Akbar Birbal Short Stories For Kids in Hindi / अकबर की  कहानी

Akbar Birbal Short Stories For Kids in Hindi / अकबर की कहानी

Akbar Birbal Short Stories For Kids in Hindi एक बार अकबर बादशाह के दरबार का एक सिपाही ईरान से घूमकर आया था। बादशाह ने उससे ईरान के बादशाह के विषय में पूछा, “कि वहां का बादशाह हमारी सल्तनत के विषय में क्या राय रखता है ?”

 

 

 

वह सिपाही बोला, “ईरान का बादशाह बहुत ही नेक दिल इंसान है। वह आपके विषय में और आपके राज्य के विषय में हमेशा नेक बातें सोचता रहता है।”

 

 

 

अकबर बादशाह बोला, “क्या हमसे भी ज्यादा नेक दिल इंसान है ?”

 

 

 

सिपाही बोला, “नहीं जहांपनाह, आपके के जैसा नेक दिल बादशाह मिलना बहुत मुश्किल है, क्योंकि आप हमेशा ही भलाई के बारे में सोचते रहते है।”

 

 

 

दूसरा सिपाही भी बोला, “मैंने भी कई रियासते देखी है। लेकिन आपके जैसा कोई भी बादशाह नजर नहीं आया क्योंकि आप गरीबो की सहायता भी करते है। उनसे लगान भी कम लेते है, इसलिए आप से सभी खुश है।”

 

 

 

 

बादशाह  बीरबल की तरफ देखा और कहा, “तुम्हारा हमारे बारे में क्या विचार है ?”

 

 

 

बीरबल बोले , “जहांपनाह, आप बहुत ही नेक दिल बादशाह है। इसमें कोई शक नहीं है, लेकिन आप से बढ़िया अच्छा और नेक दिल बादशाह हो सकता है।”

 

 

 

यह सुनकर बादशाह बीरबल के ऊपर क्रोधित हो गया क्योंकि वह बीरबल की घुमावदार बातों को नहीं समझ सका। उसने बीरबल को तुरंत ही अपने देश से निकल जाने को कहा।

 

 

 

बीरबल बोले , “जहांपनाह, हमारा इरादा आपको ठेस पहुंचाने का नहीं था। मैं तो यह कह रहा था कि हर इंसान में सुधार की गुंजाइश होती है। कोई भी इंसान अपने में पूर्ण नहीं होता।”

 

 

 

 

इतना कहकर बीरबल दरबार से निकल गया। बीरबल के जाते ही कुछ चाटुकार मंत्रियों ने बादशाह से कहना शुरू किया कि आपने अच्छा किया जो बीरबल को निकाल दिया क्योंकि वह हमेशा आपको सबके सामने नीचे दिखाने की कोशिश करता था। आपकी बात हमेशा काट देता था।

 

 

 

 

बादशाह ने सबको डांटते हुए कहा, “चुप रहो तुम लोग मेरा एक अजीज दोस्त चला गया। हमने अपनी बातों से उसे दुःख पहुंचा दिया जिसका मुझे बहुत खेद है।”

 

 

 

 

दूसरे दिन बादशाह ने सिपाहियों को कहा, “जाकर बीरबल के घर पर देखो और उसे फौरन यहां लेकर आओ।”

 

 

 

सिपाहियों ने जाकर देखा तो बीरबल के घर ताला लगा हुआ था। सिपाही ने आकर कहा, “जहांपनाह, “बीरबल कहीं चले गए। उनका कहीं पता नहीं है।”

 

 

 

 

अब बादशाह गमगीन हो गए। उन्होंने अपने दरबारियों से कहा, “प्रत्येक रियासत में एक-एक आदमी जाओ और हमारा फरमान सुनाओ। जिस राज्य से फरमान का जवाब मिल जाएगा तो समझ लेना कि बीरबल वहीं है क्योंकि हमारे फरमान का उत्तर बीरबल के सिवाय कोई नहीं दे सकता।”

 

 

 

 

सभी लोग बीरबल को ढूंढने निकल गए। एक सिपाही बीरबल को ढूंढते हुए ईरान जा पहंचा। उसने ईरान के बादशाह को अकबर का फरमान सुनाया। हमारे तालाब आपकी नदियों से शादी करना चाहते है। आपका क्या विचार है ?”

 

 

 

 

यह बात ईरान के बादशाह के समझ में नहीं आई। लेकिन उनके एक सिपाही ने फौरन उत्तर दिया, “जाकर अपने बादशाह से कह दो तालाब और नदिया शादी के लिए राजी है। लेकिन अपने कुंओ से कह देना स्वागत करने के लिए राज्य के बाहर उपस्थित रहे।”

 

 

 

 

वह सिपाही लौटकर अकबर बादशाह को सब बातें सुना दिया। अकबर बादशाह समझ गये  कि यह जवाब बीरबल के सिवाय कोई नहीं दे सकता।

 

 

 

बादशाह खुश होकर सिपाही से कहा, “मैं स्वयं ही बीरबल को लेने जाऊंगा।” दूसरे दिन बादशाह अकबर ईरान के बादशाह के दरबार में गये और बीरबल को लेकर आये ।

 

 

 

 

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