Sunday, 09 August, 2020

11 Best Akbar Birbal Story in Hindi / 11 अकबर बीरबल की हिंदी कहानियां


Best Akbar Birbal Story in Hindi

Best Akbar Birbal Story in Hindi मित्रों इस पोस्ट में Best Akbar Birbal Story in Hindi With Moral  की हिंदी की मजेदार कहानी दी गयी है।  आप इसे जरूर पढ़ें। 

 

 

 

 

 Best Akbar Birbal Story in Hindi ( अकबर बीरबल की कहानियां ) 

 

 

 

 

 

एक बार की बात है। बादशाह अकबर सुबह सोकर उठे, उन्हें बहुत तेज प्यास लगी थी। उन्होंने कई बार “पानी दो-पानी दो” की आवाज लगाई लेकिन कोई जवाब नहीं आया। उन्होंने देखा कि अगल-बगल कोई सेवक नहीं था। इसपर अकबर ( Akbar ) ने थोड़ी ऊँची आवाज में पानी मांगा।

 

 

 

 

 

इसबार एक साधारण सेवक ने उनकी आवाज सुन ली और तुरंत पानी लेकर पहुंचा। अकबर को बहुत तेज प्यास लगी थी।  उन्होंने तुरंत ही पानी पी लिया। इतने में अकबर के शाही सेवक आ गए और उन्होंने उस साधारण सेवक को वहां से हटा दिया।

 

 

 

 

अकबर बीरबल की हिंदी कहानियां 

 

 

 

 

अचानक दोपहर तक बादशाह अकबर की तबीयत खराब हो गयी। कई औषधियों के खाने और राज्य वैद्य द्वारा दी गयी औषधि पर भी उन्हें आराम नहीं हो रहा था। उन्हें तेज बुखार हो गया था।

 

 

 

 

 

यह बात धीरे-धीरे पूरे राजदरबार में फ़ैल गयी और यह सुनकर राज्य ज्योतिषी भी भागे-भागे अकबर के पास आये। उन्होंने अकबर का निरीक्षण किया और उसके बाद बोले, “आप पर किसी मनहूस आदमी का साया है। आपने सुबह-सुबह किसका चेहरा देखा था ?”

 

 

 

 

 

यह सुनते ही बादशाह ने सोचा तो उस साधारण सेवक की याद आयी जो पानी लेकर आया था। बादशाह ने उसे फांसी देने का आदेश दे दिया। सैनिकों ने उस बेचारे को कारागृह में डाल दिया और अगले दिन फांसी देने का निश्चय किया।

 

 

 

 

 

जब यह बात बीरबल तक पहुंची तो उन्हें बहुत बुरा लगा। वह तुरंत उस सेवक के पास पहुंचे और उसे हौंसला देते हुए बोले, “तुम चिंता मत करो। तुम्हे कुछ नहीं होगा।”

 

 

 

 

 

उसके बाद बीरबल अकबर के पास पहुंचे और उनका हाल-चाल जाना। उसके बाद अकबर से बोले, “उस बेचारे सेवक की इसमें कोई गलती नहीं है। उसे आप माफ़ कर दें।”

 

 

 

 

 

इसपर अकबर ने गुस्से से कहा, “वह मनहूस है। उसकी शक्ल देखने पर मेरी यह हालत हुई है, इसलिए उसे सजा मिलेगी।”

 

 

 

 

इसपर बीरबल ने कहा, “महाराज, सजा तो सबके लिये बराबर ही होनी चाहिये। उस सेवक ने भी सुबह-सुबह आपका मुंह देखा और बेचारा जेल में बंद है और उसे फांसी होने वाली है। इस हिसाब से तो आप उससे भी बड़े मनहूस हुये।” बादशाह को अपनी गलती का एहसास हो गया और उन्होंने सेवक की सजा माफ़ कर दी।

 

 

 

 Best Akbar Birbal Story in Hindi Short Story ( अकबर बीरबल की कहानी ) 

 

 

 

 

 

2- रहीमुद्दीन शेख नाम का एक व्यापारी था। उसका कपडे का व्यापर था। उसके घर में चार नौकर थे। उसने अपने पैसे को छुपाकर अलमारी में रखा था।

 

 

 

 

 

कुछ दिन बाद जब वह उन पैसों को लेने गया तो पैसे वहां से गायब हो गए थे। उसने जब नौकरों से पूछ – ताछ की तो सबने कहा, ”  हमें नहीं मालूम। ”

 

 

 

 

 

व्यापारी ने इस समस्या का हल निकलवाने के लिए अकबर के दरबार में जाने की सोची। दूसरे दिन वह अकबर के दरबार में पहुंचा। अकबर ने व्यापारी से पूछा, “क्या परेशानी है ?”

 

 

 

 

 

व्यापारी ने कहा, “हुजूर,मेरा नाम रहीमुद्दीन शेख है। मैं कपड़े का व्यापारी हूँ। हुजूर मैं अपने पैसे को आलमारी में छुपाकर रखा था। जब मुझे पैसों की आवश्यकता हुई तो मैं उन पैसों को आलमारी से निकालने के लिए गया। जब मैंने आलमारी खोली तो देखा कि पैसे वहां पर नहीं है।”

 

 

 

 

 

अकबर ( Akbar ) ने कहा, “तुमने किसी से पूछा कि पैसे कहां गए ?”

 

 

 

 

 

व्यापारी ने कहा, “हां हुजूर, मेरे घर में चार नौकर है।  मैंने उन लोगों से पूछा तो उन लोगों ने कहा कि मुझे नहीं मालूम, हुजूर अब मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं क्या करुं ? अब आप ही कोई उपाय निकाले जिससे वह चोर पकड़ा जाय।”

 

 

 

 

 

 

अकबर ने कहा, “ठीक है।  कल उन चारो को दरबार लेकर आओ।” दूसरे दिन उस व्यापारी ने अपने साथ चारो नौकरों को लाया। अकबर ने उन चारो को देखते हुए बीरबल को ओर इशारा किया।

 

 

 

 

 

बीरबल ( Birbal )ने कहा, “जहांपनाह, मैं अपने जादुई छड़ी से उस चोर का पता लगाऊंगा।”

 

 

 

 

अकबर ने बीरबल से पूछा, “जादुई छड़ी ?”

 

 

 

 

बीरबल ने कहा, “हां जहांपनाह, जादुई छड़ी। मैं इन चारो को जादुई छड़ी दूंगा और जिसने पैसों की चोरी की होगी उसकी छड़ी कल सुबह तक 3  इंच बड़ी हो जाएगी।”

 

 

 

 

अकबर ने कहा, “जैसी तुम्हारी इच्छा।” बीरबल ने उन चारो को छड़ी दे दी।

 

 

 

 

 

उन चारो में से एक नौकर ने सोचा, ”  यह जादुई छड़ी सुबह तक 3  इंच बड़ी हो जाएगी और मैं पकड़ा जाऊंगा। अगर मैं इसे पहले ही 3  इंच छोटा कर दूं तो कल सुबह तक यह छड़ी सबके बराबर हो जाएगी और मैं पकड़ा भी नहीं जाऊंगा। ” यह सोचकर उसने छड़ी को 3  इंच छोटा कर दिया।

 

 

 

 

 

दूसरे दिन दरबार में सभी आये।  बीरबल ने सबसे बारी-बारी से छड़ी ली और सबको जाने को कहा। अंत में उस नौकर की बारी आयी।

 

 

 

 

बीरबल ने उससे भी छड़ी ली और अकबर को सम्बोधित करते हुए बोले, ” बादशाह सलामत ! चोर पकड़ा गया।  यही चोर है, जिसने पैसे चुराए हैं।  ”

 

 

 

 

इसपर अकबर ने कहा, ” कैसे ? तुम यह दावे के साथ कैसे कह सकते हो ? ”

 

 

 

 

इसपर बीरबल ने कहा, ” जहांपनाह, मैंने जो छड़ियां दी थी वो तो साधारण छड़ी थी। उसमे कोई जादुई शक्ति नहीं थी, लेकिन इसे डर लग रहा था कि यह छड़ी बड़ी ना हो जाय,  इसलिए इसने यह छड़ी 3  इंच काट दी। अगर इसने चोरी नहीं की होती तो इसने इस छड़ी को काटा ही क्यूं ?”

 

 

 

 

चोर की चोरी पकड़ी गयी और उसे जेल में डाल दिया गया। बीरबल की चतुराई को देखकर सभी दरबारी बीरबल की तारीफ़ करने लगे। बादशाह ने बीरबल को ढेर सारा इनाम दिया।

 

 

 

 

बीरबल का इंसाफ 

 

 

 

 

3- बीरबल अपने महल में आराम कर रहे थे। अचानक उनके दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी। नौकर ने दरवाजा खोला तो वहां दो आदमी खड़े थे। नौकर ने उन दोनों से पूछा, “आप लोग कौन है और क्या काम है ?”

 

 

 

 

 

उनमे से एक आदमी ने बोला,  “मेरा नाम छोटू है मैं तेल का व्यापारी हूँ और बीरबल ( Birbal ) से इंसाफ माँगने आया हूँ। ” नौकर ने बोला, “बीरबल जी अभी आराम कर रहे है। आप कुछ समय बाद आइए या फिर कल दरबार में आइए।”

 

 

 

 

 

छोटू ने कहा, “नहीं, मुझे उनसे अभी मिलना है। इस आदमी ने मेरा पैसा ले लिया है और अब पैसे दे नहीं रहा है और कहता है कि यह पैसा मेरा है।”

 

 

 

 

 

नौकर ने कहा, “ठीक है, मैं बीरबल जी को बताकर आता हूँ।  ” वह बीरबल के पास गया और उन्हें पूरी बात बता दी। बीरबल ने नौकर से बोला, “ठीक है उन्हें अंदर ले आओ।”

 

 

 

 

नौकर उन दोनों को अंदर लेकर आया। बीरबल ने उनसे पूछा, “क्या नाम है तुम्हारा और तुम दोनों को क्या परेशानी है ?” तब तक किसी ने दरवाजा खटखटाया।

 

 

 

 

बीरबल ने सोचा, ” इस समय कौन हो सकता है ? ” उसके बाद उन्होंने नौकर को दरवाजे पर देखने को कहा।

 

 

 

 

 

नौकर ने दरवाजा खोला तो वहां बादशाह अकबर अपने सिपाहियों के साथ खड़े थे। अकबर ( Akbar ) को देखते ही बीरबल ने उनका स्वागत किया और कहा, ” जहांपनाह, आप यहां ? अगर कोई काम था तो खबर कर देते, मैं ही वहां आ जाता।”

 

 

 

 

 

इसपर अकबर ने कहा, “नहीं, कोई काम नहीं है। मैं अपने बगीचे में टहल रहा था तो सोचा तुमसे मिलता चलूँ ।” इसके बाद अकबर बीरबल के साथ उनके महल में आये। अकबर ने बीरबल के महल में दो अजनबी को देखे तो उन्होंने बीरबल से पूछा, ”  ये कौन है ? कोई मेहमान हैं ? “

 

 

 

 

बीरबल ने कहा, “मैं खुद नहीं जनता कि  ये लोग कौन है ? यह लोग इंसाफ माँगने आये थे।  ” इसपर अकबर ने कहा, ” ठीक है।  मैं भी यह इंसाफ़ देखना चाहता हूँ।  ”

 

 

 

 

 

बीरबल ने उनसे पूछा,  “बताओ क्या समस्या है ?” छोटू ने कहा, “हुजूर, मेरा नाम छोटू है। मैं एक तेली हूँ और मेरा व्यापार भी अच्छा चलता है। एक दिन मैं तेल लेकर बाजार में बेचने जा रहा था तो रहीम ने मुझे रोका और तेल का दाम पूछा। मैंने उसे भाव बता दिए,  फिर उसने तेल लिया और पैसे दिया।”

 

 

 

 

 

फिर छोटू ने आगे कहा, “फिर उसने कहा कि आप चलते-चलते थक गए होंगे। अंदर आकर थोड़ा आराम कर लो। मैं अपने पैसे की थैली उसकी दुकान पर रखकर आराम करने लगा। थोड़े समय बाद यह उस थैली को उठाने का प्रयास कर रहा था कि मेरी नजर उसके ऊपर पड़ी तो मैंने उसे रोका, लेकिन वह मुझसे लड़ बैठा और कहने लगा कि यह थैली मेरी  है और इसने जबरदस्ती मुझसे थैली ले ली। ”

 

 

 

 

 

बीरबल ने फिर रहीम से पूछा, “क्या छोटू सही बोल रहा है ?”

 

 

 

 

इसपर रहीम ने कहा, “नहीं हुजूर यह झूठ बोल रहा है। यह आदमी मेरे दुकान पर आया और कहने लगा कि साहब आज सुबह से बोहनी नहीं हुई है।  थोड़ा सा तेल ले लो मैं तुमको सस्ते दाम में दे दूंगा और  जैसे ही मैं तेल का बर्तन लेने के लिए अंदर आया उसने मेरा पैसे का थैला उठा लिया और भागने लगा। लेकिन मैंने उसे पकड़ लिया और जब थैला उससे लेने लगा तो वह इस थैले को अपना बताने लगा। ”

 

 

 

 

बीरबल ने फिर पूछा, “वहां पर और कौन-कौन था?” इसपर रहीम ने कहा, “हुजूर, वहां पर कोई नहीं था।”

 

 

 

 

 

बीरबल ने कहा, “झूठ बोल रहे हो तुम, वहां पर तुम दोनों के साथ पैसा भी था और वही बताएगा कि वह किसका है। ” यह कहकर बीरबल ने अपने नौकर से एक बर्तन में पानी लेन को कहा।

 

 

 

 

 

अकबर और दोनों आदमी सोच में पड़ गए कि पानी से क्या होगा ? नौकरपानी लाया।  उसके बाद बीरबल ने रहीम से पैसे लिये और उसे पानी में डाल दिये।

 

 

 

 

 

यह देखकर अकबर ने बीरबल से पूछा, “तुमने पैसे पानी में क्यों डाल दिये।” इसपर बीरबल ने कहा, ” हुजूर, अभी दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।  ”

 

 

 

 

कुछ समय बाद बीरबल बोले , ” यह पैसे छोटू के ही हैं क्योंकि यह जब किसी को तेल देता है तो उसी हाथ से पैसे भी लेता है जिससे पैसे में तेल  लग जाता है। यह  देखिए जहांपनाह जो पैसे मैंने पानी में डाले थे, उसमे से तेल ऊपर आ गए है इसलिए यह पैसा उसका ही है।” रहीम झूठ बोल रहा था। इसके बाद रहीम चुप ही रहा।  उसकी चोरी पकड़ी गयी थी। अकबर ने बीरबल की खूब तारीफ की।

 

 

 

 

 Best Akbar Birbal Story in Hindi Written ( अकबर बीरबल के किस्से ) 

 

 

 

 

 

4- एक बार अकबर अपने शहजादे को अपने दरबार में अपनी गोद में बिठाकर खिला रहे थे। सभी दरबारी उनके लड़के को दुनिया का सबसे खूबसूरत लड़का बता रहे थे। अकबर ने बीरबल से शहजादे के बारे में राय जाननी चाही।

 

 

 

 

 

बीरबल तो बीरबल थे उन्होंने तुरंत उत्तर दिया मैं आपको इससे भी खूबसूरत बच्चा दिखा सकता हूँ। बादशाह आगबबूला हो गए उन्हें अपने शहजादे की तौहीन बर्दाश्त नहीं हुई। उन दरबारियों को बहुत मजा आया कि अब तो बीरबल ( Birbal ) को सजा मिलनी तय है।

 

 

 

 

 

बादशाह की बेगम ने भी बीरबल को फटकार लगाई बोली हमारा शहजादा सबसे खूबसूरत है। अकबर ने बीरबल को आदेश देते हुए कहा, “हमें अभी और इसी वक़्त सबसे खूबसूरत बच्चा दिखाओ। बीरबल ने दो दिन का समय मांगा जो उसे मिल गया। लेकिन वह दूसरे दिन ही दरबार में हाजिर हो गया।

 

 

 

 

 

बादशाह उसे खूबसूरत बच्चा दिखाने को कहा।  इसपर बीरबल ने कहा, “आप को और अन्य लोगों को अपना हुलिया बदलकर हमारे साथ अभी चलना होगा। ” इसपर बादशाह सहमत हो गए। बादशाह बीरबल के साथ एक अन्य आदमी को लेकर हुलिया बदल लिया और उस खूबसूरत बच्चे को देखने के लिए निकल पड़ा।

 

 

 

 

 

बीरबल बादशाह को लेकर एक झोपडी के पास गए। झोपडी के बाहर एक बच्चा मिट्टी से सना हुआ अपनी मस्ती में खेल रहा था। बादशाह की नजर टेढ़ी हो गई। उन्होंने बीरबल से कहा, “क्या यही है सबसे खूबसूरत बच्चा ?” बीरबल ने कहा, “हां यही है सबसे खूबसूरत बच्चा।”

 

 

 

 

 

बादशाह अकबर ने कहा, “लेकिन यह तो एकदम गन्दा है और गंदगी से बदसूरत भी लग रहा है।” तब तक झोपडी से एक औरत निकली और बच्चे को गोद में उठाते हुए बोली, “खबरदार जो आप लोग हमारे बच्चे को बदसूरत कहा, दफा हो जाओ यहाँ से।”

 

 

 

 

 

बादशाह का चेहरा देखने लायक था। तभी बीरबल बोल उठा, “जहांपनाह हर औरत के लिए उसका बच्चा दुनिया का सबसे खूसूरत बच्चा होता है। बादशाह को बात समझ में आ गई। वह बीरबल की तारीफ करने लगे।

 

 

 

 

अकबर बीरबल स्टोरी इन हिंदी 

 

 

 

 

5- एक बार बादशाह ने बीरबल से कहा, “चलो बीरबल पता लगाएंगे कि हमारे राज्य में प्रजा की हालत कैसी है और प्रजा हमारे बारे में क्या सोचती है?” बादशाह अकबर और बीरबल अपना हुलिया बदलकर एक गांव में एक किसान के घर के सामने रुके।

 

 

 

 

किसान बाहर आकर उन लोगों से पूछने लगा,  “मैं आपकी क्या खिदमत कर सकता हूँ।” बादशाह ने कहा, “हमें बहुत भूख और प्यास लगी है।  लेकिन उसके पहले यह बताओ कि मैंने सुना है यहां का बादशाह बहुत क्रूर है और वह किसानों से लगान भी बहुत लेता है।”

 

 

 

 

 

इसपर किसान ने कहा, “आप हमारे बादशाह के बारे में ऐसी गलत बयानी मत करिये। हमारे बादशाह अपनी प्रजा का बहुत ही अधिक ध्यान रखते है। जरूरत के समय लगान के साथ अन्य कर भी माफ़ किया जाता है।”

 

 

 

 

 

इसपर बीरबल ( Birbal )  ने कहा, ”  मैं अपने साथी की तरफ से माफ़ी चाहता हूँ और दोनों चले गए। अब बादशाह को बीरबल की बातों पर विश्वास हो गया। ”

 

 

 

 Best Akbar Birbal Story in Hindi Download

 

 

 

 

6- एक बार अकबर ( Akbar )  का एक सिपाही दौड़ता हुआ आया उसे अपने पास आया हुआ देखकर उसका कारण पूछा। सिपाही ने माफ़ी मांगते हुए कहा, ” आपने जब सभी डाकुओं को पकड़ने का फरमान जारी किया था,  उसी समय एक डाकू ने हमारे घर के ऊपर धावा बोल दिया। उस समय मैं आपकी सेवा में रहने के कारण कुछ भी मदद नहीं कर सका। उसने हमारी भाभी और भाई को मार दिया उनकी उनकी एक छोटी लड़की बच गई,  लेकिन वह कहती थी कि मैं उस डाकू को पहचान सकती हूँ। फिर उसी दिन से अचानक उसकी आवाज बंद हो गई।”

 

 

 

 

 

 

अकबर ने कहा, “ठीक हैं, इस समय हमारे सोने का वक़्त हो गया है। कल सुबह अपनी भतीजी को लेकर दरबार में आना, वहीं तुम्हारी पूरी बात सुनी जाएगी।”

 

 

 

 

 

दूसरे दिन वह सिपाही अपनी भतीजी को लेकर दरबार में पहुंचा। सिपाही ने कहा, “एक जंगल में एक साधु रहता है। सभी के बीच उसका नाम हो चुका था कि साधु के दुआ से सभी का भला हो जाता है। मैं भी अपनी भतीजी को लेकर वहां गया। वहां जाते ही हमारी भतीजी बोल उठी और कहने लगी यह तो डाकू है।  मैं इसे पहचानती हूँ। सभी लोगों के विरोध को देखते हुए मैं वहां से चला आया।”अब इसमें आप ही हमारी मदद करें जहांपनाह और सिपाही चुप हो गया।

 

 

 

 

 

अकबर ने अपने कोतवाल से पूछा, ” क्या आपने सभी डाकुओं को गिरफ्तार कर लिया है ? ”

 

 

 

 

इसपर कोतवाल ने कहा, “नहीं हुजूर, एक डाकू बच गया है। उसे भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।” अकबर ने बीरबल से पूछा, “उस डाकू की पहचान कैसे होगी ? “ बीरबल ने पूरी बात को ध्यान से सुना और अकबर के कान में अपनी योजना बता दिया।

 

 

 

 

 

दूसरे दिन अकबर अपने सिपाहियों के साथ खुद ही उस साधु के पास गए और उसकी प्रशंसा करने लगे और बातों ही बातों में सारा राज उगलवा लिया।  उसके कुछ समय बाद बीरबल उस लड़की के साथ वहां पहुंचे और उस साधु को पकड़ लिया।

 

 

 

 

 

लड़की उस साधु को पहचान गई थी। वह वही डाकू था जिसने सिपाही के भाई और भाभी मार दिया था और उसकी बेटी अनाथ हो गई थी।  वह डाकू साधु का भेष बनाकर बैठा था लेकिन पकड़ा गया।

 

 

 

 

महेश दास की कहानी 

 

 

 

 

7- बादशाह अपने चार सिपाहियों के साथ जंगल में शिकार खेले गया था उसके साथ उसका खास सिपाही शेर खान था। लेकिन उन लोगों को कोई भी शिकार नहीं मिला, शाम होने वाली थी।

 

 

 

 

 

अकबर एक चौराहे पर पहुंचा लेकिन उसे मालूम नहीं पड़ा कि कौन से रास्ते से निकला जाय। उसके सिपाही दाए-बाए का रास्ता बता रहे थे लेकिन सही रास्ता किसी को नहीं मालूम था।

 

 

 

 

 

तभी सामने से एक नौजवान आते हुए दिखाई दिया अकबर ने उसे अपने पास बुलाया और पूछा, “क्या तुम बता सकते हो कि इनमे से कौन सा रास्ता आगरा को जाता है क्योंकि हमें जल्द ही आगरा पहुंचना है।”

 

 

 

 

 

उस नौजवान ने कहा, “इनमे से कोई भी रास्ता आगरा नहीं जाता है लोग ही जाते है।” उस नौजवान का जवाब सुनकर अकबर के साथ उसके सभ सिपाही हंसने लगे फिर अकबर ने उस नौजवान का नाम पूछा, “क्या नाम है तुम्हारा।”

 

 

 

 

 

नौजवान ने कहा, “हमारा नाम महेश दास है।” आप भी अपना नाम बताइए।

 

 

 

 

 

अकबर ने कहा, “हमारा नाम अकबर ( Akbar )  है। मैं पूरे हिंदुस्तान का बादशाह हूँ। तुम्हारी विनोद प्रियता से मैं बहुत खुश हूँ। हमारे दरबार में तुम्हारे जैसे लोगों की बहुत जरूरत है और हां यह हमारी हीरे की अंगूठी अपने पास रख लो जब कभी हमारे दरबार में आना तो हमें यह अंगूठी दिखा देना मैं पहचान जाऊंगा।”

 

 

 

 

 

एक दिन महेश दास दिल्ली गया और बादशाह से मिलना चाहा लेकिन दरवाजे पर ही पहरेदार ने रोक दिया, फिर अकबर से पूछकर आया उसके बाद  उसे जाने दिया। अब महेश दास अकबर के सामने आकर अपना परिचय दिया, ”  हुजूर, मैं महेश दास हूँ। हम दोनों की पहले भी मुलकात हो चुकी है।”

 

 

 

 

 

अकबर ने कहा, “हां मैं इस नाम से वाकिफ हूँ, लेकिन तुम कोई निशानी दो। तभी मैं विश्वास करूँगा।” महेश दास ने हीरे की अंगूठी दिखाई। जिसे अकबर ने उसे दिया था। अकबर ने कहा, “ठीक है। लेकिन हमारे दरबारी तुम्हारी परीक्षा लेंगे उसके बाद ही कुछ हो सकेगा?”

 

 

 

 

 

महेश दास ने कहा, “ठीक है जहांपनाह, आपके दरबारी हमारी परीक्षा ले सकते है।”

 

 

 

 

 

पहला दरबारी बोला, “दो पड़ोसियों को बताओ जो एक दूसरे को नहीं देख सकते ?”

 

 

 

 

महेश दास ने कहा, “वह दो पडोसी  दो आँखे है, जो एक दूसरे को कभी नहीं देख सकते।”

 

 

 

 

 

दूसरे दरबारी का प्रश्न था- वह कौन है जिसे सूरज और चांद भी नहीं देख सकते ?

 

 

 

 

 

महेश दास का उत्तर था- वह अँधेरा है, जिसे सूरज और चांद भी नहीं देख सकते।

 

 

 

 

 

तीसरे ने एक लकीर खींचते हुए बोला, “इसे बिना मिटाए छोटा करना है ?” महेश दास ने उस लकीर के बगल में एक उससे भी बड़ी लकीर खींच दी। पहली वाली लकीर बिना मिटाए हुए छोटी हो गई।

 

 

 

 

 

चौथे ने पूछा, “धरती का केंद्र कहां है ?” महेश दास ने एक खूंटा दरबार में ठोकते हुए कहा यहाँ से आप धरती का केंद्र नाप सकते है।

 

 

 

 

अब बादशाह ने खुद सवाल पूछा, “महेश तुम बता सकते हो कि तुम्हारे सर में कितने बाल है।” महेश ने तपाक से उत्तर दिया, “जहांपनाह हमारे सर में दस लाख बाल है। अगर विश्वास नहीं है तो गिनवा लीजिए।

 

 

 

 

 

 

महेश की बात से अकबर के साथ ही सभी दरबारी हंसने लगे।  अकबर ने खुश होकर कहा, “आज से तुम्हारा नाम महाराज बीरबल होगा और तुम हमारे नवरत्नों में से एक होगे।” सभी बीरबल की जय-जयकार करने लगे।

 

 

 

 

Akbar Birbal Story in Hindi 

 

 

 

 

8- अकबर अपने दरबार में बैठे थे। उसी समय एक व्यापारी आया। उसने अकबर से रोते हुए कहा, ” हुजूर, मेरा नाम कन्हैया है। आज रात मेरे घर में चोरी हो गयी है।”

 

 

 

अकबर ने कन्हैया से पूछा, ” तुमको किसी पर शक है। ” कन्हैया ने कहा, “ नहीं हुजूर, मुझे किसी पर शक नहीं है। ” अकबर ने बीरबल से कहा, ” क्या तुम पता लगा सकते हो कि इस ईमानदार व्यापारी के पैसे किसने चोरी किये है ?” बीरबल ने कहा, ” जहांपनाह, इस कार्य के लिए मुझे थोड़ा समय लगेगा।”

 

 

 

 

बीरबल ने कन्हैया के पास जाकर कहा, “तुम्हे तुम्हारा पैसा मिल जाएगा। मुझे वह जगह दिखाओ जहां तुम्हारे पैसे चोरी हुए थे।” कन्हैया उनको अपने घर लेकर गया। बीरबल ( Birbal ) कन्हैया के घर जाने के बाद पूछा, “तुम्हारे घर में कौन-कौन है ?” कन्हैया ने कहा, “मेरे घर में मेरे अलावा 5 नौकर है।”

 

 

 

 

बीरबल ने पूछा, “क्या वो लोग तुम्हारे कमरे में आते है ? ” इसपर कन्हैया ने कहा, ” हां, मगर वो लोग कई वर्षों से मेरे यहां काम कर रहे है। वो लोग  अपना काम बहुत ही ईमानदारी के साथ करते है। इस वजह से उन लोगो पर शक नहीं किया जा सकता है।”

 

 

 

 

बीरबल कुछ समय शांत रहा। थोड़ी देर के बाद उसने कन्हैया को 5 छड़ी दी और कहा, ” इस छड़ी को अपने नौकरों को दे देना। जिसने भी चोरी की होगी उसकी छड़ी कल सुबह तक 1 इंच बड़ी हो जाएगी। कल सुबह उन लोगो को दरबार में लेकर आना।”

 

 

 

 

 

उस व्यापारी ने वैसा ही किया। दूसरे दिन वह व्यापारी अपने 5 नौकरों के साथ दरबार में आया। सबकी छड़ी व्यापारी के हाथ में थी। बीरबल ने व्यापारी से सबकी छड़ी लिया। उन्होंने देखा कि उसमे से एक छड़ी छोटी थी। बीरबल ने कन्हैया से पूछा, “यह छड़ी तुमने किसको दी थी ?”

 

 

 

 

 

कन्हैया ने कहा, “यह छड़ी मैंने रवि नाम के एक नौकर दिया था।” बीरबल ने कहा, “तुम्हारा पैसा उसी ने चुराया है क्योकि उसकी छड़ी छोटी है।”अकबर ( Akbar ) ने उसे तुरंत बंदी बनाने का हुक्म दिया।

 

 

 

अकबर बीरबल की प्रसिद्ध कहानियां 

 

 

 

 

9- एक बार अकबर बीरबल के साथ घूमने के लिए गये। अकबर ने बीरबल से पूछा, “बीरबल सत्य और झूठ में क्या अंतर है ?” बीरबल ने उत्तर दिया, ” जहांपनाह, जितना आंख और कान में अंतर है। उतना ही सत्य और झूठ में अंतर है।

 

 

 

अकबर ने कहा, “वह कैसे ?”

 

 

 

बीरबल ने कहा, ” अक्सर सुनी हुई बातें झूठी साबित हो जाती है। लेकिन आंखे जो देखती है, वह सत्य होता है।”

 

 

 

 

अकबर ( Akbar ) ने कहा, “मैं इन सब बातों को नहीं मानता। मुझे साबित करके बताओ।”

 

 

 

 

 

इसपर बीरबल ( Birbal )  ने कहा, ” जहांपनाह, मैं आपको दो दिन पहले की बात बताता हूँ। मैं अपने महल में बैठा था। तभी दो आदमी मेरे महल में आये। उन दोनों का नाम रहीम और करीम था। करीम ने मुझसे कहा, “हुजूर इस आदमी ने मेरा पैसा छीन लिया है और नहीं दे रहा है।”

 

 

 

 

करीम की बात सुनकर रहीम बोला, ” नहीं हुजूर, यह आदमी झूठ बोल रहा है। हम दोनों अच्छे दोस्त है। हम दोनों अपनी मेहनत से अपना जीवन गुजारते है। एक दिन सेठ धनीचंद्र ने हम दोनों की मेहनत से खुश होकर हम दोनों 100 सोने के सिक्के दिये थे। जो इसने मुझसे छीन लिया है और मुझे फंसा रहा है।”

 

 

 

 

 

लेकिन मैंने इसका पता लगाने के लिए करीम को 100 सोने का सिक्का दिया। उसके बाद मैंने रहीम से कहा, “अगर तुम्हे अपनी चोरी को झूठा साबित करना है तो करीम से मुझे वह सिक्के वापस लाकर दो।”

 

 

 

 

यह सुनकर रहीम करीम से सिक्के लेने के लिए चला गया। लेकिन वह उससे वह सिक्का नहीं ले पाया। कारण यह था कि करीम उसके ऊपर हावी पड़ गया था।

 

 

 

उसी समय मैं वहां पहुँच गया और करीम से कहा, “जो आदमी तुमसे पैसा नहीं छीन पाया, वह तुम्हारा पैसा कैसे छीन सकता है।” करीम ने रहीम का पैसा वापस किया और माफ़ी माँगा।

 

 

 

 

अकबर ने बीरबल से कहा, ” तुमने उसे जेल में क्यों नहीं डाला। ” इसपर बीरबल ने कहा, ” जहांपनाह, कभी-कभी किसी को सुधरने का एक मौका अवश्य देना चाहिए।”

 

 

 

Akbar Birbal Story in Hindi ( कौन सी भाषा ) 

 

 

 

 

10 – एक बार अकबर के दरबार में एक पंडित जी आये। पंडित जी को देखकर एक दरबारी ने अकबर से कहा, “हुजूर, यह पंडित जी वाराणसी से आये है। जो स्वयं को भाषाओं का बहुत बड़ा ज्ञानी बताते है।”

 

 

 

उसी समय पंडित जी ने भी अकबर से कहा, “जहांपनाह, मैं अपनी गुरूजी से भारत की सभी भाषाए सीखी है। आज तक कोई मेरी मातृ भाषा नहीं बता पाया है।”

 

 

 

 

इसपर अकबर ने कहा, “हैरत की बात है। लेकिन तुम्हे नहीं मालूम हमारे दरबार में बहुत से बुद्धिमान दरबारी है।” यह बात सुनकर पंडित जी ने अकबर से कहा, ” जहांपनाह, यह इतना आसान नहीं है, जो मेरी मातृ भाषा बता देगा। मैं चुनौती देता हूँ अगर आपके दरबारियों में से किसी ने भी मेरी मातृ भाषा को बता दिया तो मैं अपनी हार मान लूंगा। ”

 

 

 

 

 

एक  दरबारी ने कहा, “आपकी मातृ भाषा उर्दू है।” इसपर पंडित जी ने कहा, “हमारी मातृ भाषा उर्दू नहीं है।” ऐसे ही सभी दरबारियों ने उस पंडित जी से सवाल किया। पंडित जी सभी दरबारियों को उनकी ही भाषा में जवाब दे रहे थे।

 

 

 

 

अंत में एक दरबारी ने उनसे बंगाली में पूछा, ” कैसे हैं पंडित जी ? ” पंडित जी ने कहा, “खूब भालो आचे बाबू मोशाय।” इसपर दरबारी ने बोला, “आपकी मातृ भाषा बंगाली है।”

 

 

 

 

पंडित जी ने कहा, “नहीं मेरी मातृ भाषा बंगाली भी नहीं है।” पंडित जी ने अकबर ( Akbar )  से कहा, ” मुझे तो अभी और भी कई भाषाए मालूम है। लेकिन आपका कोई भी दरबारी मेरी मातृ भाषा नहीं बता पाया।”

 

 

 

 

वहीं पर खड़े बीरबल ने पंडित जी से कहा, “आपके बुद्धि की तारीफ करनी पड़ेगी। आप लंबी यात्रा से आये है। इसलिए आप थोड़ा आराम कर लीजिए। अगर हम कल तक आपकी मातृ भाषा नहीं बता पायेंगे तो अपनी हार मान लेंगे।”

 

 

 

 

पंडित जी ने कहा, “मैं अपनी मातृ भाषा जानने के लिए उत्सुक हूँ।” पंडित जी आराम करने चले गए। अकबर ने बीरबल से कहा, “यह पंडित बहुत बुद्धिमान लगता है।” इसपर बीरबल ने कहा, “चिंता मत करिये शहंशाह, मैं इसकी भाषा का अवश्य पता लगाऊंगा।”

 

 

 

 

रात के समय बीरबल ( Birbal ) पंडित जी के कमरे में गया जहां वह सोया हुआ था। बीरबल पंडित को डराने लगा। पंडित डर गया और अपनी बंगाली भाषा में “बचाओ- बचाओ ” चिल्लाने लगा।

 

 

 

 

बीरबल अपना डरावना लिवास उतारकर रख दिया और सामने आ गया। उसी समय अकबर और अन्य दरबारी भी आ गए। बीरबल ने अकबर से कहा, “जहांपनाह इनकी मातृ भाषा बंगाली है।” जिसे पंडित ने भी मान लिया।

 

 

 

 

Akbar Birbal Story in Hindi ( अकबर बीरबल कहानी ) 

 

 

 

 

11- अकबर अपने सिपाहियों के साथ एक बार शिकार खेलने चला। उसके नौकर रास्ते में आने वाले सभी वृक्षों की कटाई कर रहे थे। जिससे अकबर को शिकार करने में कोई परेशानी ना आये। एक पेड़ पर मादा उल्लू अपने बच्चे के साथ बैठी थी।

 

 

 

 

बच्चे ने अपनी माँ से पूछा, ” माँ यह लोग जंगल  पेड़ क्यूं काट रहे है ?” मादा उल्लू ने कहा, ” बादशाह अकबर अपने सिपाहियों के साथ शिकार करने आ रहा है। वह सभी जानवरों को मार डालेगा। हमें चलकर सभी जानवरों को सावधान कर देना चाहिए। ”

 

 

 

 

 

उल्लू अपने बच्चे के साथ उड़ गई। कुछ दूर उड़ने के बाद उसे हिरण का झुण्ड दिखाई दिया।  उल्लू ने उन लोगों से कहा, ” बादशाह अकबर ( Akbar ) अपने सिपाहियों के साथ शिकार करने आ रहा है। भागकर जान बचा लो नहीं तो बेमौत मारे जाओगे।”  बीरबल को बादशाह अकबर की यह शिकार करने की आदत पसंद नहीं थी। इसलिए वह बादशाह के साथ चुप चाप चल रहा था।

 

 

 

 

 

उल्लू अपने बच्चे के साथ सभी चिड़ियों को सतर्क कर दिया था। उसे कुछ दूर जाने पर खरगोश का झुण्ड नजर आया। वह उन्हें भी सतर्क करके आगे बढ़ गई।

 

 

 

 

कुछ दूर जाने के बाद उसे शेर नजर आया जो अपने पूरे परिवार के साथ आराम कर रहा था। उसने उस शेर को भी सतर्क रहने को कहा। शेर को भी बादशाह और उसके सिपाहियों की आहट महसूस हो गई थी। जिससे वह भी अपने परिवार के साथ भाग निकला।

 

 

 

 

 

अकबर बादशाह को शाम तक एक भी शिकार नहीं मिला। उसने साथ आये बहेलिये से इसका कारण पूछा। बहेलिये ने कहा, “हमें लगता है सभी जानवर और पक्षियों को कोई सतर्क कर रहा है।”

 

 

 

 

इतने में उसकी निगाह  उल्लू और उसके बच्चे के ऊपर गई, जो अपने माँ से कह रहा था, ” पक्षियों और जानवरों की भलाई के लिए उसे अपने प्राणों की भी परवाह नहीं है।”

 

 

 

 

 

लेकिन तभी बहेलिये ने जाल फेंककर मादा उल्लू और उसके बच्चे को पकड़ लिया और बादशाह अकबर के सामने रख दिया और बोला, “यही दोनों मुखबिरी करके जंगली जानवर और पक्षियों को सतर्क कर दिया। इसलिए हम लोगों को कोई शिकार नहीं मिला।” बादशाह ने बीरबल की राय जाननी चाही।

 

 

 

 

बीरबल ने कहा, “हुजूर, अपने नौकरों से इतना सारा पेड़ कटवा दिया इसलिए आपको शिकार नहीं मिला। वैसे भी दूसरों की जान लेना अच्छी बात नहीं है। अगर आप शिकार के लालच में पेड़ कटवा देंगे तो सभी पशु पक्षी शहरों की तरफ रुख करेंगे और जनता को परेशानी होगी।” बादशाह को बात समझ में आ गयी।

 

 

 

 

 

उसने ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने का आदेश दिया। जिससे कि पर्यावरण का संतुलन बना रहे और वन्य जीव भी सुरक्षित रहे। उसने अपने हाथों से उल्लू और उसके बच्चे को आजाद कर दिया।

 

 

 

 

 

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