Monday, 13 July, 2020

Akbar Birbal Stories in Hindi Written / 12 अकबर बीरबल के किस्से


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Akbar Birbal Stories in Hindi मित्रों इस पोस्ट में 12 अकबर बीरबल की कहानियां हिंदी में दी गयी हैं।  सभी Akbar Birbal Stories in Hindi Written बहुत ही मजेदार हैं।  आप इसे जरूर पढ़ें।

 

 

 

 

मित्रों मुग़ल बादशाह जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर और महेश दास अर्थात बीरबल के बारे भला कौन नहीं जानता है।  बीरबल अकबर ( Akbar Birbal ) के नवरत्नों में से एक थे।  वे समय – समय पर तमाम तरह की मुसीबतों से अकबर को बचाते थे।

 

 

 

 

अकबर भी बीरबल का बहुत सम्मान करते थे। अकबर बीरबल से जुडी बहुत सारी कहानियां प्रचलित हैं।  आज उन्ही में से 12 Akbar Birbal Stories आपको दे रहा हूँ।  आप इसे जरूर पढ़ें।

 

 

 

 

Akbar Birbal Stories in Hindi Short ( अकबर बीरबल की कहानियां ) 

 

 

 

 

एक दिन बीरबल दरबार में काफी लेट आये तो अकबर उनसे पूछा, ” इतना लेट कैसे हो गया ? ” तब बीरबल ने कहा, “ क्षमा करें हुजूर, आते समय मेरे बच्चे ने मुझे रोक लिया और जिद करने लगा।  बड़ी मुश्किल से उसे समझाकर दरबार में आ रहा हूँ। “

 

 

 

 

इसपर बादशाह अकबर ने कहा, ‘ बीरबल, बहानेबाज़ी मत करो।  मैं तुम्हारी इस बात से बिलकुल भी सहमत नहीं हूँ।  किसी बच्चे को समझाना इतना मुश्किल नहीं कि तुम्हे इतनी देर हो जाए।  ”

 

 

 

बीरबल ( Birbal ) हँसते हुए बोले, ” हुजूर ! बच्चे को गुस्सा करना या डांटना तो बहुत सरल है। लेकिन किसी बात को विस्तार से समझा पाना बेहद कठिन।”

 

 

 

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अकबर ( Akbar ) बोले, ” मूर्खों जैसी बात मत करो।  मेरे पास कोई भी बच्चा लेकर आओ।  मैं उसे आसानी से समझाकर दिखाता हूँ। ” इसपर बीरबल बोले, ”  जहाँपनाह, बच्चा ढूंढने की क्या आवश्यकता है।  मैं ही बच्चा बन जाता हूँ।  आप एक पिता की भाँती मुझे संतुष्ट करके दिखाइएं। “

 

 

 

 

उसके बाद बीरबल बच्चे की तरह बर्ताव करने लगे।  कभी वे अकबर को चिढ़ाते तो कभी उनकी दाढ़ी खींचते।  उन्होंने अपनी पगड़ी फेंक दी। कभी वे दरबारियों के पास खेलने लगते और उन्हें परेशान करने लगते।

 

 

 

 

बादशाह कहते ही रह गए, “नहीं…नहीं मेरे बच्चे ! ऐसा मत करो। तुम तो अच्छे बच्चे हो न।” सुनकर बीरबल ने जोर-जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया। तब अकबर ने कुछ मिठाइयां  ( Sweets )  लाने का आदेश दिया, लेकिन बीरबल जोर-जोर से चिल्लाते ही रहे।

 

 

 

अकबर बीरबल के किस्से

 

 

 

बादशाह परेशान हो गए, लेकिन उन्होंने धैर्य बनाये रखा।  दरबारियों को भी इसमें खूब आनंद आ रहा था। अकबर बोले, ” बेटा,  यह खिलौने लो।  देखो तो कितना प्यारा खिलौना है। ”

 

 

 

इसपर बीरबल रट हुए बोले, ” नहीं, मुझे गन्ना  चाहिए।  मैं गन्ना खाऊंगा। ” अकबर मुस्कुराये और उन्होंने गन्ना लाने का आदेश दिया।  उन्हें लगा अब तो मैं इसे समझा ही लूंगा।

 

 

 

 

थोड़ी देर में एक सैनिक गन्ना लेकर आया और बीरबल को दे दिया, लेकिन बीरबल ने उसे फेकते हुए कहा, “ मुझे बड़ा गन्ना नहीं चाहिए।  मुझे छोटे – छोटे टुकड़े में गन्ना दो। “

 

 

 

 

अकबर ने एक सैनिक को बुलाया और कहा, ” इस गन्ने को छोटे – छोटे टुकड़े में कर दो। ” तब तक बीरबल फिर जोर से रोने लगे और बच्चों की तरह बोलते हुए बोले, ” नहीं, सैनिक गन्ना नहीं काटेगा।  आप गन्ना काटो। ”

 

 

 

 

अब अकबर को बहुत गुस्सा आया, लेकिन उन्होने खुद को रोका और गन्ना को काटा।  उनके पास दूसरा कोई रास्ता भी तो नहीं था।  यह रास्ता तो उन्होंने खुद ही चुना था।

 

 

 

गन्ना काटने के बार अकबर बीरबल को उसे देते हुए कहा, ” लो बेटा इसे खा लो। “अब बीरबल ने बच्चे की भांति मचलते हुए कहा, “नहीं मैं तो पूरा गन्ना ही खाऊंगा।”

 

 

 

 

बादशाह ने एक साबुत गन्ना उठाया और बीरबल को देते हुए बोले, “लो पूरा गन्ना और रोना बंद करो।” लेकिन बीरबल रोता हुआ ही बोला, “नहीं, मुझे तो इन छोटे टुकड़ों से ही साबुत गन्ना बनाकर दो।”

 

 

 

 

अकबर को गुस्सा आ गया और उन्होंने गुस्से में बोला, ” कैसी बात कर रहे हो ? यह कैसे हो सकता है ? ” और अगर तुमने रोना बंद नहीं किया तो तुम्हे अब मार पड़ेगी। ”

 

 

 

 

अब बच्चे का अभिनेय कर रहे बीरबल उठ खड़े हुए और हँसते हुए बोले, ” नहीं…नहीं, मुझे मत मारो हुजूर।  अब आपको पता चला बच्चों की बेतुकी ज़िद को शांत करना कितना मुश्किल होता है। ” अकबर भी बीरबल की बात पर सहमत होते हुए बोले, ” सही बात है।  रट और ज़िद करते बच्चे को समझाना बड़ा मुश्किल कार्य है। “

 

 

 

Some Stories Of Akbar And Birbal in Hindi

 

 

 

 

२- अक्सर अकबर बीरबल आपस में बातें करते रहते थे और अकबर ( Akbar ) किसी ना किसी बात में बीरबल ( Birbal ) को उलझा देते थे और फिर बीरबल से उसका जवाब पूछते थे।

 

 

 

 

ऐसे ही एक बार बादशाह अकबर और बीरबल आपस में बाते कर रहे थे।  बात मियाँ – बीवी ( Husband – wife ) के रिश्ते पर चल पड़ी और बातों – बातो में बीरबल ने कहा, ” अधिकतर पुरुष जोरू के गुलाम होते हैं और अपनी बीवी से डरते हैं। “

 

 

 

 

अकबर ने कहा, ” मैं तुम्हारी इस बात को नहीं मानता। ” बीरबल ने उत्तर दिया, ” मैं इसे सिद्ध कर सकता हूँ। ”  इसपर अकबर ने कहा, ” ठीक है, फिर सिद्ध करो। ”

 

 

 

बीरबल ने कहा, ” ठीक है। आप आज से आदेश जारी करें कि अगर किसी पुरुष की अपनी पत्नी से डरने की बात सिद्ध हो जाती है, उसे एक मुर्गा दरबार में बीरबल के पास जमा करना होगा। ”

 

 

 

 

Short stories of Akbar and Birbal in Hindi with Moral and Pictures

 

 

 

 

आदेश जारी हो गया।  कुछ ही दिनों में बीरबल के पास ढेर सारे मुर्गे जमा होने लगे।  तब बीरबल ने कहा, ” हुजूर ! अब तो इतने सारे मुर्गे मेरे पास जमा हो गए हैं।  अब आप आदेश वापस ले लीजिये। “

 

 

 

 

अकबर को ना जाने क्या सुझा और उन्होंने अपना आदेश वापस लेने से इंकार कर दिया। बीरबल ने मन ही मन सोचा, ” लगता बादशाह को भी बात साबित करवानी होगी। ”

 

 

 

 

एक दिन बीरबल दरबार में अकबर से बोले, ” हुजूर, विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि पड़ोसी राजा की पुत्री बेहद खूबसूरत है, आप कहें तो आपके विवाह का प्रस्ताव भेजूं ?”

 

 

 

इसपर अकबर ने तपाक से कहा, ” यह क्या कह रहे हो ? धीरे बोलो।  जनानखाने में पहले से ही दो हैं।  अगर उन्होंने यह बात सुन ली तो मेरी खैर नहीं। “

 

 

 

अब बीरबल ने तपाक से बोला, ” बादशाह सलामत, एक मुर्गा जमा कर दें। ” बीरबल की बात सुनकर अकबर झेंप गए और तत्काल अपना आदेश वापस ले लिया।

 

 

 

अकबर बीरबल की कहानी 

 

 

 

 

3 – बादशाह अकबर जंग में जाने की तैयारी कर रहे थे। फ़ौज पूरी तरह तैयार थी।  बादशाह भी अपने घोड़े पर सवार होकर बीरबल के साथ आये। बादशाह ने फ़ौज को जंग के मैदान में कूच  करने का आदेश दिया।

 

 

 

 

बादशाह और बीरबल साथ – साथ आगे – आगे चल रहे थे और पीछे विशाल सेना चल रही थी। रास्ते में अकबर ने जिज्ञासावश बीरबल से पूछा, “ बीरबल, युद्ध में विजयी किसकी होगी। “

 

 

 

बीरबल ने कहा, ” हुजूर, मैं इसका उत्तर जंग के मैदान में दूंगा।  ” कुछ समय के बाद फ़ौज में युद्ध के मैदान में पहुँच गयी।  वहाँ पहुँच कर बीरबल ने अकबर से कहा, ” हुजूर, इस युद्ध में आपकी ही विजय होगी।

 

 

 

“यह तुम अभी कैसे कह सकते हो, जबकि दुश्मन की फौज भी बहुत विशाल है।” बादशाह ने शंका जाहिर की।

 

 

 

इसपर बीरबल ( Birbal ) ने कहा, ” दुश्मन हाथी पर सवार है और हाथी तो सूंड से मिटटी अपने ही ऊपर फेंकता है और अपनी ही मस्ती में रहता है।  इसके उलट आप घोड़े पर सवार हैं और घोड़े को गाज़ी मर्द कहा जाता है।  घोड़ा कभी भी धोखा नहीं दे सकता।  ” युद्ध के बाद विजय अकबर ( Akbar )  की ही हुई और बीरबल की बात सच हुई।

 

 

 

 

Akbar And Birbal Stories in Hindi With Picture ( अकबर बीरबल कहानी ) 

 

 

 

 

4-   एक बार की बात है।  बादशाह अकबर ने अपने  नवरत्नों  से पूछा, ” अच्छा, यह बताओ कि सबसे बड़ा पत यानी शहर कौन सा है ? ” सभी लोग इसपर सोच विचार करने लगे।

 

 

 

 

पहले ने कहा, ” हुजूर, सोनीपत।  ” दूसरे ने कहा, ” पानीपत ” तभी किसी ने कहा, ” दलपत ” बादशाह ने सभी को ना कह दिया।  तब चौथे नवरत्न ने कहा, ” हुजूर दिल्ली शहर अर्थात दिल्लीपत।  ”

 

 

Akbar Birbal Stories in Hindi

 

 

 

इसके बाद अकबर ने बीरबल से कहा, ” अरे बीरबल, हमने तुमसे भी पूछा है।  तुम भी कुछ बोलो।  ” इसपर बीरबल ने कहा, ” हुजूर, राखपत और रखापत।  “

 

 

 

 

इसपर अकबर ने कहा, ” हमने सोनीपतपानीपत जैसे शहरों के नाम तो सुने हैं, लेकिन राखपत और रखापत का नाम तो कभी नहीं सुना।  भला यह किन शहरों के नाम हैं ? “

 

 

 

 

 

बीरबल ने जवाब दिया, ” हुजूर राखपत का मतलब मैं आपका मान रखूं और रखापत का मतलब आप मेरी बात रखो।  यह मेलभाव और प्रेमभाव, सम्मान जिस पत में नहीं है।  उस पत का क्या मतलब ? ” बीरबल की बात से अकबर बहुत खुश हुए और उन्हें सम्मानित किया।

 

 

 

गधे का बोझ 

 

 

 

5 –  बादशाह अकबर और उनके दो पुत्रों को नदी में नहाने का शौक था। .बीरबल भी कभी – कभी उनके साथ नहाने जाते थे। अकबर और उनके पुत्र एक दिन बीरबल के साथ नदी में नहाने गए।  जब वे लोग नदी में नहा रहे थे तब बीरबल नदी किनारे उनके कपड़ों की रखवाली कर रहे थे।

 

 

 

बीरबल ने उनके कपडे अपने कन्धों पर टांग लिए थे।  बादशाह को बीरबल को हमेशा छेड़नी की आदत थी। कोई भी मौक़ा वे अपने हाथ से जाने नहीं देते थे।  उन्होंने बीरबल को छेड़ते हुए कहा, ” तुम्हारे कंधे पर एक गधे का बोझ लदा  है।  ”

 

 

 

बीरबल भला कैसे चुप रहने वाले थे।  उन्होंने तपाक से कहा, ” हुजूर, एक नहीं एक गधे और दो उसके बच्चों का। ” अकबर तुरंत ही चुप हो गए। वे बात को समझ गए थे।

 

 

 

 

 

6 – एक बहेलिया तोतों को पकड़ता, उन्हें इंसानों की तरह बोलना सिखाता और फिर उन्हें अच्छे दामों में बेचता।  यही उसका धंधा था। एक बार उसने बहुत ही बढियाँ तोता पकड़ा और उसे खूब अच्छी – अच्छी बाते सिखाई और उसे लेकर बादशाह अकबर के दरबार में पहुंचा।

 

 

 

 

दरबार में पहुंचकर उसने तोते से पूछा, ” बताओ यह किसका दरबार है ?” तोते ने उत्तर दिया, ” यह बादशाह अकबर का दरबार है। ” बादशाह अकबर बड़े प्रसन्न हुए।

 

 

 

उन्होंने बहेलिये से कहा, ” यह तोता बड़ा प्यारा है।  मुझे चाहिए।  कितनी कीमत है इसकी ? ” इसपर बहेलिया बोला, ” हुजूर, सब कुछ तो आपका ही है।  आप ही समझ कर उचित मूल्य दे दें। ”

 

 

 

 

 

अकबर ( Akbar )  बड़े ही खुश हुए और अच्छी धनराशि देकर तोता खरीद लिया। अकबर ने तोते लिये बड़े ही ख़ास इंतजाम करवाए और उसे बड़ी ही सुरक्षा की बीच रखा और उसके खाने – पीने तथा अन्य कामों के लिए उन्होंने कई सेवक लगाए और उन्हें ख़ास हिदायत देते हुए कहा, ” यह तोता मेरा बहुत प्रिय हैं।  इसे किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आनी चाहिए।  यदि किसी ने इसकी मौत की खबर दी तो उसे सूली पर चढ़ा दिया जाएगा। “

 

 

 

 

Very short story of Akbar and Birbal in Hindi with Moral / अकबर बीरबल स्टोरी

 

 

 

 

कुछ दिन सब ठीक रहा, लेकिन जल्द ही तोता मर गया।  सेवक बड़े ही परेशान हुए।  उन्होंने बीरबल को पूरी बात बताकर मदद मांगी। बीरबल ने कुछ देर सोचा और सेवको से कहा, ” तुम लोग घर जाओ।  इसकी सूचना महाराज को मैं दूंगा। ”

 

 

 

 

अगले बीरबल दरबार में पहुंचे और अकबर से बोले, ” हुजूर, आपका तोता….”

 

 

अकबर ने कहा, ” हाँ… हाँ क्या हुआ मेरे तोते को ? ”

 

 

 

बीरबल ( Birbal ) ने फिर डरते हुए कहा, ” वो आपका तोता….”

 

 

” अरे क्या हुआ मेरे तोते को ? ” अकबर अधीरता से बोले।

 

” बादशाह सलामत, वो आपका तोता ”

 

“अरे खुदा के लिये कुछ तो कहो बीरबल मेरे तोते को क्या हुआ ? ” अकबर ने खीजते हुए कहा।

 

 

 

अकबर ने इसपर कहा, ” हुजूर, आपका तोता ना तो कुछ खाता है, ना कुछ पीता है, ना कुछ बोलता है और ना ही अपने पंख फड़फड़ाता है और ना ही…”

 

 

 

बीरबल की बात पूरी होने के पहले ही अकबर गुस्से से बोले, ” अरे सीधा – सीधा क्यों नहीं बोलते वह मर गया है।  इतना घुमाने की जरुरत क्या यही ? ‘

 

 

 

बीरबल ने तुरंत कहा, ” हुजूर, मैंने तोते के मरने की खबर नहीं दी बल्कि अपनी ही ऐसा कहा है।  अतः मुझे सजा ना दी जाए। ”। यह सुनकर अकबर शांत हो गए।

 

 

 

Akbar Birbal Stories in Hindi Language ( अकबर बीरबल की कहानियां ) 

 

 

 

 

7 –  जब कभी दरबार में अकबर और बीरबल अकेले होते थे तो किसी ना किसी बात पर बहस छिड़ ही जाती थी।

 

 

 

एक दिन अकबर बैगन की सब्जी की खूब तारीफ़ कर रहे थे और बीरबल भी उनकी हाँ में हाँ मिला रहे थे।  इतना ही अपनी तरफ से दो – चार वाक्य जोड़ देते थे।

 

 

 

Akbar Birbal Stories in Hindi

 

 

 

अचानक से अकबर के मन में एक सवाल उठा।  उन्होने सोचा, ” देखते हैं बीरबल अपनी बात कहाँ तक निभाते हैं। यह सोचकर अचानक से वे बैगन की बुराई करने लगे।  “

 

 

 

 

यह क्या बीरबल भी अब बैगन की बुराई करने लगे।  उन्होंने कहा, ” बैगन बहुत ही बुरी चीज है।  इसके खाने से शरीर में तमाम बीमारियां  हो जाती हैं।

 

 

 

 

बीरबल की बात सुनकर अकबर हैरान रह गए।  उन्होंने कहा, ” तुम तो बड़े अजीब हो।  तुम्हारी बातों पर विश्वास नहीं किया जा सकता।  कभी तुम बैगन की तारीफ़ करते हो तो कभी उसकी बुराई।  आखिर ऐसा क्यों भाई ? ”

 

 

 

बीरबल ने मुस्कुराते हुए कहा, ” बादशाह सलामत, मैं आपका नौकर हूँ, बैंगन का नहीं। ”

 

 

 

 

8 –  एक बार अकबर ने भरे दरबार में अपने दरबारियों से पूछा, ” एक बात बताओ, किस नदी का पानी सबसे अच्छा है। ” सभी दरबारियों ने एकमत से उत्तर दिया, ” गंगा का पानी सबसे स्वच्छ और अच्छा है। ” लेकिन बीरबल ने कोई जवाब नहीं दिया।  इसपर अकबर बोले, ” बीरबल तुम क्यों चुप हो ? क्या तुम्हे कुछ शक है ? “

 

 

 

 

बीरबल ( Birbal ) बोले, ” बादशाह सलामत, यमुना नदी का पानी सबसे अच्छा होता है। ” यह उत्तर सुनकर अकबर ( Akbar ) हैरानी से बोले, ” ऐसा कैसे ? जबकि तुम्हारे धर्मग्रंथों में तो गंगा नदी का पानी सबसे शुद्ध और पवित्र बताया गया है, जबकि तुम कह रहे यमुना नदी का पानी अच्छा होता है। ”

 

 

 

बीरबल ने कहा, ” हुजूर, मैं भला पानी तुलना अमृत से कैसे कर सकता हूँ। गंगा नदी में बहाने वाला पानी, पानी नहीं बल्कि अमृत है।  इसीलिए मैंने कहा पानी यमुना का सबसे अच्छा है। ” बादशाह और सभी दरबारी निरुत्तर हो गए।

 

 

 

Akbar And Birbal Stories in Hindi 

 

 

 

 

9 – बादशाह अकबर की आदत थी कि वह दरबारियों से तरह – तरह का प्रश्न किया करते थे।  एक दिन बादशाह ने दरबारियों से पूछा, ” अगर सबकी दाढ़ी आग लग जाए, जिसमें मैं भी शामिल हूँ तो आप सबसे पहले किसकी दाढ़ी की आग बुझाएंगे ? “

 

 

 

सबने एक स्वर में कहा, ” हुजूर, आपकी दाढ़ी। ”

 

 

 

मगर बीरबल ने कहा, ” हुजूर, सर्वप्रथम मैं अपनी दाढ़ी की आग बुझाऊंगा फिर किसी और की। ” अकबर बीरबल के उत्तर से प्रसन्न होते हुए बोले, ” बीरबल को छोड़कर सभी लोग झूठ बोल रहे थे।  सच तो यही है कि हर कोई सबसे पहले अपने बारे में सोचता है। ”

 

 

 

 

Akbar Birbal Ki Kahani in Hindi / अकबर बीरबल की कहानी इन हिंदी

 

 

 

 

10 –  एक दिन अकबर और बीरबल वन में विहार के लिए गए।  एक टेढें पेड़ की ओर इशारा करते हुए अकबर ने बीरबल से कहा, ” यह दरख़्त टेढ़ा क्यों है ? “

 

 

 

 

बीरबल ( Birbal )  ने जवाब दिया, ” यह इसलिए टेढ़ा है क्योंकि यह जंगल के तमाम पेड़ों का साला है। ” बादशाह ने पूछा, “ तुम भला ऐसा कैसे कह सकते  हो ? “

 

 

 

बीरबल ने कहा, ”  दुनिया में ये बात मशहुर हैं कि कुत्ते की दुम और साले हमेशा टेढे होते हैं। .” अकबर ( Akbar )  ने पूछा, ” क्या मेरा साला भी टेढा है?

 

 

 

बीरबल ने फ़ौरन कहा, ” बेशक जहाँपनाह। ” अकबर ने कहा, ” ऐसी बात है तो मेरे टेढ़े साले को फांसी पर चढ़ा दिया जाये।  आदेश का पालन हो। “

 

 

 

 

यह बात सुनते ही अकबर का साला बेहद परेशान हो गया।  वह भागा – भागा बीरबल के पास पहुंचा और बीरबल से इससे बचने का उपाय पूछा।

 

 

 

बीरबल ने कहा, ” ठीक है।  मैं कुछ करता हूँ।  तुम चिंता मत करो। ”

 

 

 

फांसी का समय आ गया।  बीरबल ने फांसी के तीन तख्ते लगवाए, ” एक सोने का, एक चांदी का और एक लोहे का। ” यह सब देखकर अकबर ने पूछा, ” यह सब क्या है। तीन तख़्त क्यों ? “

 

 

 

 

बीरबल ने कहा, ” हुजूर, सोने का तख़्त आपके लिए, चांदी का मेरे लिए और लोहे का तख्ता आपके साले के लिए। अकबर ने अचरज से पूछा, ” मेरे और तुम्हारे लिए क्यों भला ? “

 

 

 

बिरबल ने कहा, ” हम भी तो आखिर किसी ना किसी के साले हैं। ” बादशाह अकबर हंस पड़े और साले साहब के जान में जान आयी।  वह बाइज्जत बरी हो गया।

 

 

 

 

 

11 – बादशाह अकबर अक्सर रूप बदलकर सैर के निकलते थे।  एक दिन वे भेष बदलकर बीरबल  के साथ शहर के बाहर एक गाँव में पहुंचे। वहा बादशाह ने देखा, ” एक कुत्ता कई दिनों की सूखी और काली पड़ गयी रोटी को चबा – चबाकर खा रहा था। “

 

 

 

अचानक बादशाह को एक मज़ाक सुझा।  उन्होंने कहा, ” बीरबल ! देखो वह कुत्ता काली को खा रहा है। ” दरअसल ‘ काली ‘ बीरबल की माँ का नाम था।

 

 

 

 

बीरबल समझ गए कि अकबर मज़ाक कर रहे हैं। उन्होंने शान्ति से कहा, ” आलमपनाह, यह उनके लिए जिन्दगी और नेमत है। ” दरअसल नेमत बादशाह की माँ का नाम था।  बीरबल के जवाब पर अकबर चुप हो गए।

 

 

 

 

 

12 –  एक बार की बात है बीरबल अपने गाँव से गुजर रहे थे, तभी उन्हें किसी के रोने की आवाज सुनाई दी।  उन्होंने चारो तरफ देखा तो उन्हें एक बूढ़ा आदमी दिखाई दिया।

 

 

 

 

बीरबल ने जब पास जाकर देखा तो उन्होंने देखा कि वह बादशाह अकबर के बगीचे काम करने वाले माली थे।  बीरबल ने उनसे पूछा, ” क्या हुआ ? क्यों रो रहे हो ? “

 

 

 

 

इसपर उसने कहा, ” मैंने शाही बगीचे  में आम के पेड़ के नीचे पैसों से भरा मटका रखा था।  वह मेरे जीवन की जमा-पूंजी थी, लेकिन अब वह वहाँ नहीं है।  अब आप ही बताइये मैं क्या करूँ ? “

 

 

 

 

इसपर बीरबल ( Birbal )  ने कहा, ” आप बिलकुल भी चिंता ना करें।  आपका मटका आपको जरूर मिलेगा।  ” यह कहकर बीरबल वहाँ से निकल गए और रास्ते भर सोचते रहे, ” आखिर वह मटका कौन निकाल सकता है ? क्योंकि उस बागीचे में बादशाह अकबर, बीरबल और उस माली के अतिरिक्त किसी के भी जाने की इज़ाज़त नहीं थी। ”

 

 

 

 

काफी सोचने के बाद उन्हें याद आया कि जड़ी – बूटी लेने के लिए हकीम साहेब जरूर उस बगीचे में आ सकते हैं। उन्होंने महल में मौजूद मंत्रियों से पूछा, ” इस समय कौन – कौन हकीम जी से इलाज करवा रहा है ? ”

 

 

 

इसपर एक मंत्री ने कहा, ” मैं अपने पेट दर्द का इलाज मंत्री जी से करवा रहा हूँ।  मुझे पेटदर्द के साथ ही दस्त भी हो रहा था, अभी कुछ आराम है। दस्त की दवाई के लिए हकीम जी ने आप के पेड़ की जड़ की दवा बनाई थी। ”

 

 

 

अब बीरबल का शक हकीम की तरफ बढ़ गया।  जब हकीम जी दरबार में पहुंचे तो बीरबल ने उनसे कहा, ” हकीम जी, मेरा पेट दर्द कर रहा है और दस्त की भी परेशानी है।  कृपया इसकी कोई दवाई दीजिये।  ”

 

 

 

इसपर हकीम ने कहा, ” मेरे पास ऐसी दवाई है जिससे आपकी तुरंत ही ठीक हो जायेगी।  मैंने यही दवाई मंत्री जी को भी दी थी, अब उन्हें आराम हो रहा है, लेकिन यह दवाई केवल आम के पेड़ की जड़ से ही बन सकती है।  ”

 

 

 

जैसे ही हकीम जी ने यह बात कही तो बीरबल का शक और भी गहरा हो गया।  बीरबल ने तुरंत ही कहा, ” तब तो वहाँ गड़े मटके के बारे में भी पता होगा, बताओ वह मटका कहाँ है ? ”

 

 

 

 

इसपर हकीम जी ने कहा, ” हुजूर, मुझे माफ़ कर दीजिये।  मुझे लगा यह मटका वहाँ दबा हुआ है,  इसलिए मैंने निकाल लिया।  मुझे नहीं पता था कि यह किसी ने गाड़ा हुआ था।  ”

 

 

 

 

उसके बाद बीरबल ने माली का मटका वापस दिलवा दिया।  अकबर बादशाह ने बीरबल की खूब तारीफ़ की और हकीम से चोरी के आरोप के कारण शाही पद से हटाने का निर्णय लिया।

 

 

 

लेकिन बीरबल ने कहा, ” चूँकि इन्होने जानबूझ कर पैसे नहीं चुराए थे, बल्कि अनजाने में रख लिए थे और पूछने पर उन्होने बता भी दिए, इसलिए बादशाह सलामत मेरा आपसे अनुरोध है कि आप इन्हे सजा ना दें। ” अकबर ( Akbar )  ने बीरबल की बात मान ली और हकीम जी को माफ़ कर दिया।

 

 

 

 

 

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