Birbal Ki Khichdi in Hindi

Birbal Ki Khichdi in Hindi / बीरबल की खिचड़ी हिंदी में में पढ़ें

Birbal Ki Khichdi in Hindi मित्रों इस पोस्ट में बीरबल की खिचड़ी की कहानी दी गयी है।  यह बहुत ही मजेदार और शिक्षाप्रद कहानी है।  आप इसे जरूर पढ़ें।

 

 

 

 

एक बार बादशाह ने बीरबल से कहा, “तुम ऐसा आदमी ला सकते हो, जो यमुना के ठंडे पानी में सारी रात गुजार सके। सारी रात गुजारने वाले को मैं 100 सोने के सिक्के दूंगा।” बीरबल ने कहा, “ठीक है जहांपनाह,मैं ऐसे आदमी को लेकर आऊंगा।”

 

 

 

 

दूसरे दिन बीरबल एक गरीब युवक को लेकर दरबार में हाजिर हुआ। बादशाह ने उसे अपना फरमान सुना दिया और बोला, “सोच लो  पूरी रात यमुना के ठंडे पानी में रहना पड़ेगा फिर सही साबित होने पर तुम्हे 100 सोने के सिक्के दिए जायेंगे।”

 

 

 

 

 

युवक अपनी गरीबी से परेशान था, इसलिए उसने हामी भर ली। सिपाहियों की देख-रेख में वह युवक सारी रात यमुना के ठंडे पानी में गुजार दिया।

 

 

 

सुबह उस युवक को दरबार में लाया गया। सिपाहियों के कहने पर भी अकबर को विश्वास नहीं था कि यह युवक पानी में सारी रात रह सकता है। उसने उस युवक से सारी बात जानने का फैसला किया।

 

 

 

 

युवक ने कहा, “हुजूर, आपके महल के ऊपर जो दीपक जल रहा था। उसी के सहारे मैंने सारी रात पानी में बिता दिया।” अकबर ने कहा, “अब समझ में आया कि तुम उस दीपक की गर्मी से ही ठंडे पानी में रहने में कामयाब हो गए।” इस कारण राजा ने उसे सिक्का नहीं दिया। वह युवक निराश होकर चला गया।

 

 

 

 

यह बात बीरबल ( Birbal ) को मालूम हुई तो उन्होंने उस युवक की सहायता करने की सोची। एक दिन सभी दरबारी आ चुके थे, लेकिन बीरबल का पता नहीं था। अकबर ( Akbar )  बादशाह बड़े ही बेचैन थे क्योंकि उन्हें बीरबल की जरूरत महसूस हो रही थी। अकबर ने आदेश दिया, “जाओ बीरबल का पता लगाओ कहां है ?”

 

 

 

 

 

सबके सब बारी-बारी से बीरबल के पास गए तो देखा बीरबल एक पेड़ के ऊपर मिट्टी की हंडिया बांधकर लटकाये हुए है और नीचे से आग जला रहे थे।

 

 

 

 

सभी ने एक स्वर में कहा, “राजा बीरबल आपको बादशाह अकबर याद कर रहे है।” बीरबल ने सभी लोगों से कहा, “जाकर बादशाह से कह दो बीरबल खिचड़ी पका रहे है। उसे खाने के बाद ही दरबार में आएंगे।”

 

 

 

 

 

सब लोगों ने जाकर बादशाह से बीरबल की कारस्तानी कह सुनाई। अकबर ने कहा, “अब हमें ही जाकर देखना होगा।” अकबर एक सिपाही को अपने साथ लेकर बीरबल के पास गया। जाकर देखा तो पेड़ पर एक हांडी टंगी थी और बीरबल नीचे से आग जला रहे थे।

 

 

 

 

यह देखकर बादशाह का पारा गरम हो गया और बोला, “बीरबल क्या बेवकूफों जैसी हरकत कर रहे हो, तुम्हारी यह खिचड़ी कभी नहीं पकेगी।” बीरबल ने कहा, “हुजूर, हमारी यह खिचड़ी अवश्य ही पकेगी क्योंकि जब आपके महल की रोशनी देखकर उसकी गर्मी से युवक रात भर यमुना के ठंडे पानी में रह सकता है तो उससे इस खिचड़ी की दूरी बहुत ही कम है और यह अवश्य ही पक जाएगी।

 

 

 

 

यह सुनकर बादशाह को अपने गलती का एहसास हो चुका था। उसने उस गरीब युवक को बुलाकर 100 सोने के सिक्के दिए। बीरबल की चतुराई से युवक को न्याय मिल गया।

 

 

 

 

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