Monday, 13 July, 2020

Funny Short Stories in Hindi Pdf / हिंदी की मजेदार कहानियां २०२०


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Funny Short Stories in Hindi मित्रों यह 4 मजेदार हिंदी कहानियां है, जो आपको जरूर गुदगुदाएंगी।  आप इन Funny Moral Stories in Hindi को जरूर पढ़ें और इसे शेयर भी जरूर करें। 

 

 

 

 

Funny Small Stories in Hindi ( जूता हिंदी मजेदार कहानी ) 

 

 

 

 

आगरा केवल ताजमहल के लिए ही नहीं जूतों के लिए भी बिख्यात है।  बादशाह अकबर के समय से ही जूतों का काम तेजी पर था। और स्वयं बादशाह आगरा के अच्छे से अच्छे जुते पहनने के शौक़ीन थे।

 

 

एक बार अकबर ( Akbar )  ने बहुत खोजबीन कके बाद अपने लिए बहुत महंगे जूते मंगाए। उसी दिन महाराज के  दरबार में जूतों की ही बातें चल रही थी।  जिसको देखो वही अकबर के जूतों की तारीफ कर रहा था।

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हिंदी की मजेदार कहानी 

 

 

 

 

कुछ समय के बाद बीरबल दरबार में आये। लोंगो ने बीरबल ( Birbal ) को महाराज अकबर ( Akbar ) के जूतों के बारे में बताया। जूते को देखकर बीरबल ने अकबर से उनकी कीमत पूछी, ” हुजूर ! यह जुते कितने का है ? ”

 

 

 

 

बादशाह ने कहा, ”  पुरे दो सौ रुपये के। ”

 

 

 

” एक जूता कितने का है ? ” बीरबल ने पूछा ? बादशाह ने तुरंत कहा सौ रुपये। तभी राजा का ध्यान अपने उत्तर पर गया तो वह थोड़ा सरमा से गए। राजा को देख दरबारी चकित रह गए। बीरबल का सवाल ही ऐसा था।

Funny Indian Short Stories in Hindi 

2- ” अरे सिंह साहब, यह चोट – वोट कैसे लग गयी ? क्या हो गया ? ” वर्मा साहब से कहा।

 

 

” अरे वर्मा साहब, होनी को कौन टाल सकता है ? जो होना है हो ही जाता है। ” सिंह साहब ने कहा।

 

 

” अरे फिर भी, क्या हुआ? बताइये तो। ” वर्मा साहेब ने कहा।

 

 

” यह सब चना खाने का नतीजा है।  ” सिंह साहब से एकदम फटाक से कह दिया।

 

 

” चना खाने का? अरे खुल थोड़ा बताइये।  चना खाने से भला चोट कैसे लग सकती है ? ” वर्मा साहेब ने कहा।

 

 

” अरे यार मेरी किस्मत ही खराब हो गयी थी, जो रामबिहारी की बच्ची के पास चना खाने चला गया।  ” सिंह साहेब ने कहा।

 

 

” अच्छा, रामबिहारी की बेटी इतनी बड़ी हो गयी कि खुद काम – धंधा संभाल सके ? वर्मा जी ने आश्चर्य से कहा।

 

 

” अरे कमाल करते हो वर्मा जी, अभी तो वह छोटी है।  उसके खेलने – कूदने के दिन है।  वह कैसे काम – धंधा कर सकती है भला ? ” सिंह साहेब ने कहा।

 

 

” अरे तो सिंह साहेब यह हुआ कैसे ? वर्मा ने जी ने कहा।

 

 

” अरे हुआ यूँ कि मैं गया था चना लेने…..मसाला चना।  रामखिलावन के दुकान पर।  वहीँ पर रामबिहारी भी चना लेने आया था।  मैं चना लेने में व्यस्त हो गया।  तभी रामबिहारी की बेटी ने बिरुआ के शर्ट में चटनी लगा दी।  ” यह कहकर वे थोड़े चुप हो गए।

 

 

” बिरुआ ? वह बदमाश। ” वर्मा जी ने आश्चर्य से कहा।
” हाँ, वही बदमाश बिरुआ।  मैंने उसका ध्यान नहीं दिया।  वह मेरे बगल में ही खड़ा था।  एक तो उसकी पहले से ही मुझसे खुन्नस थी और उसने सीधा आरोप मुझपर लगा दिया कि वह चटनी मैंने लगाईं। मैंने बार – बार मना किया, लेकिन वह मानने को तैयार ही नहीं हुआ और बस फिर क्या था, उसने मेरा यह हाल कर दिया।  अब तो आपको संतोष  हुआ ? ” सिंह साहब ने चिढ कर कहा।
” अरे मैं तो बस आपसे पूछ रहा था।  मेरी सहानुभूति है आपसे।  ” यह कहकर वर्मा जी वहाँ से निकल लिए और यह घटना पुरे गाँव में फैला दी।

जिसकी लाठी उसकी भैस हिंदी फनी स्टोरी 

३-  एक ब्राह्मण को यजमानी से एक भैस मिली।  वह उसे लेकर घर की तरफ रवाना हुआ।  एकदम सुनसान रास्ते में पैदल ही चला जा रहा था।
बीच रास्ते में उसे एक चोर मिला।  उसके हाथ में एक मोटा डंडा था और शरीर से भी वह मोटा – तगड़ा था।  उसने ब्राह्मण को देखते ही कहा, ” क्यों महाराज, खूब दक्षिणा मिली है, लेकिन यह भैस तो अब मैं ही ले जाऊंगा।  “
ब्राह्मण ने तुरंत ही कहा, ” क्यों भाई ? यह दक्षिणा मैंने पाई है तो तुम्हे क्यों दूँ ,”

चोर बोला, ” पंडित जी, चुपचाप भैंस दे दीजिये, वरना यह लाठी और आपका सिर एक होगा। ”

 अब तो ब्राह्मण का गला सूख गया।  हालांकि पंडित जी भी कुछ कम नहीं थे, लेकिन वह खाली हाथ तो कुछ नहीं कर सकते थे।  तब उन्होंने अपना दिमाग लगाया और कहा, ” ठीक है भाई, भैंस ले लो, पर सोचो ब्राह्मण की चीज ऐसे छीन लोगे तो तुम्हे पाप लगेगा। अगर आप कुछ देकर देकर भैंस लेते हो तो तुम्हे पाप नहीं लगेगा। “
चोर ने कहा, ” मेरे पास तो देने के लिए  कुछ है ही नहीं।  ” इसपर ब्राह्मण ने कहा, ” अरे कैसी बात करते हो, कुछ न सही तो यह लाठी लेकर भैस ले लो।  तुम्हे पाप नहीं लगेगा। “

चोर बड़ा खुश हुआ और उसने ब्राह्मण को लाठी दे दी और भैंस को पकड़ लिया। जैसे ही ब्राह्मण के हाथ में लाठी आयी उसने तुरंत ही चोर का Dialog दुहरा दिया, ” चुपचाप भैंस दे दीजिये, वरना यह लाठी और आपका सिर एक होगा। ”

 

 

 

चोर ने बोला, ” ऐसा क्यों ? ”

ब्राह्मण ने तुरंत ही कहा, ” जिसकी लाठी उसकी भैस।  ” चोर को उसकी गलती का एहसास हो गया।  उसने भैंस वहीँ छोड़ दी और तुरंत वहाँ से निकल लिया।

Best Funny Short Stories in Hindi ( घोटाला हिंदी मजेदार कहानी ) 

4 – मेरा नाम विकास है। सदा की तरह श्रीमती जी ने चाय का कप और अखबार एक साथ थमाया और फिर पास आकर बैठ गईं।

 

 

 

चाय को मेज पर रखकर मैंने अखबार खोला। मुख्यपृष्ठ की खबर पढ़ते ही मन खराब हो गया।  पत्नी ने सशंकित स्वर से पूछा, ” क्या हो गया ? तबियत तो ठीक है न ? “

 

 

 

 

मैंने उस सचित्र समाचार की तरफ संकेत किया, लेकिन श्रीमती जी उस खबर की तरफ ध्यान ना देकर उस पर छापे चित्र को घुरा और बोली, ” हाय…क्या Personality है ? कैसा मुस्करा रहा है ? लेकिन इसे देख आप उदास क्यों हुए ?’’

 

 

 

मैंने गुस्से से कहा, ” अरे श्रीमती जी, इस मुस्कुराते हुए प्राणी पर अरबों रुपये के घोटाले का आरोप है।  ”

 

 

 

” तो क्या हो गया ?  वह रुपये आपके तो हैं नहीं न।  इतना उदास तो आप दंगों और दुर्घटनाओं की रिपोर्ट पढ़कर भी नहीं होते।  फिर इसमें ऐसा क्या हो गया ? ” श्रीमती जी ने बड़ी ही बेफिक्री से कहा।

 

 

 

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” मैडम जी।  मीडिया घोटालेबाजो को बड़ा उछाल रहा है। शेष समाचार इसके नीचे ही होते हैं।  छोटे से छोटा घोटाला भी आजकल सुर्खियां बन जाती हैं। इतना बड़ा – चढ़ाकर दिखाया जाता है या लिखा जाता है कि कहो मत। नैतिक समाचारों को नीचे और अनैतिक समाचारों को ऊपर छापते हैं।  सोच रहा हूँ कि मैं भी एक घोटाला कर दूँ।  इसी बहाने मुझे भी प्रसिद्धि मिल जाएगी। ” मैंने गुस्से से कहा।

 

 

 

 

” अरे कैसी बाते कर रहे हो ? नौकरीपेशा होकर ऐसी बाते ? ऐसा सोचना भी पाप है।  आप फंस गए तो हमारा क्या होगा ? ज़रा इसके बारे में भी सोचिये।  ” श्रीमती जी ने परेशान होकर कहा।

 

 

 

 

” अरे झूठे ही चिंता कर रही हो।  हमारे कानून में बच निकलने की बहुत सी गलियां हैं।  बस पूछताछ और गिरफ्तारी जैसी कुछ प्रक्रियायों से गुजरना होगा, तभी तो घोटालेबाजो का कुछ नहीं हो पाता है। प्रसिद्धि पाने का इससे बढ़िया और कोई उपाय नहीं है। एक घोटाला कर दो और फिर मिडिया इसे एकदम सनसनीखेज सुखियाँ बना देंगी और हो सकता है कोई अखबार सम्पादकीय भी लिख दे।  ” विकास ने कहा।

 

 

 

 

इससे पहले पत्नी कुछ कहती, मेरे परम मित्र लवकेश मित्रा घर आ गए।  मैं खुशीपूर्वक उनसे कहा, ” आओ भाई, बड़े मौके ओर तशरीफ़ लाये हो। ”

 

 

 

 

” अरे वाह, भाभी जी बड़ी गहन चर्चा हो रही है।  मैं दो मिनट से खड़ा हूँ और आपको मेरे आने तक का कोई आभास नहीं हुआ।  ” लवकेश ने तंज कसा।

 

 

 

 

इसपर विकास ने अखबार लवकेश की तरफ ठेलते हुए कहा, ” लवकेश भाई, कई दिनों से मेरे दिमाग में एक कीड़ा कुलबुला रहा है, क्यों ना घोटालों के इस दौर में मैं भी एक घोटाला कर दूँ ? ”

 

 

 

लवकेश ने एक उड़ाती निगाह अखबार पर डाली और बोले, ” इसके बारे में तो कल इलेक्ट्रानिक मीडिया बड़े ही विस्तार से खबर दिखा चुका है। चलो अच्छा हुआ कि तुमने पहली बार अक्लमंदी दिखाई है।  मैं तो कहते – कहते थक गया हूँ कि अगर नाम कमाना है तो यह लेखन छोडो और अपनी प्रतिभा दूसरे दिशा में लगाओ। लेखन से क्या होगा ? कुछ गिने – चुने लोग ही पढ़ेंगे।  कुछ एक – दो घोटाला कर दो, मीडिया तुम्हारे पीछे पड़ जायेगी और एक झटके में फेमस हो जाओगे। हर कोई तुम्हे जान जाएगा। ”

 

 

 

” यह हुई ना बात।  दोस्त हो तो ऐसा।  ” विकास ने खुशी से कहा।  तभी श्रीमती जी बिदककर बोली, ” अरे फेमस तो हो जाओगे, लेकिन नुक्सान किसका होगा, देश का न।  क्या यह अच्छा लगेगा और जब हर कोई प्रसिद्धि पाने के लिए तुम्हारे जैसा ही सोचने लगे और कुछ ना कुछ गलत काम करेंगे तो देश का क्या होगा ? क्या कानून तोड़ना अच्छी बात है ? और सबसे बड़ी बात तो भी गलत काम करता है उसे सजा जरूर मिलती हैं।  कानून के हाथ बहुत लम्बे होते हैं।  ”

 

 

 

 

” सही बात है।  हम ही गलत सोच रहे थे।  ऐसा नहीं करना चाहिए।  अब तो ऐसा करना तो दूर हम ऐसा सोचेंगे भी नहीं और लोगों को भी ऐसा नहीं करने और ऐसा ना सोचने तक के लिए प्रेरित भी करेंगे।  ” विकास ने कहा और लवकेश ने इसका समर्थन किया।

 

 

 

 

 

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