपनी प्यास बुझाऊंगी। उसके बाद ही सोचूंगी।

 

 

 

 

यह सोचकर कुंए में छलांग लगा दिया और ठंडा पानी पीकर अपनी प्यास को शांत किया। अब कुंए से बाहर निकलने के लिए उपाय सोचने लगी और कुंए के अंदर से ‘बचाओ-बचाओ’ की आवाज लगाने लगी।

 

 

 

 

 

एक बकरी उधर से जा रही थी। आवाज सुनकर वह बकरी कुंए के पास जाकर देखा तो उसमे एक लोमड़ी गिरी हुई थी। बकरी ने पूछा, “तुम यहां क्या कर रही हो ?”

 

 

 

 

लोमड़ी ने कहा, “मैं यहां शीतल जल पी रही हूँ।”

 

 

 

बकरी ने पूछा, “जब शीतल जल पी रही हो तब ‘बचाओ-बचाओ’ क्यों चिल्ला रही हो ?”

 

 

 

इसपर लोमड़ी ने कहा, “मैं तो यह बोल रही थी कि यहां बहुत ही शीतल जल है, कोई आकर पी लो। अगर तुम्हे प्यास लगी हो तो आकर पी सकती हो।”

 

 

 

 

बकरी अपनी प्यास बुझाने के लिए उस कुंए में कूद गई और सोचा भी नहीं कि वह कैसे कुंए से बाहर निकलेगी। कुंए के अंदर जाकर शीतल जल को पीया और लोमड़ी से बोली, “यह जल तो बहुत ही शीतल है लेकिन अब हम यहां से निकलेंगे कैसे ?”

 

 

 

 

लोमड़ी बोली, “एक उपाय है मैं तुम्हारे ऊपर चढ़कर बाहर निकलती हूँ फिर तुम्हारे लिए कोई उपाय सोचेंगे।”

 

 

 

 

बकरी के हां कहते ही लोमड़ी उसके ऊपर चढ़कर छलांग मारकर कुंए से बाहर निकल गई। अब बकरी ने लोमड़ी से कहा, “तुम हमे इस कुंए से बाहर निकालो।”

 

 

 

लोमड़ी बोली, “मैं तो अपनी चालाकी से बाहर निकल गई अब तुम भी अपनी चालाकी से बाहर निकलने का प्रयास करो।”

 

 

बकरी कुंए के अंदर ही रह गई।

 

 

 

शेर और चालाक लोमड़ी 

 

 

 

 

2- एक जंगल में एक शेर था। वह बीमार होने के कारण बहुत कमजोर हो गया था। वह एक दिन एक हिरण का शिकार करने के लिए अपनी गुफा से बाहर निकलकर हिरण को पकड़ने के लिए उसके पीछे दौड़ा तो वह हिरण तेजी से दौड़कर शेर की पकड़ से बाहर चला गया।

 

 

 

 

शेर कमजोर हो गया था वह हिरण को नहीं पकड़ सका। इस तरह वह हर बार प्रयास करता था लेकिन कमजोर होने के कारण विफल हो जाता था।

 

 

 

 

शिकार न मिलने के कारण शेर और कमजोर होता जा रहा था। उसे एक लोमड़ी का घर दिखाई दिया। वह उसके घर में बैठ गया और सोचने लगा कि जब लोमड़ी आएगी तो उसे खाकर अपनी भूख शांत करूँगा।

 

 

 

 

जब लोमड़ी अपने घर की तरफ आई तो देखा उसके घर के बाहर शेर के पैर के निशान थे। वह सोचने लगी शायद शेर घर के अंदर बैठा है।

 

 

 

अगर मैं अंदर जाऊंगी तो वह मुझे खा जाएगा। उसने एक उपाय सोचा कि मै बाहर से आवाज देकर बुलाती हूँ अगर घर के अंदर कोई होगा तो अवश्य ही बोलेगा। इस तरह मैं सतर्क हो जाऊंगी।

 

 

 

 

लोमड़ी बाहर से आवाज देने लगी, “घर के अंदर कौन है, बोलता क्यूं नहीं ?”

 

 

 

तभी शेर आवाज बदलकर बोला, “आजाओ घर के अंदर कोई नहीं है।”

 

 

 

 

लोमड़ी बोली, “मुर्ख कही के अगर घर के अंदर कोई नहीं है तो आवाज कहां से आ रही है।”

 

 

 

शेर का आभास लोमड़ी को हो गया था इसलिए वह भाग गई। शेर बाहर आकर देखा तो लोमड़ी भाग रही थी। शेर ने लोमड़ी का पीछा किया लेकिन उसकी कमजोरी उसके आड़े आ गई थी। वह लोमड़ी को पकड़ नहीं सका।

 

 

 

Samajdar Bakri Story in Hindi ( बकरी और राक्षस की कहानी ) 

 

 

 

3- एक बकरी के पास तीन बच्चे थे। उसका बड़ा बच्चा बहुत मोटा तगड़ा था और दो बच्चे सामान्य थे। एक दिन बकरी अपने तीनो बच्चो को अपने पास बुलाकर कहा, “अब मैं बूढ़ी हो गई हूँ, कुछ दिन में मर जाऊंगी। लेकिन तुम तीनो भाई एक साथ ही रहना और किसी भी मुसीबत का एक साथ मिलकर मुकाबला करना। तुम्हारे पास कोई मुसीबत नहीं आएगी।”

 

 

 

 

इतना कहते हुए बकरी मर गई। अब उसके तीनो बच्चे एक साथ रहने लगे। धीरे-धीरे उस जंगल में चारे की कमी हो गई थी। मंझला बकरी का बच्चा बोला, “भैया, क्या हम लोग नदी के उस पार वाले जंगल में नहीं जाएंगे ? नदी के उस पार वाले जंगल में बहुत हरा चारा है। हम वहां आराम से रह सकते है।”

 

 

 

 

तभी छोटा बकरी का बच्चा बोला, “नहीं हम लोग नदी के उस पार वाले जंगल में नहीं जाएंगे क्योंकि नदी पार करने के लिए पुल पड़ता है और उसी पुल पर एक राक्षस रहता है। वह सभी को मारकर खा जाएगा।”

 

 

 

 

तभी बड़ा बकरी का बच्चा बोला, “तुम लोग डरो मत। मैं उसे अपनी सींग से मार डालूंगा। मैं जैसा कहता हूँ वैसा ही करो।”

 

 

 

 

बड़े बकरे ने छोटे और मंझले बकरे को समझाया तुम लोग बारी-बारी से बहाना बनाकर निकल जाना तुम्हारे पीछे मैं राक्षस को मारकर आ जाऊंगा।

 

 

 

 

पहले छोटा बकरी का बच्चा गया। राक्षस ने उसका रास्ता रोक लिया और बोला, “मैं तुम्हे खा जाऊंगा।”

 

 

 

 

छोटा बकरा बोला, “हमारे पीछे हमसे मोटा दूसरा बकरा आ रहा है तुम उसे मारकर खाओगे तब तुम्हारा पेट भर जाएगा। मैं तो बहुत छोटा हूँ, मुझे खाने से तुम्हारा पेट नहीं भरेगा।”

 

 

 

 

राक्षस ने छोटे बकरे को छोड़ दिया। छोटा बकरा दूसरे जंगल में चला गया। तभी मंझला बकरी का बच्चा आया तो राक्षस ने उसे रोक लिया और बोला, “मैं अब तुमको खाऊंगा।”

 

 

 

 

मंझला बकरी का बच्चा बोला, “हमारे पीछे एक बहुत बड़ा बकरा आने वाला है। वह बहुत मोटा तगड़ा है। तुम उसे मारकर खाओगे तब तुम्हारा पेट भर जाएगा। हमे मारकर खाने से तुम्हारा पेट भरने वाला नहीं है।”

 

 

 

 

राक्षस ने मंझले बकरे को जाने दिया। वह भी छोटे बकरे के पास चला गया। पीछे मोटा और बड़ा बकरा आया। उसे देखकर राक्षस बोला, “मैं तुम्हारी राह बहुत देर से देख रहा था। अब मैं तुम्हे मारकर अवश्य ही खा जाऊंगा।”

 

 

 

 

तभी मोटे बकरे ने कहा, “तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई यह बात कहने के लिए।”

 

 

 

 

तभी मोटा बकरा उस राक्षस के पेट में अपनी सींग से वार करके नदी में गिरा दिया नदी में गिरकर राक्षस मर गया। तीनो बकरे उस जंगल में आराम से रहने लगे।

 

 

Bakri ki Chaturai Story in Hindi 

 

 

 

4- राधा नाम की एक बकरी थी, उसके सात बच्चे थे। उसका जीवन बहुत ख़ुशी से बीत रहा था। वह जब अपने बच्चो के लिए खाना लाने जाती थी।

 

 

 

उन्हें समझाकर जाती थी, किसी भी अजनबी के कहने पर दरवाजा नहीं खोलना। तभी छोटा बच्चा बोला, “मां जब तुम खाना लेकर आओगी तब हम अंदर से तुम्हे कैसे पहचान कर दरवाजा खोलेंगे ?”

 

 

 

बकरी बोली, ” मैं जब खाना लेकर आऊंगी तो एक प्यारा सा गीत गाऊंगी। तब तुम लोग दरवाजा खोल देना।”

 

 

 

 

बकरी ने एक प्यारा सा गीत गाकर अपने बच्चो को सुनाया फिर खाना लाने चली गई। बकरी और उसके बच्चो की बातें एक भेड़िया छुपकर सुन रहा था।

 

 

 

 

बकरी के जाते ही उसने दरवाजा खटखटाकर कहा, “प्यारे बच्चो दरवाजा खोलो।”

 

 

 

तभी बकरी का छोटा बच्चा बोला, “यह बेसुरी आवाज से बोलने वाला कौन है।”

 

 

 

वह छोटा बच्चा फिर बोला, “तुम हमारी माँ नहीं हो। भाग जाओ यहां से, हमारी माँ तो मीठे स्वर में गाना गाती थी। तुम्हारी तो आवज ही बेसुरी है तो गाना कैसा होगा।”

 

 

 

 

अब भेड़िया ने सोचा चलकर शहद खाकर आऊंगा फिर गाना गाऊंगा, तो हमारी भी आवाज मीठी हो जाएगी। भेड़िया मधु के छत्ते के पास गया और मधु खाकर आया फिर बकरी के दरवाजे पर जाकर गाना गाने लगा।

 

 

 

 

इस बार उसकी आवाज मीठी थी। सभी बकरी के बच्चे बोलने लगे चलकर दरवाजा खोल देते है। माँ हम लोगो के लिए खाना लेकर आ गई है।

 

 

 

छोटा लड़का फिर बोला, “तुम लोग रुको मैं देखकर आता हूँ।”

 

 

 

 

वह गया और दरवाजे के नीचे से देखा। एक काले रंग का जीव बाहर खड़ा था। वह बच्चा बोला, “तुम्हारे पांव तो काले रंग के है। हमारी माँ के पांव तो सफ़ेद है। तुम यहां से भाग जाओ तुम हमारी माँ नहीं हो सकते।”

 

 

 

 

भेड़िया सोचने लगा बकरी के बच्चे मुझे पहचान जाते है। वह एक आटा चक्की वाले के पास गया। वह चक्की वाला सो रहा था। भेड़िए ने अपना दोनों पैर आटे में डुबो दिया और खुश होकर बकरी के दरवाजे पर गया और फिर से गाना गाने लगा।

 

 

 

 

इस बार एक दूसरा बकरी का बच्चा दरवाजे से देखा तो भेड़िया का सफेद पैर दिखा। वह अपने सभी भाइयो से बोला, “अब तो लगता है कि माँ आ गई है। क्योंकि दोनों पैर सफेद दिख रहे है ?”

 

 

 

 

छोटे बच्चे ने कहा, “कि मुझे शक है यह हमारी माँ नहीं हो सकती। तुम लोग दरवाजा मत खोलो।”

 

 

 

 

लेकिन सभी एक तरफ से कहने लगे, “हमे भूख लगी है।”

 

 

 

फिर सभी ने मिलकर दरवाजा खोल दिया। सामने एक बड़ा सा भेड़िया खड़ा था। वह बोला, “अब मैं तुम लोगो को खा जाऊंगा।”

 

 

 

 

सभी बच्चे डर के मारे जहां जगह मिली वहां छुप गए। छोटा बच्चा चूल्हे के अंदर छुप गया। भेड़िए की नजर उसके ऊपर नहीं गई।

 

 

 

बाकी 6 बच्चे को भेड़िए ने एक बोरे में भरा और पीठ पर रखकर ले गया और रास्ते में कहता जा रहा था, “आज तो हमारी दावत है खूब अच्छा खाना खाऊंगा।”

 

 

 

 

कुछ देर के बाद ही बकरी आ गई तो देखा घर का दरवाजा खुला है और घर में सारा सामान इधर-उधर बिखरा पड़ा है। तभी छोटा बच्चा चूल्हे के अंदर से निकलकर बाहर आया और बकरी को सारी बात बता दिया।

 

 

 

 

वह बोला, “हमारे मना करने के बाद भी सभी लोग मिलकर दरवाजा खोल दिए थे।”

 

 

 

बकरी गुस्से से भर गई और बोली, “उस भेड़िए को सबक सीखना पड़ेगा।”

 

 

 

 

अपने छोटे बच्चे को लेकर भेड़िए को ढूंढने चल पड़ी। उधर भेड़िया थक गया था और अपने मन में सोचा बोरी का मुंह तो बंद है इसलिए मैं थोड़ा आराम कर लेता हूँ।

 

 

 

 

वह एक पेड़ की छाया में आराम करने लगा। भेड़िए को नींद आ गई वह खर्राटे भरने लगा। तभी बकरी अपने बच्चो को ढूंढते हुए वहां पहुंच गई।

 

 

 

 

भेड़िया सो रहा था। बकरी ने झट से बोरी का मुंह खोला तो सभी बच्चे बाहर निकल आए। बकरी ने सभी को चुप रहने का संकेत किया। फिर छोटे बच्चे ने एक पत्थर उठाकर उस बोरी में भर दिया।

 

 

 

 

 

उसे पत्थर भरते देखकर सभी बच्चो ने उस बोरी को पत्थर से भर दिया। अब बकरी ने उस बोरी का मुंह बंद कर दिया। फिर अपने सतो बच्चो के साथ एक झाड़ी के पीछे जाकर छुप गई।

 

 

 

 

भेड़िए की नींद खुली तब वह उस बोरी को उठाकर पीठ पर लाद लिया और बोला, “आज मैं जी भरकर दावत उड़ाऊंगा।”

 

 

 

भेड़िए को बोरी का वजन ज्यादा लग रहा था। उसे उठाकर चलते हुए भेड़िया थक गया था। भेड़िए को एक नदी पार करनी थी। वह तो थका हुआ था। ऊपर से बोरी में भरे हुए पत्थरो का बोझ था।

 

 

 

 

वह नदी पार नहीं कर पाया और डूबकर मर गया। बकरी झाड़ी के पीछे से निकलकर अपने बच्चो के साथ अपने घर आ गई थी।

 

 

 

बकरी और चरवाहे की कहानी 

 

 

Goat Story in Hindi

 

 

 

5- Top Goat Story in Hindi रामू एक चरवाहा था। उसके पास 10 बकरियां थी। वह अपनी औरत के साथ ही उन बकरियों को चराता था और बकरियों का दूध निकालकर बाजार में बेच देता था।

 

 

 

 

इस तरह रामू अपना जीवन यापन करता था। उसकी औरत का नाम मीरा था। वह भी रामू के साथ हर कार्य में हाथ बटांती थी। रामू ने एक दिन अपनी सारी बकरियों की गिनती किया तो उसे एक बकरी कम लगी।

 

 

 

 

उसने मीरा से कहा, “मीरा आज हमारी एक बकरी कम लग रही है। तुम ऐसा करो सभी 9 बकरियों को लेकर घर चले जाओ। मैं उस बकरी को ढूंढकर तब ही घर आऊंगा।”

 

 

 

 

मीरा सभी बकरियों को लेकर घर चली गई। अब रामू अपनी बकरी को ढूंढने जंगल में चला गया। जंगल में रामू को रात हो गई। उसने देखा जंगल में एक मंदिर है।

 

 

 

 

रामू ने पूरी रात उस मंदिर में बिताई। सुबह होते ही वह फिर अपनी बकरी की खोज में निकल पड़ा। तभी उसे पास में एक जानवर के कराहने की आवाज सुनाई पड़ी।

 

 

 

 

रामू आवाज की दिशा में आगे बढ़ गया तो उसे कटीले तारो में एक हिरण उलझा हुआ मिला। रामू ने हिरण को देखा तब उसे दया आ गई।

 

 

 

 

उसने हिरण को उन कटीले तारो से निकालकर बाहर कर दिया। वह जादुई हिरण था। उस हिरण को पंख लगे थे। हिरण ने रामू से पूछा, “तुम जंगल में क्या कर रहे हो ?”

 

 

 

 

रामू बोला, “हमारी बकरी जंगल में गायब हो गई है। मैं उसे ढूंढ रहा हूँ।”

 

 

 

हिरण रामू से बोला, “तुम हमारी पीठ पर बैठ जाओ। मैं तुम्हे बकरी ढूढ़ने में मदद करूँगा।”

 

 

 

रामू को अपनी पीठ के ऊपर बैठाकर हिरण उड़ने लगा। तभी एक जगह रामू को उसकी बकरी दिखाई पड़ी। उसे शेर दौड़ा रहा था।

 

 

 

 

रामू और जादुई हिरण जब तक बकरी को बचाने पहुंचते उसके पहले ही शेर रामू की बकरी को मारकर खा गया था। रामू अपनी बकरी के लिए रोने लगा क्योंकि वह भी रामू के आय का जरिया थी और सब बकरियों से ज्यादा दूध देती थी।

 

 

 

 

 

जादुई हिरण ने रामू को अपना सोने का सींग तोड़कर देते हुए कहा, “तुम इसे बेचकर ढेर सारी बकरियां खरीद लेना।”

 

 

 

 

रामू ने देखा हिरण के टूटे हुए सींग के स्थान पर नया सींग निकल आया था। वह जादुई हिरण रामू से बोला, “तुम हमे जब भी याद करोगे मैं तुम्हारे समक्ष हाजिर हो जाऊंगा क्योंकि तुमने हमारी जान बचाई है।”

 

 

 

 

इतना कहकर हिरण गायब हो गया।

 

 

 

 

मित्रों यह Goat Story in Hindi आपको कैसी लगी जरूर बताएं और Goat Story in Hindi Reading की तरह की दूसरी कहानी के लिए इस ब्लॉग को सब्स्क्राइब जरूर करें और Goat Story in Hindi Writing इसे शेयर भी करें।

 

 

 

 

1- Elephant Story in Hindi With Moral / शेर और हाथी की कहानी हिंदी में।

 

2- Vinash Kale Vipreet Buddhi Story in Hindi / चार ब्राह्मण की कहानी हिंदी में।

 

3- Elephant Story in Hindi With Moral / शेर और हाथी की कहानी हिंदी में।

 

4- Story of Two Goats crossing the bridge in English

 

 

Funny Story in Hindi