Top 4 + Cow Story in Hindi Language / गाय और बाघ की हिंदी कहानी

Top 4 + Cow Story in Hindi Language / गाय और बाघ की हिंदी कहानी

मित्रों इस पोस्ट में Cow Story in Hindi Written दी गयी है।  यह Cow Story in Hindi Writing बहुत ही बढियाँ हिंदी कहानी है।

 

 

 

Cow And Tiger Story in Hindi ( गाय और बाघ की हिंदी कहानी )

 

 

 

 

 

 

1- एक किसान के पास कई गौए थी। उसमे एक गाय का नाम गौरी था। गौरी नाम की गाय ने एक सुंदर बछड़े को जन्म दिया था और हमेशा अपने बच्चे के बारे में ही सोचती रहती थी क्योंकि उसका बच्चा अभी बहुत ही छोटा था।

 

 

 

 

वह चारा नहीं खा सकता था और अपनी माँ के दूध पर निर्भर रहता था। एक दिन किसान अपनी गउओ को जंगल में घास खाने के लिए छोड़ दिया।

 

 

 

 

उन सबके साथ गौरी नामक गाय भी थी। सभी गउए हरी-हरी घास खाकर अपनी भूख शांत कर रही थी। लेकिन गौरी नामक गाय अपने बच्चे के बारे में ही सोच रही थी।

 

 

 

 

तभी जंगल में एक बाघ की भयंकर गर्जना सुनाई पड़ी। सभी गाए घर की तरफ भाग गई। लेकिन गौरी अपने बच्चे के विचार में लीन थी इसलिए उसने बाघ की गर्जना पर ध्यान नहीं दिया।

 

 

 

 

तभी बाघ गौरी नामक गाय को देखकर बहुत खुश हुआ और कहने लगा, “आज तो बहुत सुंदर भोजन मिला है। मैं इस गाय को अवश्य ही अपना भोजन बनाऊंगा।”

 

 

 

 

वह दहाड़ते हुए गौरी नामक गाय के पास आया। तब गौरी नामक गाय की तंद्रा भंग हो गई। बाघ बोला, “अब मैं तुम्हे अवश्य ही खाऊंगा।”

 

 

 

 

गौरी नामक गाय बोली, “हे बाघ महाराज मैंने एक बच्चे को जन्म दिया है। वह छोटा होने के कारण हमारे दूध के ऊपर ही निर्भर रहता है। आप हमे जाने दे, मैं अपने बच्चे को दूध पिलाकर आऊंगी तब आप हमे अपना भोजन अवश्य बना लेना।”

 

 

 

 

 

बाघ बोला, “कोई मुर्ख ही अपने हाथ आए छोड़ता है क्या तुम मुझे मुर्ख समझती हो ?”

 

 

 

गौरी नामक गाय बोली, “नहीं महाराज, मैं आपको मुर्ख कैसे समझ सकती हूँ। मैं तो आपको विश्वास दिला रही थी, आप हमारा विश्वास करिए।”

 

 

 

 

बाघ सोचने लगा चलो एक बार विश्वास करके देखता हूँ। बाघ बोला, “ठीक है। तुम अपने बच्चे को दूध पिलाकर आओ। अगर तुम हमारे पास नहीं आई तब मैं आकर तुम्हारे बच्चे को और तुम्हे भी खा जाऊंगा।”

 

 

 

 

अब गौरी नामक गाय दौड़ती हुई चली गई। उधर गौरी नामक गाय का बच्चा सभी गउओ को आया हुआ देखकर उनसे पूछने लगा, “मौसी हमारी माँ कहां रह गई वह क्यों नहीं आई। हमे भूख लगी है। हमे दूध कौन पिलाएगा ?”

 

 

 

 

सभी गउए उदास होकर बोली, “अब तुम्हारी माँ कभी नहीं आएगी। उसे बाघ खा गया है।”

 

 

 

 

गउओ की बात सुनकर गौरी का बच्चा बहुत उदास हो गया था। तभी उसके कान में घंटी की आवाज सुनाई पड़ी जो गौरी के आने की सूचना थी।

 

 

 

 

तभी गौरी ने आकर अपने बच्चे को दूध पिलाया और अन्य गउओ को आप बीती बताई और बोली, “उसे बाघ के पास जाकर अपना वचन निभाना होगा। आप लोग हमारे बच्चे का ध्यान रखना।”

 

 

 

 

गौरी नामक गाय रोते हुए अपने बच्चे को दूध पिला रही थी। सोच रही थी आज उसका बच्चा आखिरी बार उसका दूध पी रहा है। फिर वह सदा के लिए अपने बच्चे से बिछड़ जाएगी।

 

 

 

 

वह अपने बच्चे से कह रही थी, “बेटा हमेशा अपनी सभी मौसी की बात मानना और उन लोगो के कहे अनुसार ही रहना।”

 

 

 

 

इतना कहकर गौरी नामक गाय जंगल की तरफ जाने लगी। उधर बाघ सोच रहा था। मैंने अपने भोजन को छोड़कर बहुत बड़ी भूल कर दिया। लोग हमे तो बहुत बड़ा मुर्ख कहेंगे।

 

 

 

 

तभी बाघ के कान में घंटी की आवाज सुनाई दी जो गौरी नामक गाय के आने की सूचना थी। थोड़ी देर में गौरी नामक गाय बाघ के सामने खड़ी थी।

 

 

 

 

गौरी बोली, “बाघ महाराज, मैं अपने वचन के अनुसार आपके पास आ गई हूँ। अब आप मुझे अपना भोजन बना सकते है।”

 

 

 

 

गाय की अपनी वचन बद्धता पर बाघ हैरान रह गया था। वह सोचने लगा अभी भी ऐसे जीव है जो अपनी कही हुई बातो को अपने प्राणो से भी ऊपर रखते है।

 

 

 

 

बाघ बोला, “गौरी मैं तुम्हे नहीं खाऊंगा। तुमने अपनी वचन पूर्ति कर हमे अच्छी राह पर चलना सीखा दिया। अब मैं यह जंगल छोड़कर जा रहा हूँ।”

 

 

 

 

बाघ जंगल छोड़कर चला गया। गौरी नामक गाय अपने बच्चे के पास लौट गई। उसने अपनी साथी गउओ को पूरी बात बता दिया। सभी गउए खुश हो गई।

 

 

 

जादुई गाय की कहानी ( Magical Cow Story in HIndi ) 

 

 

Cow Story in Hindi

 

 

2- भोला नाम का एक नौजवान था। वह काम की तलाश में एक धनी सेठ के पास गया। सेठ ने उसे कुछ पैसे देकर अपनी जान छुड़ानी चाही तो भोला ने कहा, “सेठ जी हमे पैसे नहीं चाहिए। हमे काम चाहिए फिर उसके बदले ही मुझे पैसे देना।”

 

 

 

 

सेठ ने कहा, “ठीक है। हमारे घर के बाहर एक पेड़ है तुम्हे उसके नीचे सोना पड़ेगा।”

 

 

 

 

भोला तैयार हो गया। वह रात में पेड़ के नीचे जाकर सोने लगा। भोला की एक अच्छी आदत थी। वह रोज ही सोने के पहले हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य ही करता था।

 

 

 

 

इसलिए भोला ने हनुमान चालीसा पढ़ना शुरू कर दिया। तभी पेड़ के ऊपर रहने वाला प्रेत भोला के सामने आकर बोला, “तुम्हारे द्वारा हनुमान चालीसा पढ़ने से मुझे परेशानी हो रही है। मैं तुम्हे एक जादुई गाय दे रहा हूँ, वह तुम्हारे काम आएगी।”

 

 

 

 

इतना कहकर वह प्रेत दूसरी जगह चला गया। भोला वह गाय लेकर हनुमान मंदिर में गया। गाय बाहर ही खड़ी थी। भोला जब हनुमान जी के दर्शन करके लौटा तो उस गाय के पीठ पर हाथ फेरने लगा।

 

 

 

 

अब गाय के पेट से स्वर्ण के सिक्को की बरसात होने लगी। भोला उन सिक्को को बाजार में बेच दिया और बहुत ही धनवान व्यक्ति बन गया। भोला अब जरूरत पड़ने पर अन्य लोगो की सहायता भी करता था।

 

 

 

गाय और शेर की कहानी ( Cow And Lion Story in Hindi )

 

 

 

3- एक जंगल में चार गाए आपस में मिल जुल कर रहती थी और सभी कठनाईयो का एक साथ ही सामना करती थी। यहां तक कि शेर भी उन चारो गाय के सामने जाने से डरता था और शेर कई बार अपने प्रयास में विफल भी हो गया था।

 

 

 

 

वह समय का इंतजार कर रहा था। एक दिन चारा खाने को लेकर सभी चार गाय में अनबन हो गई और चारो गाए अलग-अलग होकर चारा खाने लगी।

 

 

 

 

शेर तो जैसे इसी मौके की तलाश में था। उसने अलग-अलग चारो गाय पर हमला कर दिया और उन्हें अपना भोजन बनाकर अपने अपमान का बदला ले लिया था।

 

 

 

 

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