Sunday, 09 August, 2020

Akbar Birbal Ke Kisse Se / 5 अकबर बीरबल के किस्से हिंदी में


Akbar Birbal Ke Kisse Se

Akbar Birbal Ke Kisse Se मित्रों इस पोस्ट में अकबर बीरबल की हिंदी कहानियां दी गयी हैं।  आप यह Akbar Birbal Ke Majedar Kisse Se जरूर पढ़ें और इसे शेयर भी जरूर करें।

 

 

 

 

Akbar Birbal Ke Kisse Se ( अकबर बीरबल के किस्से ) 

 

 

 

 

 

बादशाह अकबर जब छोटे थे, तभी उनकी माँ का देहांत हो गया था। वे बहुत ही छोटे थे और उन्हें माँ के दूध की जरुरत पड़ती थी।

 

 

 

 

महल में तब एक दासी थी।  उनका दुधमुंहा बच्चा था।  वह नन्हे अकबर को दूध पिलाने को राजी हो गयी और वे अपने पुत्र और अकबर ( Akbar )  दोनों को दूध पिलाने लगी।

 

 

 

 

 

अकबर बीरबल के किस्से हिंदी में 

 

 

 

 

 

दासी के पुत्र का नाम हुसिफ था।  चूँकि अकबर और हुसिफ दोनों ने ही एक ही माँ का दूध पीया था सो वे दूध – भाई हो गए थे।  अकबर को भी हुसिफ से बहुत लगाव था।

 

 

 

 

समय बीता और अकबर ( Akbar )  एक शक्तिशाली बादशाह बने, जबकि हुसिफ गलत सांगत में पड़ गया और धीरे – धीरे उसके पास दो वक्त के भोजन का पैसा भी नहीं बचा।

 

 

 

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लोगों ने उसे बादशाह के पास जाने को कहा।  उन्होंने कहा, ” बादशाह आपके बचपन के साथी हैं और आप दोनों ने एक ही माँ का दूध पीया है।  बादशाह आपकी मदद जरूर करेंगे। ”

 

 

 

 

हुसिफ बादशाह के दरबार में गए।  वहां बादशाह ने उसे भाई जैसा सम्मान देते हुए उसे गले  से लगा लिया। उन्होंने हुसिफ को मदद देने का आश्वासन देते हुए उसे दरबार में नौकरी दे दी।

 

 

 

 

उसके साथ उसे रहने के लिए बड़ा मकान अच्छे कपडे और नौकर – चाकर और घोड़ागाड़ी भी दे दी।  अब उसकी जिंदगी चैन सी गुजरने लगी।  उसे किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं थी।

 

 

 

 

एक दिन बादशाह अकबर ने उससे कहा, ” अगर आपको कभी भी किसी चीज की जरुरत हो तो आप बेझिझक बता देना। ” हुसिफ ने कहा, ” आपने इतना कुछ दिया है कि मुझे अब किसी चीज की जरुरत नहीं है।  आपने जो सम्मान मुझे दिया है, उसके बाद मुझे किसी चीज की आवश्यकता नहीं है। ”

 

 

 

 

कुछ सोचकर उसने फिर कहा, ” मैं चाहता हूँ कि बीरबल जैसे बुद्धिमान और योग्य व्यक्ति के साथ रहूँ। मेरी ख्वाहिश है कि जैसे बीरबल ( Birbal )  आपका सलाहकार है, वैसा ही मुझे भी कोई सलाह देने वाला हो।”

 

 

 

 

बादशाह अकबर ने कहा, ” ठीक है।  मैं आपकी यह इच्छा भी पूरी कराऊंगा। ” उसके बाद उन्होंने बीरबल को बुलाया और उनसे कहा, ” देखो आप तो जानते ही हो हुसिफ मेरे भाई जैसा है और मैं उसकी हर इच्छा पूरी करता हूँ।  अब इसकी इच्छा है कि इसे भी तुम्हारे जैसा योग्य सलाहकार चाहिए। अब तुम अपने जैसा एक योग्य सलाहकार जल्द से जल्द इसे मुहैया कराओ। ”

 

 

 

 

पहले तो बीरबल को यह समझ ही नहीं आया कि बादशाह को हुसिफ में क्या खूबी दिखाई दी जो इसे सलाहकार देने के लिये कह दिया।  कुछ देर बाद उसने कहा, ” आप चाहते हैं कि मैं ऐसा आदमी खोजकर लाऊं जो मेरे भाई जैसा हो।”

 

 

 

“ठीक समझे हो।” बादशाह ने कहा।

 

 

 

अब बीरबल ने सोचा, ” ऐसा कौन हो सकता है जो मेरे भाई जैसा हो।  हुसिफ बड़ा ही भाग्यशाली है जो बादशाह उसे भाई मानते हैं। अब मैं कहाँ से ढूँढू। ”

 

 

 

 

बीरबल को हुसिफ की ययह बात जमी नहीं।  उसने सोचा यह तो बड़ी ही नाइंसाफी हो रही है जो सर बादशाह के ” भाई जैसा ” होने कारण ही सारे लाभ ले रहा है।

 

 

 

 

 

बीरबल सोच ही रहा था कि उसी समय एक सांड के रम्भाने की आवाज आयी।  यह सुनकर बीरबल मुस्कुराया।  आखिरकार उसे अपने भाई जैसा कोई मिल गया था।

 

 

 

 

अगले दिन  वह सांड को साथ लेकर दरबार में पहुँच गए। यह देखकर अकबर बोले, ” तुम अपने साथ इस सांड़ को लेकर यहां क्यों आए हो ? ”

 

 

 

 

इसपर बीरबल ने कहा, ” यह मेरा भाई है। हम दोनों एक ही माँ का दूध पीकर बड़े हुए हैं……गौ माता का।  इस तरह से सांड मेरा भाई हुआ…..दूध – भाई। आप इसे हुसिफ को दे दें। ”

 

 

 

बीरबल की यह बात सुनकर उन्हें अपनी गलती का एहसास हो गया।  उन्हें लगा कि जिस तरह उनके जैसा कोई नहीं हो सकता, वैसे ही बीरबल भी एक हैं उनके जैसा कोई नहीं हो सकता।

 

 

 

 

Birbal Ke Kisse Se ( बीरबल के किस्से हिंदी में ) 

 

 

 

 

 

2- बादशाह अकबर बीरबल की चतुराई और बुद्धिमत्ता के बड़े ही कायल थे।  इसलिए दरबार के के बहुत से दरबारी बीरबल से ईर्ष्या रखते थे।

 

 

 

 

उन दरबारियों में से एक मंत्री जो महामत्री का पद पाना चाहता था उसने एक योजना बनाई।  वह यह जानता था कि जब तक बीरबल ( Birbal )  दरबार में हैं उसकी इच्छा कभी पूरी नहीं हो सकती।

 

 

 

 

 

एक दिन दरबार में अकबर ( Akbar )  बीरबल की खूब तारीफ़ कर रहे थे।  यह देखकर उस दरबारी को गुस्सा आ गया।  उसने कहा, ” बादशाह सलामत, मुझे क्षमा करें।  मैं बीरबल को बुद्धिमान नहीं मानता हूँ।  अगर वे मेरे तीन प्रश्नों का उत्तर दे देते  हैं तो मैं उन्हें बुद्धिमान मान लूंगा, अन्यथा मैं यही समझूंगा कि वे केवल चापलूसी करते हैं। ”

 

 

 

 

अकबर को बीरबल पर पूर्ण विश्वास था सो उन्होंने उस दरबारी की बात को मान लिया। मंत्री ने तीन सवाल किये ———–

 

 

१- आकाश में कितने तारे हैं ?

२- धरती का केंद्र कहाँ है ?

३- सारे संसार में कितने स्त्री पुरुष हैं ?

 

 

 

 

अकबर भी इन प्रश्नो से चकरा गए, लेकिन उन्होंने तुरंत ही बीरबल को इन प्रश्नो का उत्तर देने के लिए कहा और साथ ही उन्होंने शर्त राखी कि यदि आपने इन प्रश्नो का उत्तर नहीं दिया तो आपको मुख्य सलाहकार का पद छोड़ना होगा।

 

 

 

 

बीरबल ने कहा, ” महाराज यह प्रश्न तो बड़े ही सरल हैं और कठिन भी, लेकिन मैं इनका जवाब देता हूँ। लेकिन मुझे इसके लिए कुछ चीजों की आवश्यकता है। पहले आप एक भेड़ मँगवाइयों। ”

 

 

 

 

भेड़ मंगवाई गयी।  उन्होंने भेड़ को गौर से देखा और कुछ हिसाब लगाने के बाद उन्होंने कहा, ” इस भेड़ के शरीर पर जितने बाल हैं, उतने ही आसमान में तारे हैं। अगर किसी को और खासकर मंत्री साहब को विश्वास ना हो तो अगर गिन सकते हैं।

 

 

 

 

अब बीरबल ने कहा, ” अब दूसरे सवाल का जवाब सुनिए। ” बीरबल इधर – उधर थोड़ा घूमे और हिसाब किताब लगाया और जमीन पर कुछ लकीरे खींचने के बाद एक लोहे की छड़ मंगवाई और दरबार के मध्य में एक जगह उसे गाड़ दिया और उसके बोले,  “ महाराज बिल्कुल इसी जगह धरती का केन्द्र है, जो चाहे वह जांच सकता है। ”

 

 

 

 

 

उसके बाद बीरबल बोले, ” तीसरा सवाल बहुत ही कठिन है क्योंकि इस दुनिया में ऐसे बहुत से लोग है जो ना तो स्त्री हैं और ना ही पुरुष।  अब अगर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाए तो उचित गिनती हो सकती है और इसकी शुरुआत सवाल पूछने वाले मंत्री साहेब से करना चाहिए, क्योंकि यह  भी उसी श्रेणी में आते हैं।  ”

 

 

 

 

यह सुनते ही मंत्री साहब थार – थार कांपने लगे और उन्होंने बादशाह से कहा, ” हुजूर, मुझे अपने सवालों का जवाब मिल गया।  मैं पूरी तरह से संतुष्ट हूँ। ” उनके इतना कहते ही सभी लोग हंसने लगे और मंत्री साहब वहाँ से निकल लिए।

 

 

 

 

Akbar Birbal Ke Kisse Se Sunaiye 

 

 

 

 

3- एक दिन की बात है।  बादशाह अकबर के दरबार में अधिकांश लोग बीरबल के खिलाफ हो गए और बीरबल ( Birbal )  के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। बादशाह ने भारी जनमत को देखते हुए आदेश दिया कि, ” बीरबल को सूली पर चढ़ा दिया जाए। “

 

 

 

 

जब यह खबर बीरबल को लगी तो वे बड़े परेशान हुए, लेकिन तभी उनका दिमाग काम कर गया।  बीरबल ने कहा, ” मेरे खिलाफ जो आरोप लगा है वह इतना गंभीर नहीं है कि मुझे मृत्युदंड दिया जाए।  गलतिया तो सभी से होती है।  लेकिन कोई बात नहीं।  मैंने इस दरबार के लिए बहुत कुछ किया, लेकिन मोती बोने  की कला मैंने अभी तक नहीं बतायी।  अगर आज्ञा हो तो उसे बता दूँ।  ”

 

 

 

 

 

बादशाह अकबर ( Akbar )  जानते थे कि उनका फैसला गलत है और यह दबाव में लिया गया है और उन्हें पूरा विश्वास था कि बीरबल इस मुसीबत से अवश्य ही बाहर निकल आएंगे।  अतः उन्होंने अनुमति दे दी।

 

 

 

 

अब आज्ञा मिलते ही बीरबल को अकबर के सन्देश का भान हो गया।  उन्होंने कुछ विशेष महलों की और इशारा करते हुए कहा कि इसे गिरा दिया जाए।  यह स्थान मोती के लिए बहुत उत्तम है।

 

 

 

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यह महल झूठी शिकायत करने वाले दरबारियों के थे। महल गिराने के बाद बीरबल ने वहाँ जौ  बो दिए।  कुछ दिन बाद बीरबल से दरबार में सभी से कहा, ” कल वह शुभ दिन है जब ये पौधे मोती पैदा करेंगे। ”

 

 

 

 

सबके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा। बीरबल के कहने पर उस स्थान की सुरक्षा बढ़ा दी गयी। अगले दिन सभी लोग दरबार में उपस्थित हुए।  सबको अपनी आखों से मोती उगा हुआ देखने तीव्र इच्छा हो।

 

 

 

 

तब बीरबल ने कहा, ” इस मोती की एक खाशियत है।  इस मोती को वही तोड़ सकता है जिसने कभी भी अपराध नहीं किया हो और मैं तो अपराधी हूँ और मुझे सज़ा भी होने वाली है।  अतः मैं तो इस मोती को नहीं तोड़ सकता।  अगर आपमें से कोई ऐसा है तो आप जाएँ और मोती तोड़कर लाएं। लेकिन एक बात का ख्याल रहे, अगर आपने कोई भी अपराध किया होगा तो मोती मिटटी हो जाएगा। ”

 

 

 

 

कोई भी दरबारी आगे बढ़ने को तैयार नहीं हुआ।  यह देखकर बीरबल बोले, ” महाराज ! यहां तो हर कोई अपराधी है।  अब आप ही इस मोती को तोड़े। ”

 

 

 

 

 

अब अकबर भी परेशान हो गए और उन्होंने कहा, ” गलतियां सभी से होती है।  गलतियों की व्यापकता को देखते हुए उसके हिसाब से ही दंड दिया जाना चाहिए।  दंड देने से पूर्व उस अपराध की गहन छान – बीन अवश्य ही करनी चाहिए और उसके बाद अकबर ने बीरबल को सजा से मुक्त कर दिया। ”

 

 

 

 

अकबर बीरबल की हिंदी कहानी 

 

 

 

 

4- एक बार अकबर ने एक कारीगर को बख्तरबंद कवच बनाने का आदेश दिया. कुछ दिनों में कारीगर ने सैम्पल के तौर पर कुछ कवच लेकर दरबार में आया.

 

 

 

 

उसने पूरी कारीगरी से कवच को मजबूती प्रदान की थी. अकबर को कवच तो पसंद आया लेकिन उसकी मजबूती पर उन्हें शक हो रहा था. उन्होंने स्वयं इसका निरिक्षण करने का फैसला किया.

 

 

 

 

 

उन्होंने एक पुतले को कवच पहनाकर जैसे ही उसपर वार किया वह कवच फट गया. इससे अकबर बड़े ही क्रोधित हुए और उस कारीगर खूब खरी-खोटी सुनाते हुए आदेश दिया कि अगर अगली बार भी ऐसी ही गलती रही तो तुम्हे शूली पर लटका दिया जाएगा.

 

 

 

 

कारीगर बेहद निराश हो गया. वह घर आया और सारी बात अपनी पत्नी को बताई. उसकी पत्नी चालाक थी. उसने इस बारे में बीरबल से बात करने को कहा।

 

 

 

 

बीरबल ने पूरी बात ध्यान से सुनी और कारीगर से कहा “जब तुम फिर से कवच लेकर महाराज के पास जाना तो जब महाराज इसे काठ के पुतले को पहनाने की आज्ञा दें तो कहना इसकी परीक्षा पुतले पर नहीं हो सकती है, इसे मैं स्वयं ही पहन लेटा हूँ.

 

 

 

 

लेकिन ध्यान रखना जैसे ही महाराज या कोई और तुमपर हथियार चलाने के लिए झपटे।  उसी समय  तुम चिल्लाकर विचित्र स्थिति उत्पन्न कर देना, जिससे उसका हाथ काप जाए और वह दूर खडा हो जाए.

 

 

 

 

जब महाराज इसका कारण पूछेंगे तो कहना, ” महाराज! युद्ध के समय यह कवच कोई पुतला तो पहनेगा नहीं और जो कोई भी इसे पहनेगा उसके हथियार और खुद की शक्ति भी होगी, जिसका खौफ दुश्मन सैनिक में होगा और इसलिए वह पुतले पर किये जाने वाले प्रहार की तरह प्रहार नहीं कर सकेगा.

 

 

 

 

कारीगर को बात समझ में आ गयी. उसने ठीक वैसा ही वहाँ किया और बादशाह ने जब कारण पूछा तो उसने बीरबल की सारी बात बता दी. इसपर अकबर ने कहा बात तो तुम्हारी सही है, लेकिन यह बताओ यह उपाय तुम्हे किसने बताया. कारीगर ने सारी बात सच- सच बता दी. इसपर अकबर और दरबारी बड़े ही प्रसन्न हुए.

 

 

 

 

5- अकबर अक्सर बीरबल से अजीबोगरीब सवाल करते रहते थे. एक दिन उन्होंने बीरबल ( Birbal ) से पूछा, तुम बता सकते हों की इस राज्य में कितने अंधे रहते हैं? लेकिन उत्तर एकदम सही होना चाहिए.

 

 

 

 

इसपर बीरबल बोले महाराज! तुरंत तो इसका उत्तर देना मुश्किल है. इसका जवाब कुछ दिनों में मैं आपको दे पाऊंगा. अकबर ( Akbar ) ने उन्हें मोहलत दे दी.

 

 

 

 

अकबर अगले दिन एक बिना बुनी हुई चारपाई लेकर बाजार में बैठ गए और उसे बुनना शुरू कर दिया. उन्होंने दो आदमी बिठा रखे थे कागज़- कलम लेकर कुछ लिख रहे थे.

 

 

 

 

थोड़ी ही देर में भीड़ लग गयी. हर कोई बीरबल से यही पूछता “बीरबल क्या  कर रहे हो”? बीरबल कुछ नहीं बोलते. उनके साथ बैठे लोग ऐसे लोगों का नाम लिखते जाते.

 

 

 

 

यह बात अकबर तक पहुंची. अब अकबर भी बाज़ार पहुंचे और बीरबल से वही सवाल किया. बीरबल ने तुरंत ही अकबर का भी नाम लिख देने को कहां.

 

 

 

 

अकबर को आश्चर्य हुआ. उन्होंने तुरंत ही वह कागज़ ले लिया और देखा तो उसपे लिखा था ” अंधे लोगों की सूची “. अकबर बड़े नाराज हुए और बोले क्या तमाशा है बीरबल? मैं अंधा दिखता  हूँ?

 

 

 

 

बीरबल बोले. “महाराज! आपने देखा कि मैं चारपाई बन रहा हूँ फिर भी आपने सवाल पूछा कि मैं क्या कर रहा हूँ? अकबर को बात समझ में आ गयी. उन्होंने बीरबल को खूब इनाम दिया.

 

 

 

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