Cinderella Story in Hindi Fairy Tales / सिंडरेल्ला की कहानी हिंदी में।

Cinderella Story in Hindi Fairy Tales / सिंडरेल्ला की कहानी हिंदी में।

Cinderella Story in Hindi मित्रों इस पोस्ट में सिंडरेल्ला की कहानी ( Written Story Of Cinderella in Hindi ) दी गयी है। यह बहुत ही मोरल कहानी ( Cinderella Story in Hindi With Moral )  है .

 

 

 

Cinderella Story in Hindi To Read ( सिंडरेल्ला की कहानी ) 

 

 

 

 

 

प्रभास अपनी औरत विभा व अपनी पुत्री रानी के साथ सुखपूर्वक जीवन बिता रहा था। लेकिन भगवान को भी प्रभास की ख़ुशी देखी नहीं गई।

 

 

 

विभा की तबीयत अचानक खराब हुई और वह भगवान के पास चली गई। प्रभास ने दूसरा विवाह कर लिया। उसकी दूसरी औरत से उसे दो पुत्री प्राप्त हुई।

 

 

 

 

प्रभास की दूसरी औरत अपनी दोनों पुत्री पर अधिक ध्यान देती थी और रानी के ऊपर हर तरह से जुल्म करती थी। एक दिन राजा के लड़के का जन्मदिन था और राजा ने सभी लोगो को निमंत्रण भिजवा रखा था।

 

 

 

 

उसमे सभी लड़कियों को भी आमंत्रित किया गया था क्योंकि जो भी लड़की अधिक सुंदर रहेगी राजकुमार उसे अपना जीवन साथी बना सकता था।

 

 

 

 

प्रभास की दूसरी औरत रानी से हमेशा मजदूरों के जैसा व्यवहार करती थी और घर का सारा काम करवाती थी। प्रभास की दूसरी औरत ने अपनी दोनों पुत्री को खूब सजा संवार कर राजा के लड़के के जन्मदिन पर भेज दिया।

 

 

 

 

यह देखकर रानी उदास हो गई। वह सोचने लगी काश हमारी माँ अगर जीवित होती तब हमें यह दिन नहीं देखना पड़ता। यह सोचते ही रानी को रुलाई आ गई।

 

 

 

लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था। उसी समय एक प्रकाश पुंज रानी के सामने आया और एक औरत के रूप में बदल गया। वह एक परीलोक की परी थी।

 

 

 

 

शायद रानी की माँ को ही भगवान ने परी के रूप में भेज दिया था। परी ने आते ही रानी को समझाया, मैं सब जानती हूँ मैं तुम्हारी सहायता करुँगी।

 

 

 

 

परी ने अपना जादुई छड़ी घुमाया तो देखते ही देखते रानी एक खूबसूरत लड़की बन गई। परी ने एक कद्दू को छड़ी से छुआ तो वह एक घोड़ा गाड़ी में बदल गया। उसमे एक कोचवान भी था।

 

 

 

 

परी ने रानी से कहा, “अब तुम राजकुमार के जन्मदिन की पार्टी में जाओ। वहां तुमसे सुंदर कोई भी नहीं होगा। ध्यान रहे रात के 12 बजने से पहले ही तुम अपने घर लौट आना क्योंकि 12 बजे के बाद जादू का असर खत्म हो जाएगा।”

 

 

 

 

रानी घोड़ा गाड़ी में बैठकर राजकुमार के घर आ गई, वहां उससे सुंदर कोई नहीं था। सभी की निगाहे रानी के ऊपर टिक गई थी।

 

 

 

 

उसकी दोनों सौतेली बहन भी वहां थी। लेकिन उन सभी ने रानी को नहीं पहचान पाया। राजकुमार का जन्मोत्सव बहुत ही धूम धाम से मनाया जा रहा था।

 

 

 

 

राजकुमार रानी के साथ ही था। सहसा रानी को परी की बात याद आई और उसने घड़ी की तरफ देखा तो 5 मिनट कम थे 12 बजने में।

 

 

 

 

वह तुरंत पार्टी बीच में ही छोड़कर भागी, राजकुमार भी रानी के पीछे भागा। लेकिन रानी का एक चप्पल राजकुमार के दरवाजे पर ही निकल गया था। रानी किसी तरह घर आ गई।

 

 

 

 

अब राजकुमार ने अपने सिपाहियों को वह चप्पल दिखाते हुए आदेश दिया कि पूरे राज्य में सभी लड़कियों को यह चप्पल पहनाकर पता लगाओ।

 

 

 

 

जिस लड़की के पैर में यह चप्पल आ जाएगा उसी के साथ मैं शादी करूँगा। सिपाहियों ने पूरे राज्य की लड़कियों के पैर में वह चप्पल पहनाया लेकिन किसी के पैर में वह चप्पल फिट नहीं बैठा।

 

 

 

 

अब केवल प्रभास का ही घर बाकी था। सिपाही उसके घर गए। प्रभास की दूसरी औरत बहुत खुश थी, शायद उसकी दोनों लड़की में से किसी के पैर में वह चप्पल फिट हो जाए तो उसकी किस्मत बदल जाएगी।

 

 

 

 

लेकिन प्रकृति का लिखा हुआ कभी नहीं मिटता है क्या ? रानी की दोनों सौतेली बहनो के पैर में वह चप्पल फिट ही नहीं हुआ। अब रानी ने कहा, “सिपाही क्या हमे मौका देंगे चप्पल मापने के लिए ?”

 

 

 

 

सिपाही कुछ बोल पाते उसके पहले ही रानी की सौतेली माँ बोल उठी, “भाग यहां से बड़ी आई चप्पल मापने। पूरे राज्य में किसी के पैर में फिट नहीं बैठा तब तेरे पैर में कहां से फिट बैठेगा।”

 

 

 

एक सिपाही बोल उठा, “ए बुढ़िया तू चुप रह। अगर यह बात राजकुमार को मालूम हुई तो वह तेरा क्या हाल करेंगे तू खुद समझती है।”

 

 

 

रानी की सौतेली माँ एक तरफ हट गई। अब रानी अपने पैर में चप्पल पहना तो उसे एकदम फिट हो गया। यह बात पूरे राज्य में आग की तरह फ़ैल गई।

 

 

 

 

अब राजकुमार स्वयं घोड़ा गाड़ी लेकर आया और रानी को लेकर चला गया और उसके साथ विवाह संपन्न हुआ। रानी ने अपनी सौतेली माँ और दोनों बहनो को क्षमा कर दिया।

 

 

 लाल परी की कहानी 

 

 

Cinderella Story in Hindi

 

 

 

 

2- Cinderella Story Hindi – एक बार धरती पर अकाल पड़ गया। सभी आदमी और पशु पक्षी भूख से और प्यास से मरने लगे। एक बार मंगल ग्रह की लाल परी धरती पर घूमने के लिए आई थी।

 

 

 

उसने यहां पर सभी को परेशान देखा तो सभी आदमियों से पूछा, “ऐसा क्यों हो गया। यह सब किसने किया है ?”

 

 

 

 

प्रभा नाम की एक लड़की बोली, “एक बार परीलोक की रानी यहां आई, यहां सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था। उसने सभी से कहा कि यह सब हमारा दिया हुआ है। तुम सब लोग हमारी पूजा करो नहीं तो मैं सब कुछ यहां से उठा ले जाऊंगी।”

 

 

 

 

प्रभा ने फिर कहना शुरू किया, “हम लोग सिर्फ भगवान को मानते है और उनके सिवाय किसी की पूजा नहीं कर सकते। हां एक बात और है हम सबको ही सम्मान देते है हमने परीलोक की रानी का भी सम्मान किया था। लेकिन वह खुद को भगवान मानने के लिए विवश कर रही थी और अपनी पूजा करने के लिए कह रही थी। हम लोगो के मना करने पर उसने हमे दण्ड देने के लिए ही यहां की सभी वस्तुए अपने साथ उठा ले गई।”

 

 

 

 

 

 

यह सब बात सुनकर मंगल ग्रह की परी क्रोध से तमतमा उठी और बोली, “भगवान की बनाई हुई वस्तु को छीनने का अधिकार किसी को नहीं है। चाहे वह परीलोक की रानी ही क्यों न हो। हमसे तुम लोगो का यह हाल सहन नहीं हो रहा है। मैं तुम लोगो के दुःख से बहुत ही परेशान हूँ। मैं अभी परीलोक जाकर परियो की रानी को दण्ड दूंगी और तुम सभी का दुःख अवश्य ही दूर होगा।”

 

 

 

 

 

 

मंगल ग्रह की वह लाल परी उड़ते हुए परीलोक में चली गई। वहां जाकर लाल परी ने परीलोक की रानी को बहुत ही समझाया कि भगवान द्वारा दिया हुआ कोई भी उपहार आदमियों से नहीं छीनना चाहिए।

 

 

 

 

लेकिन परीलोक की रानी ने क्रोध में आकर लाल परी से कहा, “तुम यहां आकर हमे सिखाओ मत। अपनी भलाई चाहती हो तो यहां से चली जाओ अन्यथा मैं तुम्हे यहां आने का दुस्साहस करने के लिए अवश्य ही दण्ड दूंगी।”

 

 

 

 

लाल परी ने कहा, “मैं तुम्हे यहां समझाने के लिए आई हूँ। लेकिन अब तुम समझाने के काबिल नहीं हो इसलिए अब मैं तुम्हे ही दण्डित करुँगी।”

 

 

 

 

इतना कहकर लाल परी ने अपनी जादुई शक्तियों से परीलोक की रानी का दोनों हाथ गायब कर दिया। यह देखकर सभी परियो ने लाल परी से क्षमा मांग लिया।

 

 

 

 

परियो की रानी ने भी अपनी जादू की शक्ति का इस्तेमाल किया। लेकिन लाल परी पर उसके जादू का कोई प्रभाव नहीं हुआ। अब लाल परी ने भी अपने जादू की शक्ति से परियो की रानी का दोनों पैर भी गायब कर दिया।

 

 

 

 

अब परियो की रानी का बुरा हाल था। वह बिना हाथ पैर के बीच में ही लटक रही थी। लाचार होकर उसने भी लाल परी से क्षमा याचना करने लगी।

 

 

 

 

लाल परी दयालू थी। उसने कहा, “तुम धरती वालो को परेशान नहीं करने का वचन दो तभी मैं तुम्हे क्षमा करुँगी अन्यथा तुम इसी हाल में ही रहोगी।”

 

 

 

 

 

परीलोक की रानी ने कोई समाधान न देखकर धरती वालो को परेशान नहीं करने का वचन दिया। तब लाल परी ने उसके हाथ और पैर पहले की अवस्था में कर दिए और उसे फिर से योग्य अवस्था में कर दिया।

 

 

 

 

अब परियो की रानी को साथ लेकर लाल परी धरती पर आई। परीलोक की रानी ने लाल परी के समक्ष ही धरती पर सब वस्तुओ को यथा योग्य कर दिया और धरती वासियो से फिर कभी भी परेशान नहीं करने की शपथ ले ली और परीलोक चली गई।

 

 

 

 

अब धरती के लोगो से लाल परी यह कहते हुए विदा लिया कि मैं हर संकट में तुम्हारी सहायता के लिए तैयार रहूंगी और वह मंगल ग्रह में चली गई।

 

 

 

 

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