Sunday, 09 August, 2020

Akbar Birbal Ki Kahani in Hindi / अकबर बीरबल की हिंदी कहानियां


Akbar Birbal Ki Kahani in Hindi

Akbar Birbal Ki Kahani इस पोस्ट में Birbal Ki Kahani Hindi Mein दी गयी है।  आप इसे जरूर पढ़ें और आपको इसमें बहुत मजा आएगा।  

 

 

 

 

 

Akbar Birbal Ki Kahani अकबर बीरबल की हिंदी कहानियां

 

 

 

 

 

अकबर बादशाह अपने चार दरबारियों के साथ कहीं जा रहा था। उनमें बीरबल भी एक था। दोपहर का समय गर्मी का दिन अकबर का गर्मी से बुरा हाल था। उसने जमुना नदी के पानी में नहाने की इच्छा प्रकट की और एक सुन-सान घाट की ओर चला, जहां उसे नहाते हुए कोई देख ना सके।

 

 

 

 

 

बादशाह ने बीरबल ( Birbal )  से पूछा, “क्या तुम भी नहाओगे ?” बीरबल ने कहा, “जहांपनाह, हमें सुबह ही नहाने की आदत है और मैं घर से नहा कर ही निकलता हूँ इसलिए मैं नहीं नहाऊंगा।” इसपर अकबर ( Akbar ) ने कहा, “ठीक है। तुम मत नहाओ, लेकिन हम अवश्य ही नहाऊंगा।”

 

 

 

 

 

यमुना के किनारे पेड़ों की टहनियां बहुत ऊँची थी, इसलिए बादशाह अकबर ने अपनी पगड़ी और कपड़े बीरबल को संभालने के लिए दे दिया। बादशाह की नकल करके अन्य तीनों ने अपने कपड़े बीरबल को सौंप कर नहाने चले गए।

 

 

 

 

 

चार आदमी के कपड़े का बोझ था। बीरबल का बैलेंस बिगड़ता जा रहा था। सभी चरों ठंढे पानी में नहाने का आनंद ले रहे थे। बीरबल का बैलेंस बिगड़ता देखकर बादशाह को हंसी  आ गयी। उसने हसते हुए बीरबल से कहा, “हमने तुमसे नहाने के लिए कहा था। लेकिन तुमने इन्कार कर दिया, अब एक गधे का बोझ उठाओ।”

 

 

 

 

 

बीरबल भी कहां चुप रहने वाले थे। उन्होंने तुरंत ही जवाब दिया, “एक गधे का नहीं हुजूर, चार गधे का बोझ उठाया हूँ।” अब तो बादशाह और तीन सिपाहियों की हालत देखने लायक थी। उन लोगों ने जल्दी से आकर बीरबल से अपने-अपने कपड़े ले लिए।

 

 

 

 

 

2-बीरबल की चतुराई से अकबर बादशाह बहुत खुश रहते थे। जबकि अन्य दरबारी बीरबल को हमेशा नीचा दिखाने की फ़िराक में रहते थे। एक बार बादशाह चौरस खेलना चाहते थे। लेकिन उस दिन बीरबल ( Birbal ) कुछ देर से दरबार में आये तो अन्य लोगों के कहने पर अकबर ने बीरबल को सजा एलान कर दिया।

 

 

 

 

 

वह भी ऐसी सजा जो बहुत ही विचित्र थी। सभी का मत एक था कि बीरबल इस सजा से घबरा जायेगा। लेकिन वह बीरबल ही क्या जो सजा या किसी और बात से घबरा जाए।

 

 

 

 

अकबर ( Akbar ) ने एक सिपाही को एक बकरी लाने का आदेश दिया और बकरी को तौलने के लिए भी कहा। सिपाही बकरी लेकर आया और उसका वजन 30 किलो था।

 

 

 

 

बादशाह अकबर ने वह बकरी बीरबल को देते हुए कहा, “यह बकरी ले जाओ एक महीने बाद लेकर आना, लेकिन इतना ध्यान रहे कि बकरी का वजन 1 किलो ना तो कम होना चाहिए ना ही 1 किलो ज्यादा होना चाहिए, नहीं तो तुम्हे ही दंड मिलेगा।”

 

 

 

 

बीरबल किसी तरह बकरी लेकर घर लेकर आ गए। बीरबल की औरत ने कहा, ” क्या बादशाह ने तुम्हे यह तोफा दिया है ?” इसपर बीरबल ने कहा, “नहीं ” और बीरबल ने सारी बात उसे बताई।

 

 

 

 

एक महीने के बाद बीरबल बकरी के साथ दरबार में पहुंचा। बादशाह ने उस बकरी का वजन उसी सिपाही को चेक करने के लिए दिया, जो पहले भी बकरी को वजन कर चुका था।

 

 

 

 

 

सिपाही ने आकर बादशाह से कहा, “हुजूर, बकरी का वजन एकदम 30 किलो ही है ना कम ना ही ज्यादा।” अब बादशाह के चौकने की बारी थी। उसने बीरबल से पूछा, “यह कैसे संभव हुआ क्या तुमने बकरी को खाना नहीं खिलाया था ?”

 

 

 

 

इसपर बीरबल ने कहा, “जहांपनाह बकरी खाना खूब खाती थी, लेकिन मैं रात में उसे एक शेर के पिंजरे के सामने बांध देता था। शेर भूखा होने के कारण बकरी पर झपटता था तो बकरी की घिग्घी बंध जाती थी और बकरी का खाया पिया सब बेकार चला जाता था। यह रोज का कार्यक्रम था। इसलिए बकरी का वजन पूर्ण रूप से नियंत्रण में था।” यह सुनकर बादशाह खुश हो गया और सभी दरबारी बगलें झांकने लगे।

 

 

 

 

 

3-अकबर बादशाह के दरबार में एक व्यापारी आया। उसके पास बहुत ही सुंदर-सुंदर चादरें थी। बादशाह ने एक सुंदर रंग की चादर ले लिया। व्यापारी चला गया।

 

 

 

अब राजा ने उस चादर को अपने ऊपर उढ़ाने को कहा। जिससे कि बादशाह का कोई भी अंग बाहर ना दिखे। सभी ने बारी-बारी से प्रयास किया। लेकिन सफल नहीं हो सके क्योंकि वह चादर छोटी थी।

 

 

 

 

एक दरबारी बादशाह का चापलूस था। उसने डरते-डरते कहा, “हुजूर यह चादर ही छोटी है तो हम लग क्या कर सकते है।” बादशाह ने सबको दांडते हुए कहा, ” चुप रहो तुम लोग। यह काम बीरबल के सिवाय और कोई नहीं कर सकता। तुम लोग तो अनायास ही बीरबल ( Birbal )  से चिढ़ते हो।” बीरबल को बादशाह का हुक्म सुनाया गया और बीरबल दरबार में हाजिर था।

 

 

 

 

बादशाह ने बीरबल से अपने ऊपर चादर उढ़ाने के लिए कहा। बीरबल ने चादर को गौर से देखा तो चादर एक हाथ छोटी थी। बीरबल ने बादशाह के कान में धीरे से कहा, “आप ठीक बच्चे की तरह सो जाइये दोनों घुटनों को मोड़कर।” बादशाह ने वैसा ही किया। बीरबल ने उनको चादर उढ़ा दिया। बादशाह ने देखा कि उनका पूरा शरीर ढका हुआ है।

 

 

 

 

यह देखकर अकबर बहुत खुश हुआ। बीरबल ने कहा, “हुजूर, चादर देखकर ही पांव फैलाना चाहिए।”

 

 

 

 

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