Monday, 13 July, 2020

Funny Stories in Hindi Written / हिंदी की शिक्षाप्रद मजेदार कहानियां


Funny Stories in Hindi

Funny Stories in Hindi मित्रों इस पोस्ट हिंदी की मजेदार कहानियां दी गयी हैं।  आप यह Funny Stories in Hindi Pdf की कहानियां जरूर पढ़ें और इसे शेयर भी जरूर करें।

 

 

 

 

Funny Stories in Hindi Short ( मुफ्तखोरी हिंदी मजेदार कहानी ) 

 

 

 

 

 

हमारी कंपनी के मैनेजर लुकाराम बहुत ही डरपोक और संकोची किस्म के मानव थे, मगर खाने के मामले और दूसरे के पैसे खर्च कराकर खाने में उन्हें असीम सुख का अनुभव होता था, इसीलिए इनका नाम पेटूराम पड़ गया था।

 

 

 

 

जब भी हम लंच के लिए किसी होटल में जाते तो पेटूराम हमारे पीछे आ जाते और कई चीजों का Order करके हमारे पास बैठ जाते और हमसे पहले ही सारा भोजन समाप्त करके “ मैं अभी आ रहा हूँ ” कहकर निकल जाते और फिर नहीं आते और उनके पैसे भी हमें ही चुकाने पड़ते थे। “ मैं  अभी आ रहा हूँ ” यह उनका Famous dialog था।

 

 

 

 

हिंदी फनी कहानी 

 

 

 

 

 

एक दिन पेटूराम ने हम तीन साथियों को घर पर भोजन के लिए आमंत्रित किया तो हमें बड़ा ही आश्चर्य हुआ कि आज सूर्य पश्चिम दिशा की तरफ से कैसे उग गया।

 

 

 

 

लेकिन मौक़ा अच्छा मिला था।  हमने भी पिछली सारी कसर का बदला लेने का बदला लेने का इरादा मन में रखकर अगले दिन पेटूराम के घर  जा पहुंचे।

 

 

 

 

 

हमने देखा कि उनके घर कीर्तन हो रहा था।  कीर्तन समाप्त होने के बाद  पेटूराम ने सबको प्रसाद बांटा।  उसके बाद भोजन का कार्यक्रम शुरू हुआ और मोहल्ले वाले भोजन करना शुरू किये।

 

 

 

 

हमें लगा था कि इसके बाद हमारा नंबर आएगा।  बदला लेने के लिए  हमने सुबह से भोजन नहीं किया था, ऊपर से चूरन अलग से खा लिया था।  अब भूख के कारण जान जा रही थी और भोजन की सुगंध आग में घी का काम कर रही थी।

 

 

 

 

काफी समय बीत गया, लेकिन कोई बुलावा नहीं आया तो हमने ही पेटूराम से पूछ लिया, ” अरे भाई भोजन की व्यवस्था कब और कहाँ है ? लेकिन यह क्या ? पेटूराम राम ने एक झटके में कह दिया, ” भोजन, कैसा भोजन ? “

 

 

 

 

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पहले तो हमें बहुत क्रोध आया, लेकिन हमने खुद को शांत कराते हुए कहा, ” अरे तुमने ही तो हमें भोजन पर बुलाया है।  ” पेटूराम बजाय शर्मिन्दा हुए तुरंत बोले, ” अरे नहीं भाई, तुम लोगों को सुनने में जरूर कोई गलती हुई है।  हमने भोजन के लिए नहीं बल्कि भजन के लिए बुलाया था।  “

 

 

 

 

थोड़ा रुकते हुए फिर वे बोले, ” अब तो खाना भी ख़तम है।  देखो थोड़ी दूर पर होटल है, वही पर खा लो और जल्दी जाओ, नहीं तो वह भी बंद हो जाएगा। ”

 

 

 

 

इसपर हमने कहा, ” आप भी ज़रा साथ चलें तो बढ़िया होगा।  हम लोग यहां नए हैं।  ” इसपर पेटूराम झट से  मान गए और होटल पहुंचकर लंबा – चौड़ा आर्डर दिया और हर बार की तरह इस बार भी हमसे पहले भोजन करके ” अभी आता हूँ ” कहके निकल लिए।

 

 

 

 

अब अपने भोजन के साथ ही उनके भोजन के पैसे भी हमें ही चुकाने पड़े।  बस उसी समय हमने तय कर लिया कि पेटूराम को सबक सिखाना है।

 

 

 

 

अगले दिन हम तीनो पेटूराम से अलग – अलग मिले और  उन्हें Sunday के दिन अपने – अपने घर भोजन का निमंत्रण दिया।  उन्होंने हम तीनो को सहर्ष स्वीकृति दे दी।

 

 

 

 

उन्होंने बुधवार से ही अपने घर का खाना छोड़ दिया था।  सन्डे के दिन सुबह ही निकल पड़े मिशन पर। चलने से पहले उन्होंने अपने लडके को हिदायत दी, ” देखो, आज मुझे तीन जगह भोजन करने जाना है।  हो सकता है कि आने में मुझे थोड़ा लेट हो और अधिक भोजन करने के वजह से मुझे चलने में दिक़्क़त हो सकती है, इसलिए तुम साइकिल लेकर बाज़ार में आ जाना। “

 

 

 

 

मोहन जी सबसे पहले अपने पहले मित्र शिवम के यहां पहुंचे।  वहाँ उन्हें एक गिलास ठंडा पानी दिया गया। पेटूराम जी बुद्धवार से भूखे थे, पेट में खाली पानी ने जाकर उधम मचाना शुरू कर दिया।

 

 

 

 

उधर रसोईघर से भोजन बनाने की आवाज से पेटूराम के पेट में चूहे एकदम उछाल मारने लगे, उनका बस चलता तो वे भोजन कच्चा ही खा जाते।

 

 

 

 

भीतर शिवम् की पत्नी केवल गर्म तवे पर पानी का छींटा मार रही थी।  उन्हें शिवम् ने पूरी तरह से समझा दिया था।  पेटूराम मस्त  बैठ गए और तरह – तरह के पकवानों को ध्यान में रखते हुए विचारों में खो गए।

 

 

 

 

इतने में शिवम की पत्नी न बाहर आकर शिवम से कहा, ” खाने का सामान कुत्ते ने जूठा कर दिया है, मुझे अब बाजार जाकर सब सामान लाना होगा। “

 

 

 

 

इतना सुनते ही पेटूराम के तो होश उड़ गए। उन्हें तुरंत ही विनय की याद आयी।  विनय का घर शिवम के घर से थोड़ी ही दूर पर था।  वे तुरंत ही वहाँ से निकले।

 

 

 

रास्ते भर वे शिवम और उसकी पत्नी को कोसते रहे। जैसे ही वे विनय के घर की गली की तरफ मुड़े, विनय वहीँ टकरा गए।  पेटूराम हैरानी से बोले, ” अरे भाई कहा जा रहे हो ? आज तो आपने मुझे भोजन के लिए आमंत्रित किया था। ”

 

 

 

इसपर विनय  कहा, ” हाँ, मैंने आपको बुलाया तो था, लेकिन आज ही शिवम ने भी आपको आमंत्रित किया था, इसलिए मैंने Plan बदल दिया।  अब तो मैं कहीं जा रहा हूँ।  आपको भोजन ना करा पाने का मुझे दुःख है, चलिए अगली बार मैं आपको जरूर बुलाऊंगा।  ”

 

 

 

 

बेचारे पेटूराम भूख से बड़े परेशान हो रहे थे।  विनय और मुकेश को  लानत-मलामत भेजते हुए  मेरे घर पहुंचे। मैं तो बस इसी इन्तजार में बैठा था।

 

 

 

 

तुरंत ही उन्हें घर ले गया और उन्हें बड़े ही सम्मान से बिठाया और जैसे ही वे तसल्ली से बैठे, मैंने उनसे कहा, ” अरे, बहुत बड़ी गड़बड़ हो गयी।  ”

 

 

 

 

इतना सुनते ही उन्होंने घबराकर कहा, ” क्या हुआ ? भोजन तो तैयार है न ? ” मैंने कहा, ” अरे पूरी बात तो सुनिए।  दरअसल आपको शिवम् और विनय ने आपको आमंत्रित  किया था सो मैंने भोजन का कार्यक्रम Postpond कर दिया, हाँ चाय बनी हुई है।  मैं चाय मंगाता हूँ। ”

 

 

 

 

इसके बाद मैंने अपनी पत्नी को आवाज लगाईं और दो कप चाय मंगाई। चाय पीने के बाद हम बाग़ में टहलने गए।  वहाँ पर पेटूराम जी ने मरी हुई आवाज में कहा, ” नहीं, मैंने उनके तो भोजन ही नहीं किया।  मैंने सोचा सीधा तुम्हारे घर पर भोजन किया जाए। ”

 

 

 

 

तभी प्लान के मुताबिक़ पत्नी ने आकर कहा, ” देखिये मैं अभी बाजार जा रही हूँ।  मुझे थोड़ी देर हो सकती है ” यह सुनते ही पेटूराम की हालत और भी खराब हो गयी।

 

 

 

 

वह बेचारे बेहोश हो चुके थे।  शाम को उनका लड़का मेरे घर आया और पेटूराम को साइकिल पर लादकर ले गया।  उसके बाद पेटूराम से मुफ्तखोरी से तौबा कर ली।

 

 

 

 

Funny Stories in Hindi For Class 8 & 9 

 

 

 

 

 

2- एक महावत का हाथी काफी बूढ़ा हो गया था।  महावत ने सोचा, ” अब यह बूढ़ा हो गया है, अब इसका कोई काम नहीं है।  अगर इसे अभी नहीं बेचा गया तो इसका सही दाम नहीं मिल पायेगा। ”

 

 

 

 

यह सोचकर वह उसे पशुमेले मी ले गया।  उसने इसके लिए हाथी को खूब तैयार किया।  उसने हाथी को खूब साफ़ किया और उस पर काफी सारा काला रंग और तेल लगाया।  इससे हाथी जवान लगाने लगा।

 

 

 

 

 

मेरे बहुत दूर – दूर से पशुप्रेमी आते थे।  महावत की हाथी को देखकर लोग काफी आकर्षित होने लगे।  महावत बड़ा खुश हुआ। उसकी तरकीब काम आने लगी  थी।

 

 

 

 

मेला कई दिनों के लिए लगता था। एक दिन डब्लू भी मेले में पहुंचा।  वह हाथी को देखते ही नाक भौं सिकोड़ने लगा।  वह कभी हाथी को आगे देखता तो कभी पीछे देखता।

 

 

 

 

 

यह देखकर महावत बड़ा चिंतित हुआ।  उसको लगा, लगता है इस आदमी को माजरा समझ में आ गया। महावत दौड़कर डब्लू के पास गया और उसे झट से वहाँ से थोड़ी दूर ले गया और उसे २०० रुपये देते हुए बोला, ” यह पैसे रख लो और जाओ यहां से।  ”

 

 

 

 

इसपर डब्लू बोला, ” अरे…मैं ये कह रहा था…..”

 

 

महावत जल्दी से बोला, ” चलो…चलो…जाओ यहां से तुरंत।

 

 

 

 

डब्लू वहाँ से चला गया। महावत को बड़ा Tension हुआ कि कहीं यह उसकी सारी पोल ना खोल दे।  उसने गाँव में पता लगवाया तो पता चला कि यह डब्लू बड़ा ही बुद्धिमान आदमी है।

 

 

 

 

अब तो महावत और भी परेशान हो गया। दूसरे दिन डब्लू फिर से आया और हाथी का मुआयना करने लगा।  महावत  दौड़कर डब्लू के पास आया और उसे ५०० रुपये देते  हुए कहा, ” भाई अब जाओ यहाँ से। ”

 

 

 

 

डब्लू कुछ कह पाता इसके पहले ही महावत ने उसे भगा दिया। डब्लू भी नहीं समझ पा रहा था कि महावत उसे पैसे क्यों देता है ? अगले दिन डब्लू फिर से पहुँच गया।

 

 

 

 

यह देखकर महावत  को गुस्सा आ गया। वह डब्लू से झगड़ा करने लगा।  महावत ने गुस्से से कहा, ” अरे क्या जानते हो तुम हाथी के बारे में ? बुद्धिमान होंगे तो अपने घर के…जब देखो मुंह उठा के चले आते हो। “

 

 

 

 

इसपर डब्लू ने कहा, ” अरे जनाब आप तो झूठे ही गुस्सा हो रहे हैं…..मैं तो कह रहा था कि इसका….

 

 

 

 

इतने में वहाँ काफी भीड़ जुट गयी।  लोग काना-फुंसी करने लगे। तभी महावत ने गुस्से से कहा, ” इसका क्या ? हाँ, क्या इसका ? तुम्हे लगता है यह हाथी बूढ़ा है।  चलो बूढ़ा और बेकार ही सही।  मुझे यहां व्यापार ही नहीं करना है। परेशान करके रख दिया है। ”

 

 

 

 

लोगों में काना-फूसी बढ़ गयी।  सभी कहने लगे यह हाथी बूढ़ा है।  महावत झूठ बोल रहा था। तभी डब्लू ने हाथ जोड़कर कहा, ” अरे महाशय, मेरी बात तो सुनिए। ”

 

 

 

 

महावत चिढ़कर बोला, ” अब सुनाने को बाकी ही क्या रह गया है ? सब तो सूना दिया।  चलो यह भी सूना दो। ”

 

 

 

 

इसपर डब्लू ने कहा, ” मैं कब से समझने की कोशिश कर रहा हूँ कि इस जानवर का मुँह किस तरफ है और इसकी दो पूछे क्यों है ? ” यह सुनते ही महावत ने सर पकड़ लिया और वहीँ बैठ गया।

 

 

 

 

 

 

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